कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 5 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
यदि आपको एक और भारतीय भाषा सीखनी हो तो आप कौन-सी भाषा का चयन करेंगे और क्यों?
उत्तर

वह भाषा चुनिए जिसका उपयोग आप सचमुच कर सकेंगे, और बताइए कि किसके साथ करेंगे। इसी से यह उत्तर अनुमान न रहकर अच्छा उत्तर बनता है।

चुनने के तीन समझदार ढंग:

  1. आस-पास बोली जाने वाली भाषा। कक्षा का कोई मित्र, पड़ोसी, दुकानदार — रोज़ अभ्यास मिलेगा।
  2. अपने ही परिवार की भाषा। अनेक बच्चे दादी-नानी की भाषा समझ लेते हैं पर बोल नहीं पाते। उसे सीखने से उनकी कहानियाँ खुल जाती हैं।
  3. जिस भाषा की ध्वनि अच्छी लगे। कोई गीत, फ़िल्म या कविता भी पूरा-पूरा अच्छा कारण है।

नमूना उत्तर: मैं तमिल सीखना चाहूँगा। हमारी गली में दो परिवार घर पर तमिल बोलते हैं, और मेरी सहेली मीना तमिल की पुस्तकें पढ़ती है जो मैं नहीं पढ़ सकती। तमिल संसार की सबसे पुरानी जीवित भाषाओं में से एक है, जिसकी कविताएँ दो हज़ार वर्ष से भी पुरानी हैं। मैं रोज़ के वाक्यों से आरंभ करूँगी — कैसे हो, तुम्हारा नाम क्या है, धन्यवाद — और मीना ने कहा है कि वह मुझे अक्षर सिखा देगी।

चरणपहले क्या करें
1रोज़ के दस शब्द सीखिए — पानी, भोजन, आओ, जाओ, धन्यवाद, कितने का, हाँ, नहीं, नाम, मित्र
2पाँच पूरे वाक्य सीखिए और हर दिन किसी वास्तविक व्यक्ति से बोलिए
3अक्षर पढ़ना सीखिए — अपने नाम के अक्षरों से आरंभ कीजिए
4एक गीत सीखिए। गीत से ध्वनियाँ याद रह जाती हैं
दूसरी भारतीय भाषा सीखना क्यों अच्छा है: हर भाषा में ऐसी कहानियाँ, गीत और चुटकुले होते हैं जो अनुवाद में नहीं आते। किसी की भाषा सीखना उसे यह बताना भी है कि वह हमारे लिए महत्वपूर्ण है। और जो बच्चा पहले से दो भाषाएँ जानता है, उसे तीसरी सीखना कठिन नहीं, आसान लगता है।
प्र2.
आपको विभिन्न मुद्रा नोटों में कौन-से स्मारक दिखाई देते हैं? नीचे दी गई तालिका में उनके नाम लिखिए। (मूल्य वर्ग / स्मारक / राज्य का नाम — ₹10 कोणार्क का सूर्य मंदिर, ओडिशा दिया गया है; ₹20, ₹50, ₹100, ₹200, ₹500 रिक्त हैं।)
उत्तर

वर्तमान श्रृंखला के हर नोट के पीछे भारत का कोई प्रसिद्ध स्मारक छपा है। तालिका इस प्रकार भरी जाएगी।

मूल्य वर्गस्मारकराज्य का नाम
₹10कोणार्क का सूर्य मंदिरओडिशा
₹20एलोरा की गुफाएँमहाराष्ट्र
₹50हम्पी का पत्थर का रथकर्नाटक
₹100पाटन की रानी की वाव (बावड़ी)गुजरात
₹200साँची का स्तूपमध्य प्रदेश
₹500लाल क़िलादिल्ली

हर एक पर एक नज़र:

  • कोणार्क का सूर्य मंदिर — सूर्य देव के विशाल पत्थर के रथ के रूप में बना मंदिर, जिसमें चौबीस नक्काशीदार पहिए और सात घोड़े हैं।
  • एलोरा की गुफाएँ — पहाड़ी की चट्टान काटकर बनाए गए मंदिर और कक्ष, जिन्हें तीन अलग-अलग धर्मों के लोगों ने साथ-साथ बनाया।
  • हम्पी का पत्थर का रथ — विजयनगर के महान नगर के खंडहरों में पत्थर तराशकर बनाया गया छोटा रथ।
  • रानी की वाव — सात मंज़िल नीचे जाती हुई बावड़ी, जिसकी दीवारें सैकड़ों मूर्तियों से भरी हैं।
  • साँची का स्तूप — ईंट और पत्थर का विशाल गुंबद, जो बुद्ध के अवशेष रखने के लिए सम्राट अशोक के समय बनना आरंभ हुआ।
  • लाल क़िला — लाल बलुआ पत्थर का क़िला, जहाँ से हर स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं।
चित्रों की जगह स्मारक क्यों: स्मारक सबका होता है। हर नोट पर एक स्मारक छापना पूरे देश को उसका अपना इतिहास चुपचाप सिखाता है — नोट-दर-नोट। और ये नोट भारत भर में फैले हैं, ओडिशा से गुजरात तक, मध्य प्रदेश से कर्नाटक तक।
रंग भी सहायता करते हैं: ₹10 चॉकलेटी भूरा, ₹20 हरा-पीला, ₹50 चमकीला नीला, ₹100 बैंगनी-लैवेंडर, ₹200 चटख पीला और ₹500 पत्थरी धूसर है। अलग रंग और अलग आकार से नोट पहचानना सरल हो जाता है — विशेषकर उस व्यक्ति के लिए जिसे कम दिखाई देता है।
प्र3.
नीचे दिए गए चित्रों में से भारतीय मुद्रा प्रतीक को पहचानिए (संकेत हमारे मुद्रा नोट में है)। क्या आप किसी अन्य देश की मुद्रा के प्रतीक को भी पहचान सकते हैं?
abcdefgh$YY££
पृष्ठ 91 पर छपे आठ मुद्रा प्रतीक।
उत्तर

भारत का मुद्रा प्रतीक ₹ है — पंक्ति में बाएँ से चौथा। इसे रुपये का चिह्न कहते हैं।

इसे कैसे पहचानें। देवनागरी का अक्षर देखिए। अब उसके ऊपर एक रेखा और थोड़ा नीचे एक छोटी रेखा जोड़ दीजिए, जैसे बराबर के चिह्न की दो रेखाएँ। यही ₹ है। यह देवनागरी के और रोमन के R को मिलाकर बना है, और ऊपर की दो रेखाएँ तिरंगे की दो पट्टियों तथा समानता का भाव दर्शाती हैं।

पंक्ति का प्रतीककिस देश की मुद्राकैसे पहचानें
यूरो — यूरोप के अनेक देशगोल C पर दो आड़ी रेखाएँ
$डॉलर — संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कुछ और देशS के बीच से जाती एक खड़ी रेखा
रूबल — रूसबड़े P की डंडी पर एक आड़ी रेखा
रुपया — भारतअक्षर र, ऊपर दो रेखाएँ — एक लंबी, एक छोटी
¥ (एक रेखा)युआन — चीनबड़े Y पर एक आड़ी रेखा
¥ (दो रेखाएँ)येन — जापानवही Y, पर दो आड़ी रेखाओं के साथ
£पाउंड स्टर्लिंग — यूनाइटेड किंगडमघुमावदार L पर एक आड़ी रेखा

हिंदी संस्करण में सात प्रतीक छपे हैं। अंग्रेज़ी संस्करण में आठ हैं — वहाँ पाउंड का चिह्न दो अलग-अलग टाइप में दो बार छपा है।

नोट में संकेत कहाँ है: दस रुपये का नोट लेकर उस पर छपा बड़ा मूल्य देखिए। 10 से पहले ₹ का चिह्न लगा है। प्रश्न इसी संकेत की ओर इशारा कर रहा है।
क्या आप जानते हैं? ₹ चिह्न बहुत नया है। इसकी रचना डी. उदय कुमार ने की थी और भारत ने इसे 2010 में अपनाया। उससे पहले हम केवल Rs. लिखते थे।
प्र4.
₹ 10 के नोट में आपको कौन-से पशु दिखाई दे रहे हैं?
उत्तर

दस रुपये के नोट पर सबसे स्पष्ट पशु हैं राष्ट्रीय प्रतीक के शेर, जो नोट के सामने वाले भाग पर छपे हैं।

  1. शेर। सामने की ओर, मूल्य के पास दाईं ओर राष्ट्रीय प्रतीक है — अशोक का सिंह-शीर्ष। गोल मंच पर तीन शेर पीठ जोड़े खड़े हैं। (चौथा शेर पीछे छिपा रहता है।)
  2. घोड़ा और बैल। शेरों के नीचे वाले गोल मंच को देखिए। उस पट्टी पर दौड़ता हुआ घोड़ा और एक बैल बने हैं, और बीच-बीच में चक्र। ये बहुत छोटे हैं, इसलिए नोट को अच्छे प्रकाश में देखिए।
  3. पीछे की नक्काशी। नोट के पीछे कोणार्क का सूर्य मंदिर है। वह मंदिर सूर्य देव के रथ के रूप में बना है, जिसे घोड़े खींचते हैं, और उसकी पत्थर की दीवारों पर हाथी सहित अनेक पशु तराशे गए हैं। बड़े पहिए के पास वाली नक्काशीदार दीवार ध्यान से देखिए।
नोट का भागकहाँ देखेंपशु
सामनेदाईं ओर का राष्ट्रीय प्रतीकशेर (तीन दिखाई देते हैं)
सामनेशेरों के नीचे का गोल मंचएक घोड़ा और एक बैल
पीछेकोणार्क सूर्य मंदिर की नक्काशीपत्थर की नक्काशी में घोड़े और हाथी
शेर वहाँ क्यों हैं: राष्ट्रीय प्रतीक हमारे देश का अपना चिह्न है, जो दो हज़ार वर्ष से भी पहले सम्राट अशोक द्वारा सारनाथ में स्थापित स्तंभ से लिया गया है। यह शक्ति, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है, और यह हर नोट, सरकारी प्रलेख तथा आपके आधार कार्ड पर छपा रहता है। इसके नीचे लिखा है — सत्यमेव जयते, अर्थात् सत्य की ही विजय होती है।
स्वयं कीजिए: किसी बड़े से ₹10 का नोट माँगिए। पहले शेर ढूँढ़िए, फिर उनके नीचे का मंच। देखने के बाद नोट लौटा दीजिए, और मुद्रा को सदा स्वच्छ, सूखे हाथों से पकड़िए।
प्र5.
आपने अपने विद्यालय या अन्य किसी स्थान पर भारत के कुछ महान व्यक्तियों के चित्र अवश्य देखे होंगे। नीचे दिए गए इन महान पुरुषों और महिलाओं के नाम बताइए और उनके योगदान के विषय में कुछ पंक्तियाँ लिखिए।
  1. मूँछों वाला एक युवक। उसने चौड़े किनारे वाला भूरा फ़ेल्ट हैट और हल्के नीले रंग की कमीज़ पहनी है।
  2. पीले किनारे वाली लाल साड़ी में एक महिला। उसके सिर पर लाल कपड़ा बँधा है जिसका पीला-नीला छोर लटक रहा है। गले में मोतियों की माला और माथे पर बिंदी है।
  3. हरी सैनिक वर्दी और हरी टोपी पहने एक व्यक्ति। गोल चश्मा, छाती पर पदकों की पट्टियाँ और चमड़े का पट्टा है।
  4. पीछे की ओर सँवारे चाँदी जैसे सफ़ेद बालों वाला एक मुस्कुराता हुआ वृद्ध व्यक्ति, सादे भूरे-सफ़ेद कुर्ते में।
  5. सफ़ेद पगड़ी और गोल चश्मा पहने एक वृद्ध व्यक्ति, पीले कुर्ते में।
  6. बगल से दिखता एक दाढ़ी वाला व्यक्ति। उसने कलगी लगी सफ़ेद-नीली रत्नजड़ित पगड़ी, मोतियों की मालाएँ और सुनहरे किनारों वाला नीला वस्त्र पहना है।
पृष्ठ 92 के छह चित्र — यहाँ उनका वर्णन दिया गया है; चित्र स्वयं पाठ्यपुस्तक में देखिए।
उत्तर

पृष्ठ 92 के छह चित्रों को पंक्ति दर पंक्ति, बाएँ से दाएँ देखिए।

ऊपर की पंक्ति

  1. भगत सिंह — भूरे हैट और हल्के कुर्ते वाले युवक। ये पंजाब के क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे। ये और इनके साथी चाहते थे कि अंग्रेज़ भारत तुरंत छोड़ दें। इन्होंने इंक़लाब ज़िंदाबाद का नारा दिया। 1931 में, केवल 23 वर्ष की आयु में इन्हें फाँसी दे दी गई। इतनी कम आयु में दिखाया गया इनका साहस आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
  2. झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई — लाल पगड़ी, मोतियों की माला और लाल साड़ी वाली वीरांगना। ये झाँसी की रानी थीं। जब अंग्रेज़ों ने उनका राज्य लेना चाहा तो उन्होंने सौंपने से मना कर दिया और 1857 के महान विद्रोह में स्वयं अपनी सेना का नेतृत्व किया। ये लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं और हमारे इतिहास की सबसे साहसी नेताओं में गिनी जाती हैं।
  3. सुभाष चंद्र बोस (नेताजी) — हरी सैनिक वर्दी, टोपी और गोल चश्मे वाले व्यक्ति। इनका मानना था कि स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना ही होगा, और इन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज बनाई। इनका आह्वान था — तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगाजय हिंद का अभिवादन भी इन्हीं का दिया हुआ है।

नीचे की पंक्ति

  1. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम — सफ़ेद बालों वाले मुस्कुराते हुए वयोवृद्ध। ये वैज्ञानिक थे और इन्होंने भारत के रॉकेट तथा मिसाइल कार्य का नेतृत्व किया, इसीलिए इन्हें भारत का मिसाइल मैन कहा जाता है। ये भारत के 11वें राष्ट्रपति बने। ये सदा कहते थे कि वे शिक्षक के रूप में याद किए जाना चाहते हैं, और अपने अंतिम वर्ष विद्यार्थियों से बातचीत में बिताए।
  2. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन — श्वेत पगड़ी और गोल चश्मे वाले व्यक्ति। ये महान शिक्षक और दार्शनिक थे, और बाद में भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति तथा दूसरे राष्ट्रपति बने। जब उनके विद्यार्थी उनका जन्मदिन मनाना चाहते थे तो उन्होंने कहा कि इसे सभी शिक्षकों का दिन बना दीजिए। इसीलिए भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
  3. छत्रपति शिवाजी महाराज — नुकीली दाढ़ी, मोतियों की मालाओं और कलगीदार पगड़ी वाले शासक। इन्होंने 17वीं शताब्दी में मराठा राज्य की स्थापना की। ये कुशल सेनानायक थे, जिन्होंने अपने क्षेत्र की पहाड़ियों और किलों का चतुराई से उपयोग किया, समुद्र तट की रक्षा के लिए नौसेना बनाई, और साधारण लोगों, किसानों तथा स्त्रियों के साथ न्याय के लिए जाने गए।
नामकिस रूप में जाने जाते हैंकिसलिए याद करें
भगत सिंहक्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी23 वर्ष की आयु में साहस; इंक़लाब ज़िंदाबाद का नारा
रानी लक्ष्मीबाईझाँसी की रानी1857 में स्वयं सेना का नेतृत्व, कभी समर्पण नहीं
सुभाष चंद्र बोसनेताजीआज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना; जय हिंद
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाममिसाइल मैन; 11वें राष्ट्रपतिरॉकेट और मिसाइल; आजीवन बच्चों के शिक्षक
डॉ. एस. राधाकृष्णनदार्शनिक; दूसरे राष्ट्रपतिउनके जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस
छत्रपति शिवाजी महाराजमराठा राज्य के संस्थापककिले, नौसेना और साधारण लोगों के लिए न्याय
इन सबमें समान क्या है: ये अलग-अलग शताब्दियों, अलग-अलग क्षेत्रों और अलग-अलग आस्थाओं के हैं। तीन ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, एक ने राज्य बनाया, दो ने मन गढ़े। फिर भी छहों ने अपने से पहले देश को रखा — इसीलिए इनके चित्र हमारे विद्यालयों में लगे रहते हैं।
प्र6.
सामूहिक गतिविधि — अपने क्षेत्र या राज्य के उन व्यक्तियों के विषय में अपने से बड़ों से पता कीजिए जिन्होंने देश के लिए योगदान दिया हो और उनसे प्राप्त जानकारी को अपनी कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर

महान लोग केवल पुस्तकों में नहीं होते। भारत के लगभग हर ज़िले में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे जानना चाहिए, और उन्हें याद रखने वाले आपके अपने बड़े-बुज़ुर्ग हैं।

चरण 1 — समूह बनाइए और काम बाँटिए। चार-पाँच बच्चे। एक लिखेगा, एक चित्र बनाएगा, एक समय देखेगा, एक समूह की ओर से बोलेगा।

चरण 2 — तय कीजिए किससे पूछना है। दादा-दादी, नाना-नानी, कोई बुज़ुर्ग पड़ोसी, सेवानिवृत्त शिक्षक, गाँव के मुखिया, पुस्तकालय वाले, गली की सबसे पुरानी दुकान के दुकानदार।

चरण 3 — ये छह प्रश्न पूछिए। उत्तर सुनते-सुनते लिखते जाइए।

  1. हमारे क्षेत्र का कौन-सा व्यक्ति है जिसकी चर्चा आज भी होती है?
  2. वे कब हुए और उन्होंने क्या किया?
  3. उनके कारण क्या बदला?
  4. क्या यहाँ उनके नाम पर कुछ है — विद्यालय, सड़क, अस्पताल, प्रतिमा?
  5. उनके बारे में कोई कहानी याद है?
  6. और किससे पूछना चाहिए?

चरण 4 — उन लोगों को भी खोजिए जो छूट जाते हैं। स्वतंत्रता सेनानी तो हैं ही। पर ये भी — वह महिला जिसने कस्बे का पहला बालिका विद्यालय आरंभ किया; वह चिकित्सक जो निःशुल्क औषधालय चलाते थे; वह किसान जिसने लुप्त होता बीज बचाया; वह व्यक्ति जिसने तालाब साफ़ कराकर बचाया; कोई खिलाड़ी; कोई लोक गायक; कोई शिल्पी जिसने पुराना शिल्प जीवित रखा।

चरण 5 — तीन मिनट में प्रस्तुत कीजिए। नाम, स्थान, समय, क्या किया, क्या बदला, और एक कहानी। हो सके तो चित्र, तस्वीर या कोई वस्तु भी दिखाइए।

नमूना उत्तर: हमारे समूह ने मेरी दादी से हमारे कस्बे की शांति देवी के बारे में पूछा। 1974 में उन्होंने एक पेड़ के नीचे छह लड़कियों को पढ़ाना आरंभ किया, क्योंकि आस-पास लड़कियों के लिए कोई विद्यालय नहीं था। पहले माता-पिता भेजना नहीं चाहते थे, इसलिए वे स्वयं हर घर गईं। दस वर्ष में वह कक्षा पूरा विद्यालय बन गई। स्टेशन रोड का बालिका विद्यालय आज भी है और उन्हीं के नाम पर है। मेरी दादी उन्हीं पहली छह लड़कियों में से एक थीं। वे कहती हैं कि कठिन पढ़ाई नहीं थी — कठिन था उन लोगों के सामने से गुज़रना जो हँसते थे।

बड़ों से क्यों पूछें, केवल पुस्तकों से क्यों नहीं: छोटे, स्थानीय इतिहास प्रायः कभी लिखे ही नहीं जाते। जब कोई बुज़ुर्ग आपको कहानी सुनाते हैं, तो उसे पहली बार लिखने वाले आप बनते हैं। यह असली काम है और यह केवल आपकी कक्षा का है।
साक्षात्कार का शिष्टाचार: पहले अनुमति लीजिए। बीच में टोके बिना सुनिए। जिसने कहानी सुनाई उसका नाम लिखिए। अपने नोट उन्हें पढ़कर सुनाइए और पुष्टि कर लीजिए। अंत में धन्यवाद कहिए।
प्र7.
परियोजना — सांस्कृतिक मेला। भारत की जीवंत विविधताओं का उत्सव मनाइए जहाँ प्रत्येक राज्य अपनी मनमोहक कहानी कहता है। कक्षा को समूहों में बाँटिए; प्रत्येक समूह के लिए एक राज्य निर्धारित कीजिए; प्रत्येक समूह उस राज्य की पारंपरिक वेशभूषा, लोकप्रिय भोजन, पर्व, भाषा, नृत्य अथवा संगीत पर प्रस्तुति तैयार करेगा; पोस्टर और कटआउट बनाइए; कक्षा में मेला लगाइए, हर समूह अपना स्टॉल लगाएगा; मेले के बाद चर्चा कीजिए — आपने प्रत्येक राज्य में क्या अनूठी विशेषताएँ देखीं? आपने कौन-सी समानताएँ या साझा मूल्य देखे?
उत्तर

सांस्कृतिक मेला पूरे अध्याय को एक दोपहर में बदल देता है। इसे कैसे चलाएँ और कैसे अच्छे ढंग से समाप्त करें, यह रहा।

चरण 1 — समूह बनाइए और राज्य बाँटिए। चार-पाँच बच्चों के समूह। हर समूह एक कटोरी से एक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की पर्ची निकाले। उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और पूर्वोत्तर — सब आ जाएँ, इसका ध्यान रखिए।

चरण 2 — हर समूह अपने राज्य के लिए यह छह-खाने वाला चार्ट भरे।

खानाक्या पता करना हैउदाहरण — असम
पारंपरिक वेशभूषापर्व के दिनों में लोग क्या पहनते हैंस्त्रियों की मेखला-चादर; पुरुषों की धोती और गमोसा
लोकप्रिय भोजनदो रोज़ के व्यंजन और एक पर्व का व्यंजनचावल के साथ मछली की तरी; खार; बिहू पर पीठा
पर्वसबसे बड़ा पर्व और वह कब आता हैबिहू, खेती के वर्ष के तीन अवसरों पर
भाषाएँलोग क्या बोलते हैं; नमस्ते कैसे कहते हैंअसमिया, बोडो, मिसिंग; नमस्ते के लिए नमस्कार
नृत्य या संगीतएक नृत्य और एक वाद्ययंत्रबिहू नृत्य; ढोल और पेपा
एक विशेष बातराज्य किसके लिए प्रसिद्ध हैकाज़ीरंगा का एक सींग वाला गैंडा; असम की चाय

चरण 3 — स्टॉल बनाइए। राज्य के रेखा-मानचित्र वाला पोस्टर। वेशभूषा के कटआउट। भोजन के चित्र या मिट्टी के छोटे मॉडल। उस राज्य की भाषा के दस शब्दों का चार्ट। कोई ढोल या ताल जो समूह बजाकर दिखा सके। चार्ट को तीन भागों में मोड़िए ताकि वह मेज़ पर स्वयं खड़ा रहे।

चरण 4 — मेला चलाइए। आधा समूह स्टॉल पर रहकर बताए, आधा दूसरे स्टॉल देखने जाए। फिर अदल-बदल कीजिए, ताकि सबको दोनों बारी मिलें। हर देखने वाले को एक पर्ची दीजिए, जिस पर वह हर स्टॉल से एक नई बात लिखे।

चरण 5 — अंतिम गोल घेरा। दोनों प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

आपने प्रत्येक राज्य में क्या अनूठी विशेषताएँ देखीं?

नमूना उत्तर: हर स्टॉल पर कुछ ऐसा था जो और कहीं नहीं था। केरल में नौका दौड़ और केले के पत्ते पर परोसा भोजन था। राजस्थान में रेगिस्तान, कठपुतली का खेल और चटख साफा था। असम में एक सींग वाला गैंडा और चाय के बगान थे। नगालैंड में हॉर्नबिल महोत्सव और ऐसा बुना शॉल था जिसका नमूना ही बता देता है कि पहनने वाला कौन है। कश्मीर में शिकारा और इतना महीन शॉल था कि अँगूठी से निकल जाए। तमिलनाडु में मंदिर का गोपुरम और सुबह द्वार पर बनी कोलम थी।

आपने कौन-सी समानताएँ या साझा मूल्य देखे?

नमूना उत्तर: ऊपर से अलग दिखने वाले ये स्टॉल भीतर से आश्चर्यजनक रूप से एक जैसे थे।

  • हर राज्य में फ़सल का पर्व था — बैसाखी, बिहू, ओणम, पोंगल, नुआखाई, लोहड़ी। नाम अलग, पर फ़सल के लिए वही धन्यवाद।
  • हर राज्य अतिथि का स्वागत भोजन से करता है। व्यंजन बदलता है, स्वागत नहीं।
  • हर राज्य के पास अपना नृत्य और अपना ढोल है, और विवाह तथा पर्वों पर उनका उपयोग होता है।
  • हर राज्य अपनी नदियों, पहाड़ों और पेड़ों का सम्मान अपने गीतों और कथाओं में करता है।
  • हर राज्य बड़ों और शिक्षकों का आदर करता है, और उसके अभिवादन का अपना ढंग है।
  • हर राज्य में हाथ से बना कोई शिल्प है, जो माता-पिता से बच्चों को मिलता आया है।
यह मेला वास्तव में क्या सिखाता है: केवल ऊपर से देखिए तो भारत अनेक अलग-अलग देशों जैसा लगता है — अलग कपड़े, अलग भोजन, अलग लिपियाँ। थोड़ा भीतर देखिए तो हर जगह वही कुछ बातें मिलती हैं — फ़सल के लिए धन्यवाद, अतिथि का स्वागत, बड़ों का आदर, संगीत से प्रेम, भूमि की देखभाल। ये साझी बातें धागा हैं; भिन्नताएँ रंग हैं। दोनों मिलकर एक सशक्त, जीवंत वस्त्र बुनते हैं। अध्याय जिसे वसुधैव कुटुम्बकम् कहता है, वह यही है — सारा संसार एक परिवार।
मेले के बाद इसे सँभालकर रखिए: सब समूहों के छह-खाने वाले चार्ट एक साथ बाँधकर एक पुस्तक बना लीजिए और कक्षा के पुस्तकालय में रखिए। अगले वर्ष उसमें और जोड़िए। कुछ वर्षों में आपके विद्यालय के पास बच्चों का बनाया भारत का अपना एटलस होगा।
क्या यह उपयोगी रहा?