कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 6 लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
मानचित्र पर पश्चिमी घाट को देखिए और उन छह राज्यों के नाम बताइए जिनसे होकर यह गुजरता है।
भारत का मानचित्र। हरे पहाड़ी चिह्न पश्चिमी तट पर फैले पश्चिमी घाट को दिखाते हैं।
उत्तर
वे छह राज्य हैं — गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु।
मानचित्र पर पश्चिमी घाट कैसे ढूँढ़ें, चरण-दर-चरण।
भारत का भौतिक मानचित्र खोलिए — वही जिसमें मैदान हरे और पहाड़ भूरे दिखते हैं।
पश्चिमी तट रेखा खोजिए, जो अरब सागर के साथ-साथ है।
उस तट से थोड़ा भीतर आपको एक लंबी भूरी कगार दिखेगी जो लगभग समुद्र के समांतर नीचे तक जाती है।
यही कगार पश्चिमी घाट है। यह उत्तर में तापी नदी के पास से आरंभ होकर दक्षिण में कन्याकुमारी के पास समाप्त होती है — कुल लगभग 1,600 किलोमीटर।
अब उँगली को कगार पर ऊपर से नीचे तक फेरिए और हर राज्य का नाम लिखते जाइए।
उत्तर से दक्षिण क्रम
राज्य
वहाँ क्या है
1
गुजरात
उत्तरी सिरा, तापी नदी के पास
2
महाराष्ट्र
सह्याद्रि पहाड़ियाँ; महाबलेश्वर, भीमाशंकर
3
गोवा
छोटा पर बहुत हरा भाग, जहाँ दूधसागर जलप्रपात है
4
कर्नाटक
कोडगु (कुर्ग), आगुंबे, बांदीपुर, कुद्रेमुख
5
केरल
साइलेंट वैली, पेरियार, इराविकुलम; पालक्काड दर्रा
6
तमिलनाडु
नीलगिरि और अनामलै पहाड़ियाँ; मुदुमलै
ये पहाड़ियाँ इतनी महत्वपूर्ण क्यों हैं: पश्चिमी घाट अरब सागर से आती मानसून की हवा के मार्ग में दीवार की तरह खड़ा है। हवा को ढलान पर ऊपर चढ़ना पड़ता है, वह ठंडी होती है और अपनी वर्षा पश्चिमी ओर गिरा देती है। इसीलिए केरल और तटवर्ती कर्नाटक इतने हरे और भीगे हैं, और पहाड़ियों के ठीक पीछे की भूमि कहीं अधिक सूखी है। दक्षिण भारत की अधिकतर नदियों का जन्म भी इन्हीं पहाड़ियों में होता है।
दो शृंखलाएँ, एक नहीं: भारत की दूसरी तटवर्ती शृंखला, बंगाल की खाड़ी की ओर, पूर्वी घाट कहलाती है। वह नीची है और बड़ी नदियों से कटकर टुकड़ों में बँटी है। पश्चिमी घाट ऊँचा और लगभग अटूट है — केवल केरल में एक चौड़ा दर्रा है, पालक्काड दर्रा।
प्र2.
वन में आप कौन-कौन से पशुओं को देख सकते हैं?
उत्तर
पृष्ठ 106 का बड़ा चित्र ध्यान से देखिए और ऊपर से नीचे तक जो सचमुच बना है उसी का नाम लिखिए।
चित्र में कहाँ
क्या दिखता है
यह क्या है
ऊपर बाईं ओर, वृक्ष की शाखा पर
नारंगी-भूरा बंदर, चेहरे के चारों ओर अयाल और लंबी पूँछ
बंदर — पुस्तक इसे शेर-पूँछ वाला मकाक कहती है, जो केवल पश्चिमी घाट में मिलता है
उसी शाखा पर दाईं ओर
भारी पीली चोंच वाला लंबा धूसर-सफेद पक्षी
बड़ा जल-पक्षी — सारस/स्टॉर्क जैसा
बाईं चट्टान पर
दुबका हुआ चित्तीदार सुनहरा जंतु
तेंदुआ
चट्टान के पीछे
ऊँचाई पर खड़ा गहरा भूरा हिरन
साँभर
बीच बाईं ओर
शाखादार सींगों वाला लाल-भूरा हिरन
हिरन (चीतल / काकड़)
बीच में
सूँड और दाँतों वाला धूसर जंतु, धारा के पास
हाथी
ऊपर दाईं ओर, चट्टान पर
पथरीली कगार पर खड़ा बकरी जैसा धूसर जंतु
नीलगिरि तहर, इन पहाड़ियों की जंगली बकरी
बीच में उड़ते हुए
लंबी पूँछ वाला नीला पक्षी; एक लाल-सफेद पक्षी
वन के पक्षी
दाईं ओर पौधों पर
सफेद गले वाला गहरे रंग का पक्षी; छोटा लाल छाती वाला पक्षी; नीचे एक नीला पक्षी
और भी वन-पक्षी
नीचे बाईं ओर
वृक्ष की जड़ पर लिपटा लंबा धारीदार साँप; गीली चट्टान पर हरा मेंढक
साँप और मेंढक
संक्षिप्त उत्तर: बंदर (शेर-पूँछ वाला मकाक), तेंदुआ, हाथी, हिरन, नीलगिरि तहर, साँप, मेंढक और अनेक वन-पक्षी
एक ही चित्र में इतने प्रकार क्यों: पश्चिमी घाट प्रकृति का जैव विविधता केंद्र है। पहाड़ियाँ भारी वर्षा पकड़ती हैं, इसलिए भोजन पूरे वर्ष मिलता है; और शृंखला इतनी लंबी है कि उसमें ठंडी ऊँचाई, गरम नीचाई, भीगी ढलानें और सूखी ढलानें — सब एक साथ हैं। अलग-अलग जंतु उसके अलग-अलग कोनों में बस जाते हैं। इनमें से बहुत-से — शेर-पूँछ वाला मकाक, नीलगिरि तहर, भारतीय विशाल गिलहरी — यहीं मिलते हैं, पृथ्वी पर और कहीं नहीं।
ईमानदार बात: पुस्तक ने चित्र बिना नाम लिखे छापा है, और चित्रकार ने बंदर को नारंगी बनाया है, जबकि असली शेर-पूँछ वाला मकाक काला होता है और उसके चेहरे के चारों ओर धूसर अयाल होती है। पहले वही लिखिए जो आप देख सकते हैं, फिर वह नाम दीजिए जो पुस्तक देती है। सावधान विद्यार्थी ऐसे ही काम करता है।
प्र3.
नीचे दिए गए चित्र में व्यक्ति क्या कर रहे हैं?
पृष्ठ 106 का चित्र, पुनः बनाया गया।
उत्तर
वे वन उपज एकत्र कर रहे हैं — धारा के किनारे छोटे पौधों के बीच झुककर जड़ी-बूटियाँ, मसाले और उपयोगी पौधे बटोर रहे हैं। चित्र में दाईं ओर उनका एकत्र किया हुआ सामान ज़मीन पर फैला है।
चित्र में कहाँ
लोग क्या कर रहे हैं
नीचे बाईं ओर, टोपी पहने दो व्यक्ति
जल के पास पौधों पर झुककर पत्तियाँ तोड़ रहे हैं — जड़ी-बूटियाँ और औषधीय पौधे एकत्र कर रहे हैं
नीचे दाईं ओर
उनका एकत्र किया सामान रखा है: हल्दी और मिर्च के ढेर, दालचीनी की छाल के गट्ठर, पिसे मसाले की बेंत की टोकरियाँ, काली मिर्च, शहद की बरनियाँ, एक तारे जैसा मसाला, इलायची के पौधे
बीच दाईं ओर, पहाड़ी पर
दो और व्यक्ति पहाड़ी रास्ते पर ऊपर चढ़ते हुए
तो उत्तर एक पंक्ति में: लोग वन से पौधे, जड़ी-बूटियाँ, मसाले और शहद एकत्र कर रहे हैं — वही काम जो पश्चिमी घाट के वनवासी समुदाय पीढ़ियों से करते आए हैं।
यह काम यहाँ इतना महत्वपूर्ण क्यों है: पृष्ठ 107 इसे समझाता है। इन पहाड़ियों में पारंपरिक चिकित्सा में काम आने वाले अनेक पौधे हैं, और उनमें से बहुत-से और कहीं उगते ही नहीं। आदिवासी समुदाय और अन्य वनवासी लोग पीढ़ियों से यहाँ रहते आए हैं और भोजन, औषधि तथा अपनी आजीविका — अर्थात् रोज़ी-रोटी कमाने के काम — के लिए वन और उसके पौधों पर निर्भर हैं। वे एकत्र करते हैं, वन साफ़ नहीं करते। पौधे समाप्त हुए तो उनका काम भी समाप्त।
इन्हीं पृष्ठों पर और भी: लेखन-पुस्तिका और कैमरा लिए विद्यार्थियों का एक समूह सर्वेक्षण कर रहा है। विद्यालयों, किसानों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर उन्होंने पश्चिमी घाट में 200 से अधिक प्रकार के आम ढूँढ़े और अभिलेखित किए, और अब वे कटहल तथा जामुन पर काम कर रहे हैं।
प्र4.
विचार कीजिए कि किले समतल भूमि की अपेक्षा पहाड़ियों की चोटियों पर क्यों बनाए जाते थे?
उत्तर
क्योंकि पहाड़ी की चोटी का किला बचाना कहीं सरल और उस पर आक्रमण करना कहीं कठिन होता है। पृष्ठ 106 के चित्र में दूर की पहाड़ी ढलान पर बनी छोटी-सी सीढ़ीदार दीवार देखिए — वही पहाड़ी किला है।
कारण
इससे क्या लाभ मिलता था
दूर तक दिखाई देता है
पहरेदार आती हुई सेना को घंटों पहले देख लेते थे और अगले किले को चेताने के लिए संकेत-अग्नि जला देते थे
शत्रु को चढ़ना पड़ता है
सैनिक भारी हथियार लेकर ऊपर चढ़ते-चढ़ते थके, धीमे और हाँफते हुए पहुँचते थे
ऊपर जाने का एक ही सँकरा रास्ता
बड़ी सेना फैल नहीं सकती थी। थोड़े-से रक्षक सँकरे रास्ते पर बहुतों को रोक लेते थे
गुरुत्व रक्षकों के पक्ष में
तीर, पत्थर और गरम तेल नीचे की ओर सरलता से जाते हैं। हमलावर को सब कुछ ऊपर फेंकना पड़ता है
चट्टान मुफ़्त की दीवार
तीन ओर खड़ी चट्टानें होने से दीवार केवल वहीं बनानी पड़ती थी जहाँ ढाल कम हो
घेरना कठिन
पहाड़ी की रसद रोकना कठिन था, और किलों में चट्टान काटकर बनाए जल-कुंड तथा अनाज-भंडार होते थे
दूर से दिखता है
पहाड़ी पर बना किला इस बात का खड़ा हुआ प्रमाण था कि उस भूमि पर किसका शासन है
पश्चिमी घाट में इतने किले क्यों हैं: ये पहाड़ियाँ तट और पठार के बीच खड़ी हैं, और सारे व्यापार-मार्गों को इनके दर्रों से ही निकलना पड़ता था। जिसका चोटी पर अधिकार, उसी का दर्रे पर अधिकार। छत्रपति शिवाजी महाराज ने ठीक इसी विचार पर अपना राज्य खड़ा किया और रायगढ़, प्रतापगढ़ तथा सिंहगढ़ जैसे किलों का उपयोग किया। उनके सैनिक उन ढलानों की हर पगडंडी जानते थे, इसलिए वे वहाँ तेज़ी से चल सकते थे जहाँ बड़ी सेना बिल्कुल नहीं चल सकती थी।
दूसरा पहलू: पहाड़ी का किला सुरक्षित तो था, पर उसमें रहना कठिन था। जल, अनाज, जलावन, यहाँ तक कि पत्थर भी ऊपर ढोना पड़ता था। इसीलिए किलों में वर्षा का जल जमा करने के लिए चट्टान काटकर बनाए गहरे कुंड और भीतर विशाल अनाज-भंडार होते थे।