कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 6 गतिविधि 1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
किसी समाचार-पत्र का या पुराने कागज का एक आयताकार टुकड़ा लीजिए और उसे एक पतली नली के चारों ओर घुमाकर लपेटिए। किनारों को गोंद से चिपका दीजिए जिससे वह खुले नहीं। फिर उसे एक सपाट सतह पर सीधा खड़ा कर दीजिए। क्या वह खड़ा रहता है?
उत्तर

नहीं। सादी कागज की नली खड़ी नहीं रहती। वह डगमगाकर तुरंत गिर जाती है।

क्या करना है, चरण-दर-चरण।

  1. पुराने समाचार-पत्र का एक आयताकार टुकड़ा लीजिए।
  2. उसे एक लंबे किनारे से कसकर लपेटकर अपने अँगूठे जितनी मोटी पतली नली बनाइए।
  3. खुले किनारे पर गोंद लगाकर दबा दीजिए। एक मिनट सूखने दीजिए, जिससे नली फिर न खुले।
  4. नली को मेज़ पर एक सिरे के बल सीधा खड़ा कीजिए।
  5. अब धीरे से हाथ हटाइए और देखिए।

आप क्या देखेंगे। हाथ हटाते ही नली एक ओर झुकती है और चपटी होकर गिर जाती है। यदि किसी तरह एक क्षण के लिए संतुलन बन भी जाए, तो हवा का एक झोंका या मेज़ का हल्का-सा हिलना उसे गिरा देता है।

यह क्यों गिरती है: नली का निचला सिरा मेज़ को केवल एक बहुत छोटे-से गोले में छूता है। जो वस्तु ऊँची हो और बहुत छोटे स्थान पर टिकी हो, वह आसानी से लुढ़क जाती है। ज़रा-सा झुकते ही उसका भार उस छोटे गोले से बाहर चला जाता है, और वह गिरती चली जाती है। ठीक यही किसी ऊँचे वृक्ष के साथ होता, यदि उसका तना पतला होता और जड़ें फैली हुई न होतीं।
परीक्षण ईमानदारी से कीजिए: नली को किसी खाँचे में मत दबाइए और न किसी पुस्तक के सहारे टिकाइए। उसे समतल सतह पर स्वतंत्र खड़ा कीजिए। परीक्षण का यही अर्थ है।
प्र2.
अब मोटे कागज से 3–4 छोटे त्रिकोण काटिए। त्रिकोणों को उस कागज से लपेटी गई नली के निचले भाग पर समान रूप से चिपकाइए। कागज को फिर से एक सपाट सतह पर रखिए। क्या वह कागज अब सीधा खड़ा रहता है?
उत्तर

हाँ। तीन या चार त्रिकोण नीचे चिपका देने पर नली स्वयं सीधी खड़ी रहती है और गिरती नहीं।

क्या करना है, चरण-दर-चरण।

  1. मोटे कागज या गत्ते से 3 या 4 त्रिकोण काटिए। हर एक लगभग अँगूठे के बराबर हो।
  2. हर त्रिकोण की एक भुजा पर छोटी-सी पट्टी मोड़ लीजिए। यही पट्टी चिपकानी है।
  3. पहला त्रिकोण नली के निचले भाग पर इस तरह चिपकाइए कि वह बाहर की ओर निकला रहे, छोटे पैर की तरह।
  4. बाकी त्रिकोण नली के चारों ओर बराबर दूरी पर चिपकाइए — सब एक ही ओर नहीं। तीन त्रिकोण हों तो हर एक लगभग एक-तिहाई घेरे पर।
  5. गोंद सूखने दीजिए। फिर नली को मेज़ पर खड़ा करके हाथ हटा लीजिए।
  6. अब उस पर धीरे से फूँक मारिए और मेज़ पर हल्की थपकी दीजिए। वह फिर भी खड़ी रहती है।
सादी नली — गिर जाती है आधार वाली नली — खड़ी रहती है बहुत छोटे स्थान पर टिकी है भार चौड़े आधार पर फैल गया
बाईं ओर: सादी कागज की नली लुढ़क जाती है। दाईं ओर: चार त्रिकोण उसे चौड़ा आधार देते हैं और वह खड़ी रहती है — यही युक्ति वृक्ष की फैली हुई जड़ें अपनाती हैं।
आपने क्या कियाक्या खड़ी रही?क्यों
सादी कागज की नलीनहींमेज़ को बहुत छोटे गोले में छूती है, इसलिए ज़रा झुकते ही गिर जाती है
नीचे 3–4 त्रिकोण चिपकाकरहाँत्रिकोण चौड़ा आधार बनाते हैं; अब नली को गिरने के लिए बहुत अधिक झुकना पड़ेगा
सारे त्रिकोण एक ही ओर चिपकाकरनहींसहारा केवल एक ओर है, इसलिए वह दूसरी ओर गिर जाती है
नली के भीतर नीचे एक सिक्का चिपकाकरकुछ बेहतर, पर डगमगाती हैनीचे भार होने से थोड़ी सहायता मिलती है; चौड़े आधार से कहीं अधिक
ऐसा क्यों होता है: कोई भी खड़ी वस्तु तभी तक खड़ी रहती है जब तक उसका भार उस भूमि-भाग के भीतर दबाव डालता है जिसे वह छू रही है। पतली नली बहुत छोटा भाग छूती है, इसलिए तुरंत लुढ़क जाती है। त्रिकोण उस भाग को बड़ा कर देते हैं, इसलिए नली काफी झुककर भी नहीं गिरती। पृष्ठ 95 के चित्र में वर्षावन के वृक्ष की बड़ी फैली हुई जड़ें ठीक यही करती हैं — वे तने के नीचे से चारों ओर फैलकर वृक्ष का भार नरम और उथली मिट्टी के बड़े घेरे पर बाँट देती हैं।
अपने आस-पास यही युक्ति खोजिए: टेबल पंखे का भारी गोल आधार, कैमरे के तिपाई के तीन पैर, बिजली के खंभे के चौड़े पैर, ऊँचे फूलदान का फैला हुआ तल। यह विचार सबसे पहले प्रकृति को आया — प्रकृति की रचनाएँ प्राय: सर्वश्रेष्ठ होती हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?