कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 6 गतिविधि 4 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
अपने राज्य में उगने वाले किसी फल या सब्जी का चयन कीजिए। इसकी विभिन्न प्रकार की किस्में हो सकती हैं। अपने शिक्षकों या बड़ों की सहायता से स्थानीय स्तर पर ज्ञात फलों एवं सब्जियों के अनेक प्रकार एवं किस्मों की सूची बनाइए।
उत्तर

अपना छोटा-सा सर्वेक्षण कीजिए, ठीक वैसा ही जैसा पश्चिमी घाट में हुआ था और जिसमें 200 से अधिक प्रकार के आम मिले। आपको आश्चर्य होगा कि आपकी दादी को कितने नाम याद हैं।

चरण 1 — एक फल या सब्जी चुनिए जिसे आस-पास सब उगाते या खरीदते हों। आम, केला, चावल, बैंगन, मिर्च या लौकी — ये सब अच्छे हैं, क्योंकि हर एक की बहुत किस्में हैं।

चरण 2 — पाँच लोगों से पूछिए। अपनी दादी, खेती करने वाले पड़ोसी, बाज़ार के सब्जी वाले, विद्यालय की रसोइया और अपने शिक्षक से।

चरण 3 — हर किस्म के बारे में ये पाँच प्रश्न पूछिए:

  1. यहाँ इसे हमारी अपनी भाषा में क्या कहते हैं?
  2. यह दिखने में कैसी है — आकार, रंग, बनावट?
  3. यह कब तैयार होती है — किस महीने में?
  4. इसका उपयोग किसमें होता है — ताज़ा खाने, अचार, सुखाने या पकाने में?
  5. क्या यह अब भी उगाई जाती है, या दुर्लभ हो गई है?

चरण 4 — यह तालिका भरिए।

स्थानीय नामदिखने में कैसीमौसमकिस काम मेंअब भी उगती है?
___________________________________

नमूना उत्तर — उत्तर प्रदेश के किसी गाँव में, आम:

स्थानीय नामदिखने में कैसामौसमकिस काम मेंअब भी उगता है?
दशहरीलंबा, पतला, सुनहरा पीला, बहुत मीठाजून–जुलाईताज़ा खाने मेंहाँ, खूब
लंगड़ागोलाई लिए, पकने पर भी हरापन रहता हैजुलाईताज़ा खाने और रस मेंहाँ
चौसाबड़ा, सुनहरा, बहुत रसीलाजुलाई–अगस्तचूसकर खाने में; आमरसहाँ
सफेदा (बंगनपल्ली)बड़ा, अंडाकार, हल्का पीलामई–जूनताज़ा खाने मेंहाँ
रामकेलाछोटा, खट्टा, कड़ा गूदामईकेवल अचार मेंदुर्लभ होता जा रहा है
देसी आम (बीज से उगा वृक्ष)छोटा, रेशेदार, बहुत मीठा; हर वृक्ष का स्वाद अलगजूनआम पन्ना, चूसने और चटनी मेंकेवल कुछ पुराने वृक्ष बचे हैं

नमूना उत्तर — यदि कक्षा कोई सब्जी चुने, जैसे बैंगन: लंबा पतला हरा, छोटा गोल बैंगनी, भरता बनाने वाला बड़ा मोटा बैंगनी, सफेद-बैंगनी धारीदार, और सांबर में डलने वाला बहुत छोटा गुच्छेदार बैंगन। एक ही सब्जी की पाँच किस्में।

यदि आप चुनें…संभावित किस्में
केलारोबस्टा, रस्थाली, पूवन, नेंद्रन, इलायची (छोटा), लाल केला, पकाने वाला कच्चा केला
चावलबासमती, सोना मसूरी, पोन्नी, गोबिंदभोग, मणिपुर का काला चावल, केरल का लाल चावल
मिर्चगुंटूर, कश्मीरी, ब्याडगी, पूर्वोत्तर की भूत जोलोकिया
लौकी वर्गलौकी, तोरई, चिचिंडा, करेला, पेठा, परवल
किस्में गिनना खेल नहीं, असली काम क्यों है: हर किस्म किसी अलग कठिनाई का अलग उत्तर है। कोई जल्दी पकती है, कोई देर तक टिकती है, कोई सूखा सह लेती है, कोई अचार में सबसे अच्छी लगती है। आजकल बाज़ार के लिए गिनी-चुनी किस्में ही उगाई जाती हैं और बाकी चुपचाप लुप्त हो जाती हैं — प्राय: उसी दिन से, जिस दिन उन्हें जानने वाला अंतिम बुज़ुर्ग उन्हें बोना बंद कर देता है। जब आप किसी दुर्लभ स्थानीय किस्म का नाम लिखते हैं, तो हो सकता है आप ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति हों। पश्चिमी घाट के शोधकर्ता आम, कटहल और जामुन के साथ ठीक यही कर रहे हैं।
इसे सहेजिए: हर समूह की तालिका को एक कक्षा-चार्ट में जोड़ दीजिए, शीर्षक हो हमारे क्षेत्र के फल और सब्जियाँ। हर नाम के साथ बताने वाले का नाम भी लिखिए। अगले वर्ष की कक्षा इसमें और जोड़ सकेगी।
क्या यह उपयोगी रहा?