कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 5 गतिविधि 6 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
छोटे-छोटे समूह बनाइए और किसी एक दुपट्टे अथवा स्कार्फ को सिर पर पहनने वाला परिधान बनाने में एक-दूसरे की सहायता कीजिए।
उत्तर

तीन-तीन के समूह बनाइए। एक पहनने वाला, एक बाँधने वाला, एक खुला सिरा पकड़ने वाला। लंबा दुपट्टा, स्टोल या बड़ा स्कार्फ काम आएगा। न कुछ काटना है न सिलना, इसलिए कपड़ा ख़राब नहीं होगा।

सरल साफा-शैली की पगड़ी:

  1. दुपट्टे को लंबाई में दो-तीन बार मोड़िए, जिससे एक हथेली चौड़ी लंबी पट्टी बन जाए।
  2. पट्टी का मध्य भाग पहनने वाले के माथे पर, भौंहों से ठीक ऊपर रखिए।
  3. दोनों सिरे कानों के ऊपर से पीछे ले जाइए, सिर के पीछे आड़े कीजिए और फिर सामने लाइए।
  4. अब उन्हें सिर पर बार-बार लपेटिए, हर लपेट पिछली लपेट से थोड़ी ऊपर, ताकि सुंदर शंकु बन जाए।
  5. अंतिम सिरा पीछे की किसी तह में मज़बूती से खोंस दीजिए। कुछ भी लटकना नहीं चाहिए।
  6. ऊपर से एक छोटा कोना निकालकर पंखे जैसा फैला दीजिए — जैसे राजस्थानी साफे की कलगी।

सरल टोपी-शैली: स्कार्फ को त्रिकोण में मोड़िए, लंबा किनारा माथे पर रखिए, दोनों कोने पीछे ले जाकर चपटी गाँठ लगाइए, और लटकता कोना गाँठ के नीचे खोंस दीजिए।

यदि बार-बार खिसक जाएक्या ठीक करें
पगड़ी ढीली हो जाती हैतहें अधिक चौड़ी थीं। पट्टी पतली बनाइए और हर लपेट को कसकर खींचिए।
बहुत ऊँची बैठती है और डगमगाती हैमाथे से, नीचे से आरंभ कीजिए और पहली लपेट सपाट रखिए।
सिरा टिकता ही नहींउसे एक नहीं, दो तहों के नीचे खोंसिए। पीछे एक छोटी सेफ़्टी पिन लगाई जा सकती है।
करने से क्या सीखा: पगड़ी केवल एक लंबा कपड़ा है — न सिलाई, न बटन। उसका पूरा आकार लपेटने के ढंग से बनता है। इसीलिए वही कपड़ा राजस्थान, पंजाब, कर्नाटक और महाराष्ट्र में अलग-अलग ढंग से बँधता है, और वहाँ के लोग एक नज़र में एक-दूसरे की बँधाई पहचान लेते हैं।
सावधानी और शिष्टाचार: किसी के सिर पर कुछ बाँधने से पहले अनुमति लीजिए। कुछ लोग सिर का परिधान अपनी आस्था के कारण पहनते हैं — वह वेशभूषा नहीं होता। सादे स्कार्फ से, सीखने की भावना से, एक-दूसरे पर अभ्यास कीजिए।
प्र2.
अवशिष्ट सामग्री का उपयोग करके सिर पर पहनने वाले परिधान या टोपी बनाइए।
उत्तर

कोई नई सामग्री चाहिए ही नहीं। पुराना अख़बार, गत्ते का कार्टन, उपहार लपेटने का काग़ज़, बोतल के ढक्कन, ऊन के टुकड़े, पुरानी चूड़ियाँ, सूखे पत्ते, ज़मीन पर पड़ा पंख — सब काम आएगा।

अख़बार की टोपी — छह चरण:

  1. अख़बार का पूरा पन्ना खोलकर आधा मोड़िए, तह ऊपर की ओर रखिए।
  2. ऊपर के दोनों कोने भीतर की ओर मोड़कर बीच में मिलाइए। अब नीचे एक पट्टी के साथ त्रिकोण बन गया।
  3. नीचे की पट्टी को सामने की ओर ऊपर मोड़िए। फिर पूरे काग़ज़ को पलटिए।
  4. इस ओर की पट्टी भी ऊपर मोड़िए।
  5. सारी तहें अँगूठे के नाखून से कसकर दबाइए।
  6. नीचे से खोलकर सिर पर पहनिए। यह गांधी-टोपी जैसा आकार है।

गत्ते का मुकुट-शैली शिरोवस्त्र — पाँच चरण:

  1. गत्ते की एक पट्टी काटिए, जो सिर के चारों ओर आ जाए और चार अँगुल चौड़ी हो।
  2. सिर पर नापिए, दो अँगुल अतिरिक्त छोड़िए, और सिरों को जोड़कर गोल छल्ला बना लीजिए।
  3. छल्ले को उपहार-काग़ज़ से ढकिए या किसी एक चटख रंग से रँगिए।
  4. सजाइए — शीशों के लिए बोतल के ढक्कन के गोल टुकड़े, किनारों पर लटकाने के लिए ऊन के फुँदने, ऊपर मुड़े हुए काग़ज़ के नोक।
  5. भीतरी किनारे पर मुलायम कपड़े की पट्टी लगाइए ताकि माथा न छिले।
अवशिष्ट सामग्रीयह क्या बन सकती है
अख़बारमुड़ी हुई टोपी, या ढाँचे के लिए काग़ज़ की नलियाँ
गत्ते का कार्टनमुकुट की पट्टी या हैलमेट का खोल
बोतल के ढक्कन, पुरानी चूड़ियाँशीशे जैसी चमकीली गोलियाँ
ऊन, जूट की डोरीफुँदने और लटकती लड़ियाँ
पुराना उपहार-काग़ज़, कपड़े की कतरनेंचटख आवरण और किनारी
यहाँ अवशिष्ट सामग्री ही सही सामग्री क्यों है: असली शिरोवस्त्र सदा उसी सामग्री से बनते थे जो उस जगह पहले से थी — पूर्वोत्तर में बेंत और पत्ते, पहाड़ों में ऊन, मैदानों में कपास। जो चीज़ें आस-पास पड़ी हैं उनसे बनाना उसी विचार को आगे बढ़ाना है, और कुछ भी कूड़ेदान में नहीं जाता।
छोटी प्रदर्शनी कीजिए: हर बच्चा अपना बनाया परिधान पहनकर एक वाक्य कहे — यह किससे बना है, और भारत के किस भाग से विचार लिया गया है। बस, गतिविधि पूरी।
क्या यह उपयोगी रहा?