कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 6 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
इस भारत-भ्रमण यात्रा में देखे गए स्थानों में से आपको सबसे अधिक किस बात ने चकित किया?
उत्तर

ऐसी एक बात चुनिए जिसने आपकी सोच बदल दी, और बताइए कि आप पहले क्या मानते थे। इसी से आश्चर्य, आश्चर्य बनता है।

अध्याय की सबसे चौंकाने वाली बातें ये हैं। इनमें से कोई भी अच्छा उत्तर है।

आश्चर्य की बातयह चौंकाने वाली क्यों है
भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु कन्याकुमारी नहीं हैसब कन्याकुमारी ही पढ़ते हैं। पर ग्रेट निकोबार पर स्थित इंदिरा पॉइंट उससे कहीं अधिक दक्षिण में है
एक सजीव पुलहम सोचते हैं पुल बनता है और फिर धीरे-धीरे कमज़ोर होता है। जड़-सेतु उगाया जाता है और हर वर्ष मज़बूत होता है
जड़ें जो ऊपर की ओर उगती हैंजड़ें तो नीचे जाती हैं। मैंग्रोव की श्वास-जड़ें वायु पाने के लिए कीचड़ से ऊपर निकलती हैं
प्रवाल एक जंतु हैवह रंगीन पत्थर या पौधा लगता है, पर पूरी भित्ति लाखों छोटे जंतुओं ने बनाई है
लवणीय दलदल में रहने वाले बाघसुंदरवन विश्व का एकमात्र मैंग्रोव वन है जहाँ बाघ रहते हैं
सिर के पीछे पहना जाने वाला मुखौटायह अजीब लगता है, जब तक पता न चले कि बाघ पीछे से झपटता है
सेंटिनली लोग 2004 की सुनामी में बच गएबिना रेडियो और बिना चेतावनी प्रणाली के, उन्होंने वायु, समुद्र और जंतुओं को पढ़ लिया
एक ही पहाड़ी शृंखला में 200 से अधिक प्रकार के आमहममें से अधिकतर को चार-पाँच नाम ही आते हैं
साधारण लोगों ने एक बाँध रुकवा दियाग्रामीणों, विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों ने मिलकर साइलेंट वैली बचा ली

नमूना उत्तर: मुझे मेघालय के सजीव जड़-सेतुओं ने सबसे अधिक चकित किया। मैं हमेशा यही सोचती थी कि पुल पत्थर या लोहे से बनाया जाता है, और बनने के दिन से ही धीरे-धीरे कमज़ोर होता जाता है। पर यहाँ लोग पुल बनाते नहीं, उसे उगाते हैं। वे वृक्ष की जड़ों को नदी के आर-पार ले जाते हैं और वर्ष-दर-वर्ष नई जड़ें मरोड़कर जोड़ते जाते हैं। उस पर चलने योग्य होने में पंद्रह-बीस वर्ष लगते हैं, अर्थात् जो व्यक्ति उसे आरंभ करता है वह शायद कभी उस पर चले ही नहीं। वह पुल पोतों-नातियों के लिए बनाया जाता है। और चूँकि वह सजीव है, वह कमज़ोर होने के बदले मज़बूत होता जाता है। यह पुलों के बारे में मेरी सारी सोच के उलट है।

लिखने की युक्ति: उत्तर मैं हमेशा यही सोचता था… से आरंभ कीजिए और फिर पर मैंने जाना कि… लिखिए। इस ढाँचे से एक तथ्य आपका अपना उत्तर बन जाता है।
प्र2.
आप सबसे अधिक किस स्थान पर जाना चाहेंगे और वहाँ क्या करेंगे?
उत्तर

अध्याय में से एक स्थान चुनिए, कारण बताइए, और तीन ऐसे काम गिनाइए जो आप वहाँ सचमुच करेंगे। तीन ठोस कामों की सूची पूरे पन्ने की प्रशंसा से अधिक मूल्यवान है।

स्थानक्यों जाएँवहाँ क्या करें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूहद्वीप, वन और प्रवाल भित्तियाँ एक साथसमुद्री व्याख्या केंद्र देखें; काँच के तल वाली नाव से प्रवाल भित्ति देखें; अंडमान धनेश खोजें; जीवन रक्षक जैकेट ठीक से पहनना सीखें
सुंदरवनविश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वननाव से धाराओं में जाएँ; भाटे के समय श्वास-जड़ें देखें; कीचड़ पर बाघ के पंजों के निशान खोजें; शहद एकत्र करने वाले से बात करें
मेघालयसजीव जड़-सेतु और पृथ्वी का सबसे अधिक वर्षा वाला स्थानजड़-सेतु पर चलें; नोंगरियात का दो मंज़िला पुल देखें; मॉसिनराम में वर्षा में बैठें; गाँव का बाज़ार देखें
असमहरगिला पक्षी, चाय बागान, ब्रह्मपुत्रहरगिला के घोंसलों की रक्षा करने वाली महिलाओं के साथ जुड़ें; मेखला चादर बुनते हुए देखें; बिहू का एक कदम सीखें
पश्चिमी घाट / साइलेंट वैलीवह वर्षावन जिसे लोगों ने बचायाशेर-पूँछ वाला मकाक खोजें; जंगल में उगती इलायची और काली मिर्च सूँघें; सुनें कि घाटी कितनी शांत है; आम की किस्में गिनने में सहायता करें
कन्याकुमारीजहाँ तीन समुद्र मिलते हैंएक ही दिन समुद्र पर सूर्योदय और सूर्यास्त देखें; मानचित्र पर इंदिरा पॉइंट खोजें और देखें कि वह कितना अधिक दक्षिण में है

नमूना उत्तर: मैं सबसे अधिक सुंदरवन जाना चाहूँगी। मैं सुबह-सुबह, भाटे के समय, छोटी नाव से सँकरी धाराओं में जाऊँगी, क्योंकि तभी श्वास-जड़ें कीचड़ से बाहर पेंसिलों के खेत की तरह दिखती हैं। मैं गीले किनारे पर बाघ के पंजों के निशान खोजूँगी — बाघ को नहीं, क्योंकि वह खतरनाक होगा। मैं शहद एकत्र करने वाले से पूछूँगी कि वे जंगली मधुमक्खियों का छत्ता कैसे ढूँढ़ते हैं, और क्या वे सचमुच सिर के पीछे मुखौटा बाँधते हैं। और मैं गिनूँगी कि नाव से एक घंटे में कितने प्रकार के पक्षी दिखे, और उनकी सूची अपनी कॉपी में लिखूँगी।

उत्तर को अपना बनाइए: एक ऐसी बात जोड़िए जो केवल आप करेंगे — कोई प्रश्न जो आप पूछेंगे, कोई चित्र जो आप बनाएँगे, या स्थानीय भाषा का कोई शब्द जो आप सीखेंगे। यही यात्रा को सीख में बदलता है।
प्र3.
आपका क्षेत्र कहानी में बताए गए स्थानों में से किस प्रकार मिलता-जुलता है अथवा भिन्न है?
उत्तर

अध्याय का वह स्थान चुनिए जिससे आपका क्षेत्र सबसे कम मिलता हो, और छह बातों की तुलना कीजिए: भूमि, जल, मौसम, घर, काम और वन्य जीव। समानताओं से अधिक भिन्नताएँ सिखाती हैं।

उत्तर कैसे बनाएँ, चरण-दर-चरण।

  1. अपने गाँव, कस्बे या नगर का नाम और राज्य लिखिए।
  2. अध्याय से एक स्थान चुनिए — द्वीप, सुंदरवन, पूर्वोत्तर या पश्चिमी घाट।
  3. नीचे दी गई तालिका की छहों पंक्तियाँ दोनों के लिए भरिए।
  4. अंत में दो वाक्य लिखिए: एक बड़ी समानता और एक बड़ी भिन्नता।
तुलनामेरा क्षेत्रकहानी का स्थान
भूमि — समतल, पहाड़ी, तटीय, मरुस्थल?______________
जल — नदी, समुद्र, तालाब, कुआँ, नल?______________
मौसम — गरम, ठंडा, गीला, सूखा?______________
घर — किस चीज़ के बने हैं?______________
काम — लोग क्या करते हैं?______________
आस-पास के जंगली पौधे और जंतु______________

नमूना उत्तर — पश्चिमी राजस्थान के किसी गाँव का बच्चा, सुंदरवन से तुलना करते हुए:

तुलनामेरा गाँव (राजस्थान)सुंदरवन
भूमिसमतल, रेतीली, नीचे-नीचे टीलेसमतल कीचड़ भरे द्वीप, बीच में जल-धाराएँ
जलबहुत कम। एक बावड़ी और मानसून में भरने वाला तालाबबहुत अधिक, पर खारा। चारों ओर नावें
मौसमबहुत गरम और बहुत सूखा। वर्षा कुछ ही दिनों मेंगरम, गीला, उमस भरा; भारी वर्षा और चक्रवात
घरमोटी मिट्टी की दीवारें और छोटी खिड़कियाँ, ताकि गरमी भीतर न आएहल्के, ऊँचे उठे घर, ताकि बाढ़ का जल नीचे से निकल जाए
कामबाजरे की खेती, बकरी और ऊँट पालना, हस्तशिल्पमछली पकड़ना, केकड़े पकड़ना, शहद एकत्र करना
वन्य जीवचिंकारा, मोर, मरु लोमड़ी, खेजड़ी के वृक्षरॉयल बंगाल टाइगर, चीतल, मगरमच्छ, मैंग्रोव वृक्ष

समापन के दो वाक्य: सबसे बड़ी भिन्नता जल की है। मेरे गाँव में हर बूँद बचाई जाती है और कुआँ अनमोल है; सुंदरवन में जल हर ओर है पर खारा है, इसलिए पीने का पानी वहाँ भी अनमोल है। सबसे बड़ी समानता यह है कि दोनों जगह लोगों ने अपने घर, अपना काम और अपने पर्व उसी मौसम के अनुसार बनाए हैं जो उन्हें मिला है — और दोनों जगह वे उन पौधों की रक्षा करते हैं जो उनकी भूमि को टिकाए रखते हैं, यहाँ खेजड़ी और वहाँ मैंग्रोव।

इस प्रश्न के भीतर छिपा पाठ: स्थान देखने में बिल्कुल अलग होते हैं, पर लोगों के सामने प्रश्न हर जगह वही होते हैं — पानी कहाँ से लें, घर को ठंडा या सूखा कैसे रखें, यहाँ क्या उगेगा, आस-पास के जंतुओं के साथ कैसे रहें। बदलता उत्तर है, प्रश्न नहीं।
प्र4.
निम्नलिखित जलीय जंतुओं का उनकी विशेषताओं से मिलान कीजिए। (डॉलफिन, समुद्री कछुआ, प्रवाल, समुद्री घोड़ा, क्लाउनफ़िश, तारा मछली, जेलीफ़िश, ऑक्टोपस — आठ विशेषताओं के साथ।)
उत्तर

पृष्ठ 110 के आठ चित्र ऊपर से नीचे देखिए और हर विशेषता ध्यान से पढ़िए। मिलान इस प्रकार है।

क्रमचित्रकिससे मिलान
1छलाँग लगाता नीला-धूसर जंतु, पीठ पर मुड़ा पंख — डॉलफिनबुद्धिमान स्तनधारी जीव जो वायु में श्वास लेते हैं और समूहों में रहते हैं
2कठोर कवच और फ्लिपर वाला हरा-भूरा जंतु — समुद्री कछुआकठोर कवच के साथ वे अंडे देने के लिए उस समुद्र तट पर लौटते हैं जहाँ इनका जन्म हुआ था
3समुद्र-तल पर गुलाबी शाखादार गुच्छा — प्रवालछोटे समुद्री जीव जो रंग-बिरंगी प्रवाल भित्तियों और मछलियों के लिए घर बनाते हैं
4पीला, सीधा खड़ा, मुड़ी पूँछ और घोड़े जैसा सिर — समुद्री घोड़ाऐसी मछली जो सीधी खड़ी होकर तैरती है, उसका चेहरा घोड़े जैसा दिखता है
5सफेद पट्टियों वाली छोटी नारंगी मछली — क्लाउनफ़िशडंक मारने वाले समुद्री एनीमोन के बीच सुरक्षित रूप से रहता है
6पाँच भुजाओं वाला लाल तारा — तारा मछलीइसमें मस्तिष्क नहीं होता। यदि इसकी भुजाएँ कट जाएँ तो ये पुन: विकसित हो सकती हैं
7पारदर्शी घंटी जैसा शरीर और लटकते धागे — जेलीफ़िशइसका शरीर मुलायम और पारदर्शी होता है तथा यह अपने स्पर्शकों से डंक मारता है
8लंबी मुड़ी हुई भुजाओं वाला लाल जंतु — ऑक्टोपसइसकी आठ भुजाएँ हैं और यह छिपने के लिए अपना रंग परिवर्तित कर सकता है

जिस क्रम में विशेषताएँ छपी हैं, उसी क्रम में उत्तर:

मस्तिष्क नहीं, कटी भुजाएँ फिर उग आती हैं → तारा मछली
सीधी खड़ी तैरती है, चेहरा घोड़े जैसा → समुद्री घोड़ा
कठोर कवच, अपने ही जन्म-तट पर अंडे देने लौटते हैं → समुद्री कछुआ
आठ भुजाएँ, छिपने के लिए रंग बदलता है → ऑक्टोपस
डंक मारने वाले एनीमोन के बीच सुरक्षित रहती है → क्लाउनफ़िश
छोटे समुद्री जीव जो भित्तियाँ बनाते हैं → प्रवाल
मुलायम पारदर्शी शरीर, स्पर्शकों से डंक → जेलीफ़िश
बुद्धिमान स्तनधारी, वायु में श्वास, समूह में रहते हैं → डॉलफिन

हर एक के बारे में थोड़ा और:

  • तारा मछली — यह मछली नहीं है। इसमें न मस्तिष्क होता है, न रक्त, और यह सैकड़ों सूक्ष्म नलिका-पैरों पर चलती है। केकड़ा उसकी कोई भुजा काट ले तो नई उग आती है।
  • समुद्री घोड़ा — असली मछली है, पर सीधा खड़ा होकर धीरे-धीरे तैरता है। यह पूँछ को काई पर लपेटकर टिक जाता है। अंडे माँ नहीं, पिता अपनी थैली में रखता है।
  • समुद्री कछुआ — हजारों किलोमीटर तैरकर उसी तट पर लौटता है जहाँ वह अंडे से निकला था, रात में रेत में गड्ढा खोदकर अंडे देता है। ओडिशा के तट पर ऑलिव रिडले कछुए हजारों की संख्या में आते हैं।
  • ऑक्टोपस — चूषकों से ढकी आठ भुजाएँ, और शरीर में एक भी हड्डी नहीं, इसलिए यह बहुत छोटे छेद से भी निकल जाता है। यह क्षण भर में रंग बदलकर चट्टान जैसा हो जाता है।
  • क्लाउनफ़िश — एनीमोन की भुजाएँ दूसरी मछलियों को डंक मारती हैं, पर क्लाउनफ़िश की त्वचा की परत उसे बचाती है। उसे पहरेदार घर मिलता है; एनीमोन को सफाई और सुरक्षा।
  • प्रवाल — हर प्रवाल एक छोटा जंतु है जो अपने चारों ओर कठोर पथरीला प्याला बनाता है। लाखों मिलकर भित्ति बनाते हैं।
  • जेलीफ़िश — अधिकतर जल ही है; न मस्तिष्क, न हृदय, न हड्डी। इसे कभी मत छुइए, रेत पर पड़ी मरी हुई को भी नहीं।
  • डॉलफिन — यह मछली नहीं, स्तनधारी है। इसे साँस लेने के लिए ऊपर आना पड़ता है, यह बच्चों को दूध पिलाती है, समूह में रहती है और क्लिक की ध्वनि तथा उसकी प्रतिध्वनि से रास्ता खोजती है। भारत की गंगा नदी डॉलफिन हमारा राष्ट्रीय जलीय जीव है।
मिलान का प्रश्न अच्छे से कैसे करें: पहले वे मिलाइए जिनके बारे में आप निश्चित हैं और उन्हें दोनों सूचियों में काट दीजिए। सूची छोटी होती जाएगी, और अंतिम दो-तीन अपने आप स्पष्ट हो जाएँगे।
प्र5.
मैंग्रोव क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर

मैंग्रोव ही वे वृक्ष हैं जो लवणीय, दलदली, ज्वार से भरने वाली भूमि में जी सकते हैं — और ऐसा करते हुए वे पूरे तट को थामे रहते हैं।

  1. वे खारे जल में जी सकते हैं। नमक अधिकतर पौधों को मार देता है। मैंग्रोव अधिकांश नमक को जड़ों पर ही रोक लेते हैं, और जो भीतर पहुँच जाता है उसे पत्तियों से बाहर निकाल देते हैं। कभी-कभी मैंग्रोव की पत्ती पर नमक के कण दिख जाते हैं।
  2. उनकी जड़ें वायु लेती हैं। समुद्री कीचड़ में वायु लगभग नहीं होती। इसलिए मैंग्रोव पतली जड़ें कीचड़ से सीधी ऊपर निकालते हैं, पेंसिलों की तरह, और उन पर बने सूक्ष्म छिद्रों से वायु लेते हैं। यही वे छड़ी जैसी वस्तुएँ हैं जो शांति ने देखीं।
  3. वे खंभों पर खड़े रहते हैं। धनुष जैसी स्तंभ-जड़ें तने को जल से ऊपर उठाती हैं और नरम कीचड़ को जकड़ लेती हैं, जिससे ज्वार वृक्ष को गिरा नहीं पाता।
  4. वे भूमि को टिकाए रखते हैं। जड़ों का जाल कीचड़ को फँसा लेता है और लहरों को तट बहा ले जाने से रोकता है।
  5. वे तूफ़ान के विरुद्ध दीवार हैं। मैंग्रोव की मोटी पट्टी चक्रवात या बड़ी लहर का वेग पीछे बसे गाँवों तक पहुँचने से पहले तोड़ देती है।
  6. वे समुद्र का पालना हैं। मछलियाँ, झींगे और केकड़े जड़ों के बीच अंडे देते हैं, जहाँ बच्चे सुरक्षित रहते हैं। तट पर पकड़ी जाने वाली अधिकतर मछलियाँ यहीं से आरंभ होती हैं।
  7. उनके बीज वृक्ष पर ही अंकुरित हो जाते हैं। मैंग्रोव के अनेक बीज माँ-वृक्ष पर लटके-लटके ही उगने लगते हैं, फिर नुकीले सिरे से गिरकर सीधे कीचड़ में गड़ जाते हैं। दिन में दो बार ज्वार से धुलने वाली जगह में साधारण बीज तो बहकर ही चला जाता।
  8. वे लोगों को भोजन और काम देते हैं। शहद, मछली, केकड़े, लकड़ी और रोज़गार — सब मैंग्रोव वन से निकलते हैं।
लवणीय जल नरम कीचड़, वायु लगभग नहीं श्वास-जड़ें श्वास-जड़ें स्तंभ-जड़ें कीचड़ को जकड़ती हैं
मैंग्रोव वृक्ष: मुड़ी हुई स्तंभ-जड़ें तने को लवणीय जल से ऊपर उठाए रखती हैं, और पतली श्वास-जड़ें वायुरहित कीचड़ से ऊपर निकलकर वायु लेती हैं।
भारत इन्हें खो नहीं सकता, क्यों: भारत का तट लंबा और नीचा है, और चक्रवात हर वर्ष आते हैं। जहाँ भी मैंग्रोव की पट्टी घनी है, वहाँ पीछे बसे गाँव तूफ़ान से कहीं बेहतर बचते हैं। यह अपनी रक्षा भी स्वयं करता है: मैंग्रोव का पालना ही वे मछलियाँ बड़ी करता है जिन्हें मछुआरा परिवार पकड़ते हैं। वृक्ष हटा दीजिए तो एक साथ तट, मछली और तूफ़ान की ढाल — तीनों चले जाते हैं।
याद रखने योग्य बात: जहाँ गंगा समुद्र से मिलती है, वहाँ फैला सुंदरवन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है — और विश्व का एकमात्र मैंग्रोव वन जहाँ बाघ रहते हैं।
प्र6.
विभिन्न क्षेत्रों के लोग प्रकृति के साथ किस प्रकार सामंजस्य बैठाकर रहते हैं?
उत्तर

वे जिस स्थान पर रहते हैं वहीं से अपनी आवश्यकता लेते हैं, इस तरह लेते हैं कि वह फिर उग आए, और अपने घर, काम तथा पर्व भूमि से लड़ने के बजाय उसके अनुरूप बनाते हैं। इस अध्याय का हर स्थान यही विचार अलग-अलग रूप में दिखाता है।

स्थानप्रकृति क्या देती हैलोग उसके साथ कैसे रहते हैं
अंडमान और निकोबार द्वीप समूहसमुद्र, प्रवाल भित्तियाँ, वन, मछलीवे मछली पकड़ते हैं और नाव से चलते हैं; जीवन रक्षक जैकेट पहनते और समुद्र के तौर-तरीके सीखते हैं; भित्तियों और उत्तरी सेंटिनल द्वीप से आगंतुकों को दूर रखा जाता है
उत्तरी सेंटिनल द्वीपवन और समुद्र, बाहर से कुछ नहींवे आखेटक-संग्राहक की तरह रहते हैं, केवल आवश्यकता भर लेते हैं, और वायु, समुद्र तथा जंतुओं को इतनी अच्छी तरह पढ़ते हैं कि सुनामी में बच गए
सुंदरवनमैंग्रोव वन, मछली, केकड़े, शहदवे नाव से मछली पकड़ते और शहद एकत्र करते हैं, पूरा वृक्ष नहीं केवल शाखाएँ काटते हैं, बाघ के साथ वन साझा करने के लिए मुखौटा पहनते हैं, और उन्हीं मैंग्रोवों को बचाते हैं जो तूफ़ान रोकते हैं
असमब्रह्मपुत्र, आर्द्रभूमि, लंबे पक्षीमहिलाएँ हरगिला के घोंसलों की रक्षा करती हैं और बच्चों को भी यही सिखाती हैं; पक्षी की संख्या बढ़ी है
मेघालयवर्षा, ढलानदार धाराएँ, रबड़-बरगद वृक्षपुल बनाने के बजाय वे उसे सजीव जड़ों से उगाते हैं, और यह काम अगली पीढ़ी को सौंप देते हैं
पूरा पूर्वोत्तरबाँस, बेंत, पहाड़ी वनखंभों पर बाँस के घर, बेंत की टोकरियाँ, हाथ से बुना कपड़ा, और खेती-वर्ष से जुड़े बिहू जैसे पर्व
अरुणाचल प्रदेश — अपातानीघाटी के खेत और जलवे एक ही खेत में धान और मछली साथ उगाते हैं, बिना किसी मशीन और बिना रासायनिक खाद के
पश्चिमी घाटजड़ी-बूटियाँ, मसाले, शहद, फलवनवासी समुदाय वन काटे बिना पौधे और शहद एकत्र करते हैं; विद्यार्थी और किसान 200 से अधिक प्रकार के आम अभिलेखित करते हैं ताकि कोई किस्म लुप्त न हो
केरल — साइलेंट वैलीएक दुर्लभ वर्षावनग्रामीण, विद्यार्थी और वैज्ञानिक एकजुट हुए और उस बाँध को रुकवाया जो इसे डुबो देता
सिक्किमपहाड़ी खेतपूरा राज्य बिना रसायन के खेती करता है — भारत का पहला जैविक राज्य

बार-बार दिखने वाली पाँच आदतें:

  1. जो वहाँ उगता है, उसी से बनाइए। गीली पहाड़ियों में बाँस, सूखे मैदानों में मिट्टी, तट पर लकड़ी और छप्पर।
  2. उतना ही लीजिए जितना फिर उग आए। शहद लीजिए पर पूरा छत्ता नहीं; शाखाएँ काटिए पर पूरा वृक्ष नहीं।
  3. जंतुओं के लिए जगह छोड़िए। खेत के पास हाथी, गाँव के वृक्ष पर धनेश, और जिस वन में आप काम करते हैं उसी में बाघ।
  4. ऋतुओं के साथ चलिए। पर्व बुआई और फसल पर पड़ते हैं; प्रजनन के मौसम में मछली पकड़ना रुक जाता है।
  5. ज्ञान आगे सौंपिए। जड़-सेतु, बाघ वाला मुखौटा, आम की किस्मों के नाम — यह सब बुज़ुर्गों के जाने से पहले बच्चों को सिखा दिया जाता है।
‘सामंजस्य’ शब्द सही क्यों है: सामंजस्य का अर्थ प्रकृति का उपयोग बिल्कुल न करना नहीं है। लोगों को खाना, घर बनाना और कमाना ही है। इसका अर्थ है ऐसे उपयोग करना कि वह स्थान अगले वर्ष फिर दे सके — और यह समझना कि यदि वन, भित्ति या नदी समाप्त हो गई तो उन पर टिका जीवन भी समाप्त हो जाएगा। अध्याय की अंतिम पंक्ति इसे सीधा कह देती है: हम सभी को धरती जिसे हम अपना घर कहते हैं, उसके विषय में सीखकर, उसका सम्मान और उसकी रक्षा करके अपनी भूमिका निभानी होगी।
प्र7.
जीवंत भारत को दर्शाते हुए चित्रों को चिपकाकर एक कोलाज बनाइए।
उत्तर

कोलाज वह चित्र है जो अनेक छोटे चित्रों को एक ही शीट पर चिपकाकर बनाया जाता है। युक्ति यह है कि उन्हें ऐसे सजाया जाए कि वे मिलकर एक कहानी कहें, न कि जहाँ-तहाँ बिखरे रहें।

चरण 1 — चित्र एकत्र कीजिए। पुराने समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ, कैलेंडर, यात्रा-पर्चे, मिठाई के डिब्बों के रैपर, पुराने पोस्टकार्ड और टिकट, बीज के पैकेट। जो न मिले उसे बना भी सकते हैं। कुछ भी नया खरीदने की आवश्यकता नहीं।

चरण 2 — छह समूहों में बाँटिए। ये शीर्षक लीजिए, और भारत के हर कोने से चित्र लेने का प्रयास कीजिए।

समूहक्या ढूँढ़ें
भूमि और जलबर्फीले पहाड़, रेत के टीले, नदी, समुद्र, मैंग्रोव की धारा, पहाड़ी वन, द्वीप
पशु और पक्षीबाघ, हाथी, मोर, धनेश, एक सींग वाला गैंडा, डॉलफिन, प्रवाल, शेर-पूँछ वाला मकाक
लोग और वस्त्रराजस्थान की साफ़ा, असम की मेखला चादर, हिमाचली टोपी, केरल की कसावु साड़ी
पर्व और नृत्यबिहू, ओणम, पोंगल, दीवाली, ईद, क्रिसमस, गाँव का मेला
काम और शिल्पकरघा, बेंत की टोकरियाँ, मछली पकड़ने की नाव, किसान, कुम्हार, राॅकेट का प्रक्षेपण
भोजनचावल, मछली की करी, दाल-बाटी, केले के पत्ते पर सद्या, आम, मसाले

चरण 3 — चिपकाने से पहले सजाइए।

  1. पूरा चार्ट पेपर लीजिए। ऊपर पेंसिल से हल्का शीर्षक लिखिए: जीवंत भारत
  2. पहले सारे चित्र कागज पर इधर-उधर रखकर देखिए। अभी गोंद मत लगाइए।
  3. बीच में एक बड़ा चित्र रखिए — यही कोलाज का हृदय है। भारत का रेखा-मानचित्र यहाँ बहुत अच्छा लगता है।
  4. बाकी चित्र उसके चारों ओर लगभग वहीं रखिए जहाँ वे मानचित्र पर पड़ते हैं: पूर्वोत्तर के चित्र ऊपर दाईं ओर, द्वीपों के नीचे दाईं ओर, पश्चिमी घाट के बाईं ओर।
  5. किनारों को थोड़ा-थोड़ा एक-दूसरे पर चढ़ाइए, जिससे बीच में भद्दी सफेद जगह न बचे।
  6. अब बीच से बाहर की ओर बढ़ते हुए चिपकाइए। गोंद की पतली और बराबर परत लगाइए।
  7. हर चित्र के पास छोटा-सा नाम लिखिए — स्थान और उसके बारे में एक शब्द।
  8. किनारे पर रंगीन कागज के छोटे त्रिकोणों की झालर बनाइए, या एक ओर केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टी लगाइए।

चरण 4 — इसे एक वाक्य दीजिए। शीर्षक के नीचे अपना एक वाक्य लिखिए। जैसे: अनेक भू-दृश्य, अनेक भाषाएँ, अनेक पर्व — एक ही देश।

नमूना उत्तर — एक बच्चे का कोलाज ऐसा बना: बीच में मैंने भारत का बड़ा रेखा-मानचित्र चिपकाया। उसके चारों ओर ऊपर बर्फीला पहाड़, बाईं ओर मरुस्थल में ऊँट, नीचे मछली पकड़ने की नाव और नारियल के पेड़, और दाईं ओर बाघ के साथ मैंग्रोव की धारा लगाई। मानचित्र के नीचे मैंने छह अलग-अलग राज्यों की पोशाकों में छह लोगों की पंक्ति बनाई। सबसे नीचे भोजन के चित्रों की पट्टी लगाई — चावल और मछली की करी, दाल-बाटी, इडली, केले के पत्ते पर सद्या। एक कोने में मैंने राॅकेट का चित्र चिपकाया, क्योंकि भारत केवल प्राचीन नहीं, नया भी है। ऊपर मेरा वाक्य था: हर कोना अलग है, और यह सब मिलकर एक घर है।

इस अध्याय के लिए कोलाज ही सही क्यों है: यह अध्याय एक यात्रा है — द्वीप, मैंग्रोव वन, पहाड़ियाँ, वर्षावन — ऐसे टुकड़े जो एक-दूसरे से बिल्कुल नहीं मिलते। कोलाज कागज पर ठीक यही करता है: अनेक अलग-अलग टुकड़े, हर एक अपना रंग बनाए हुए, पर इस तरह सजे कि मिलकर एक पूरा चित्र बन जाए। भारत यही है।
इसे अच्छे से दिखाइए: हर समूह का कोलाज कक्षा की दीवार पर साथ-साथ लगाइए, और हर समूह अपने कोलाज के बारे में दो वाक्य कहे। फिर सबको एक साथ देखिए। वही दीवार यह पूरा अध्याय है।
क्या यह उपयोगी रहा?