प्र1.
पश्चिमी घाट के तीन संरक्षित क्षेत्रों की सूची बनाइए।
उत्तर
साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान, पेरियार बाघ अभयारण्य और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान। पश्चिमी घाट में कुल मिलाकर 50 से अधिक संरक्षित क्षेत्र हैं।
| संरक्षित क्षेत्र | राज्य | किसलिए जाना जाता है |
|---|---|---|
| साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान | केरल | वह वर्षावन जो ‘साइलेंट वैली बचाओ आंदोलन’ ने बाँध से बचाया; शेर-पूँछ वाले मकाक |
| पेरियार बाघ अभयारण्य | केरल | बड़ी झील के चारों ओर बाघ और हाथी |
| बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान | कर्नाटक | बाघ, और भारत की सबसे बड़ी हाथी आबादियों में से एक |
| नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान | कर्नाटक | बाघ अभयारण्य, बांदीपुर के साथ लगा हुआ |
| इराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान | केरल | नीलगिरि तहर; बारह वर्ष में एक बार खिलने वाला नीलकुरिंजी फूल |
| मुदुमलै बाघ अभयारण्य | तमिलनाडु | नीलगिरि की ढलानों पर हाथी |
| अनामलै बाघ अभयारण्य | तमिलनाडु | ऊँची पहाड़ियाँ, चाय और इलायची का क्षेत्र |
| भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य | महाराष्ट्र | भारतीय विशाल गिलहरी का घर |
| कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान | कर्नाटक | घास वाली चोटियाँ और शोला वन |
| भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य | गोवा | दूधसागर जलप्रपात |
कोई भी तीन, जैसे — साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान, पेरियार बाघ अभयारण्य, बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान
‘संरक्षित क्षेत्र’ का अर्थ: वह वन, नदी या पहाड़ जिसे सरकार पशुओं, पौधों और प्रकृति की रक्षा के लिए सुरक्षित रखती है। वहाँ कोई वृक्ष नहीं काट सकता और न पशुओं को हानि पहुँचा सकता है। पश्चिमी घाट में ऐसे 50 से अधिक क्षेत्र हैं — वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य। ये शेर-पूँछ वाले मकाक, बाघ, हाथी और धनेश जैसे दुर्लभ जीवों की रक्षा करते हैं तथा वनों और नदियों को स्वस्थ रखते हैं। याद रखिए, दक्षिण भारत की अधिकतर नदियाँ इन्हीं पहाड़ियों से निकलती हैं — इसलिए वन बचाना सबका पीने का पानी बचाना भी है।
साइलेंट वैली की कहानी, संक्षेप में: इस वर्षावन की एक नदी पर बाँध बनाने की योजना थी। इससे पूरी घाटी डूब जाती। ग्रामीण, विद्यार्थी, शिक्षक, कवि और वैज्ञानिक मिलकर साइलेंट वैली बचाओ आंदोलन में जुड़े — और बाँध रुक गया। 1984 में इस घाटी को राष्ट्रीय उद्यान बना दिया गया। वह आज भी खड़ी है। इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि अन्य वर्षावनों के विपरीत यहाँ झींगुर (सिकाडा) की ध्वनि से जंगल गुंजायमान नहीं रहता।