प्र1.
आपको क्या लगता है कि कुछ पक्षी और पशु केवल इन्हीं द्वीपों पर ही क्यों पाए जाते हैं?
उत्तर
क्योंकि समुद्र उन्हें भीतर ही बंद रखता है। द्वीप चारों ओर से जल से घिरा होता है, इसलिए थल के जंतु और छोटे पक्षी चलकर या उड़कर दूसरी जगह नहीं जा सकते, और बाहर के जंतु सरलता से भीतर नहीं आ सकते।
पूरी कहानी, चरण-दर-चरण।
- बहुत-बहुत पहले कुछ पक्षी या जंतु इन द्वीपों तक पहुँचे — किसी तूफ़ान में उड़कर, या टूटी शाखाओं के बेड़े पर बहकर।
- वे वहीं रह गए। इतने खुले समुद्र को पार करके लौटना संभव नहीं था।
- द्वीप का जीवन कुछ अलग था — अलग भोजन, अलग वृक्ष, अलग मौसम, और प्राय: कोई बड़ा शिकारी नहीं।
- हजारों-हजारों वर्षों में, जो द्वीप के अनुरूप सबसे उपयुक्त थे वही जीवित रहे और उनके बच्चे हुए। धीरे-धीरे पूरा समूह बदल गया।
- अंत में वे मुख्य भूमि के अपने संबंधियों से भिन्न हो गए। अब वे यहीं मिलते हैं, पृथ्वी पर और कहीं नहीं।
| केवल इन्हीं द्वीपों पर | यह क्या है |
|---|---|
| अंडमान धवर (वुड पिजन) | वन में रहने वाला गहरे रंग का कबूतर, पृष्ठ 97 के चित्र में |
| अंडमान धनेश (हॉर्नबिल) | बड़ी भारी हल्के रंग की चोंच वाला काला पक्षी, पृष्ठ 97 पर |
| अनेक द्वीपीय वृक्ष | रानी बताती है कि कई प्रकार के वृक्ष केवल इन्हीं द्वीपों पर उगते हैं |
बिना समुद्र के भी ऐसा होता है: ऊँची पहाड़ियों की दीवार भी किसी स्थान को उतना ही अलग कर सकती है। इसीलिए शेर-पूँछ वाला मकाक केवल पश्चिमी घाट में मिलता है, और कहीं नहीं। जो जीव केवल एक ही स्थान पर मिले, वह उस स्थान का अपना जीव कहलाता है। ऐसे स्थान को ही प्रकृति का जैव विविधता केंद्र कहते हैं — और इसीलिए उस एक वन के नष्ट होने का अर्थ है उन जीवों का सदा के लिए समाप्त हो जाना।
सोचिए: यदि कोई पक्षी सौ स्थानों पर रहता है और एक वन कट जाए, तो उसके पास निन्यानबे बचे रहते हैं। यदि वह केवल एक ही स्थान पर रहता है, तो उस एक वन के कटते ही वह समाप्त। इसीलिए द्वीपों के वनों को अतिरिक्त देखभाल चाहिए।