कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
यदि आपके घर में पूरे एक दिन जल नहीं होगा तो आप क्या करेंगे?
उत्तर

मैं घर में पहले से भरा हुआ जल बहुत सावधानी से काम में लूँगा, पास के सुरक्षित स्रोत से और जल लाऊँगा, और वे सब काम एक दिन के लिए टाल दूँगा जो टाले जा सकते हैं।

मेरे उस दिन की योजना, क्रम से:

  1. पहले गिनती कीजिए। ड्रम, बाल्टियाँ, घड़े और बोतलें देखकर पता कीजिए कि कितना जल है, और सबको ढक दीजिए।
  2. पीने का जल अलग रखिए। एक भरा घड़ा केवल पीने और भोजन बनाने के लिए रख दीजिए। उसे किसी और काम में कोई हाथ न लगाए।
  3. और जल लाइए। किसी बड़े के साथ बाल्टियाँ लेकर हैंडपंप, पड़ोसी के नल या नगरपालिका के टैंकर तक जाइए।
  4. सरल भोजन बनाइए। खिचड़ी जैसा एक ही पात्र में बनने वाला भोजन। सब्ज़ी धोने का जल पौधों को दे दीजिए।
  5. मग और छोटी बाल्टी से नहाइए, फव्वारे या बहते नल से नहीं।
  6. जल को दो बार काम में लीजिए। चावल या सब्ज़ी धोने का जल पौधों में, कपड़े खंगालने का जल फर्श या शौचालय में।
  7. जो टाला जा सकता है, टाल दीजिए। आज कपड़े नहीं धुलेंगे, स्कूटर नहीं धुलेगा और आँगन नहीं धुलेगा।
  8. अनजान स्रोत का जल उबालकर या छानकर ही पीजिए।
उपयोगजल न होने वाले दिन मैं क्या करूँगा
पीनाअलग ढका हुआ घड़ा; छोटे गिलास में लेकर पीना, भरकर फेंकना नहीं
भोजन बनानाएक ही सरल व्यंजन; बर्तन बार-बार न धोना
नहानाएक छोटी बाल्टी और मग
शौचालयकपड़े खंगालने से बचा हुआ जल
कपड़े धोनाएक दिन के लिए स्थगित
पौधे और पशुइन्हें पुन: उपयोग किया हुआ जल दीजिए — इन्हें भूलना नहीं है
एक दिन क्या सिखाता है: साधारण दिनों में जल दिखाई ही नहीं देता — बस नल खोल दिया जाता है। जिस दिन वह नहीं होता, उस दिन अचानक हर मग गिना जाता है। इसीलिए अध्याय आपसे यह कल्पना करने को कहता है। जो नदी सूख जाती है, वह पूरे नगर के साथ यही करती है।
प्र2.
क्या होगा यदि एक सप्ताह तक जल नहीं होगा? आप जल पीने, नहाने, खाना पकाने अथवा सफाई के कार्य कैसे करेंगे? आप जल लेने के लिए कहाँ जाएँगे?
उत्तर

पूरा सप्ताह बिलकुल अलग बात है। एक दिन घर के भरे हुए जल से निकल सकता है। सप्ताह भर के लिए परिवार को प्रतिदिन बाहर से जल लाना पड़ेगा — और हर बूँद के उपयोग में बहुत कठोर नियम रखने पड़ेंगे।

आवश्यकतासप्ताह भर मैं कैसे काम चलाऊँगासचमुच कितना जल चाहिए
पीनाकेवल सुरक्षित स्रोत का जल — चालू हैंडपंप, टैंकर या जल ए.टी.एम. — उबालकर या छानकर। ढके घड़े में डोई के साथ रखिए।प्रति व्यक्ति लगभग 3 लीटर प्रतिदिन। यही एक आवश्यकता है जिसे घटाया नहीं जा सकता।
भोजन बनानाएक ही पात्र में सरल भोजन। दाल या सब्ज़ी धोने का जल पुन: काम में लीजिए। बर्तन पहले कपड़े से पोंछिए, फिर कम जल से धोइए।एक समय के भोजन के लिए लगभग 5 लीटर
नहानाबाल्टी और मग से; कुछ दिन केवल गीले कपड़े से शरीर पोंछिए। बाल कम बार धोइए।40 के स्थान पर 15 लीटर
सफाई और शौचालयफर्श धोने के स्थान पर झाड़ू लगाकर गीले कपड़े से पोंछिए। कपड़े खंगालने का जल शौचालय में लीजिए।जो जल एक बार उपयोग हो चुका है, वही
कपड़ेकेवल आवश्यक कपड़े, सब एक साथ, एक टब में; खंगालने का जल फिर काम में लीजिए।प्रतिदिन के स्थान पर तीन दिन में एक बार
पशु और पौधेपशुओं को पीने का जल अवश्य मिले। पौधों को प्रात:काल पुन: उपयोग किया हुआ जल दीजिए।एक गाय को प्रतिदिन 30–40 लीटर

जल लेने के लिए मैं कहाँ जाऊँगा:

  1. नगरपालिका या पंचायत का टैंकर — उसका समय पता कीजिए और स्वच्छ ढके पात्र लेकर पंक्ति में लगिए।
  2. चालू हैंडपंप, बोरवेल या सार्वजनिक नल, अथवा पड़ोसी का बोरवेल।
  3. जल ए.टी.एम., जहाँ कार्ड या सिक्का डालने पर स्वच्छ जल मिलता है।
  4. विद्यालय, मंदिर या पंचायत भवन — ऐसे स्थानों पर प्राय: टंकी होती है।
  5. कुआँ, तालाब या नहर — केवल धुलाई और शौचालय के लिए; उबाले या छाने बिना पीने के लिए कभी नहीं।
  6. वार्ड सदस्य, सरपंच या नगरपालिका कार्यालय को सूचित कीजिए। सप्ताह भर जल न आना चुपचाप सहने की नहीं, बताने की बात है।
सप्ताह भर इतना कठिन क्यों है: जल भारी होता है। बीस लीटर का अर्थ है बीस किलोग्राम। परिवार को इससे कहीं अधिक प्रतिदिन चाहिए, इसलिए किसी को — प्राय: किसी स्त्री या बच्चे को — घंटों जल ढोना पड़ता है। विद्यालय और काम रुक जाते हैं। और जब सुरक्षित स्रोत समाप्त हो जाते हैं तो लोग असुरक्षित जल पीने लगते हैं, और वहीं से बीमारी आरंभ होती है। इसीलिए अध्याय कहता है कि परिवारों को कभी-कभी अपना घर छोड़कर उन स्थानों पर जाना पड़ता है जहाँ जल उपलब्ध है।
क्या आप जानते हैं? सन् 2019 में चेन्नई के जलाशय सूख जाने पर अन्य जिलों से विशेष जल-रेल चलानी पड़ी थी। सन् 2022 में बेंगलुरु में भारी वर्षा के कारण घर और सड़कें जलमग्न हो गए थे। जल की कमी और जल की अधिकता — दोनों जीवन को कठिन बना देती हैं।
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