प्र1.
पश्चिमी घाट से निकलने वाली तीन नदियों के नाम बताइए।
उत्तर
गोदावरी, कृष्णा और कावेरी। तीनों पश्चिमी घाट से निकलती हैं और पूर्व की ओर पूरे देश को पार करके बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
| नदी | कहाँ से निकलती है | कहाँ जाती है |
|---|---|---|
| गोदावरी | त्र्यंबकेश्वर, नासिक के पास, महाराष्ट्र | दक्कन को पार करके पूर्व में बंगाल की खाड़ी में। प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी |
| कृष्णा | महाबलेश्वर, महाराष्ट्र | कर्नाटक और आंध्र प्रदेश होते हुए पूर्व में बंगाल की खाड़ी में |
| कावेरी | तलकावेरी, ब्रह्मगिरि पहाड़ियाँ, कोडगु, कर्नाटक | कर्नाटक और तमिलनाडु होते हुए पूर्व में बंगाल की खाड़ी में |
| तुंगभद्रा | कर्नाटक में घाट से | कृष्णा में मिल जाती है |
| पेरियार | केरल में घाट से | थोड़ी दूर पश्चिम बहकर अरब सागर में |
| शरावती | कर्नाटक में घाट से | पश्चिम में अरब सागर में; यही जोग जलप्रपात बनाती है |
कोई भी तीन, जैसे — गोदावरी, कृष्णा, कावेरी
एक ही पहाड़ी शृंखला से इतनी नदियाँ क्यों निकलती हैं: घाट मानसून की वर्षा सबसे पहले और सबसे अधिक पकड़ता है। उस जल को कहीं तो बहना ही है। चूँकि यह कगार पश्चिमी तट के बहुत पास है और भूमि पूर्व की ओर धीरे-धीरे ढलती है, इसलिए बड़ी नदियाँ पूर्व की ओर, पूरे भारत को पार करके बहती हैं, और पश्चिम की ओर केवल छोटी और तेज़ नदियाँ जाती हैं। इसीलिए कर्नाटक की किसी पहाड़ी पर गिरी वर्षा की बूँद सैकड़ों किलोमीटर दूर, देश के दूसरे छोर पर, आंध्र प्रदेश के पास समुद्र में पहुँच सकती है।
घाट को ‘जल-मीनार’ क्यों कहते हैं: मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई का पीने का पानी और पाँच राज्यों के खेतों का पानी इन्हीं पहाड़ियों पर गिरी वर्षा से आरंभ होता है। वन कट जाए तो वर्षा तुरंत बहकर मिट्टी भी बहा ले जाती है, और भीतर रिसकर पूरे वर्ष नदियों को पानी नहीं दे पाती।