हाँ — और जो रचना काम करती है, वही असली जड़-पुल की नकल है: बहुत-से सूत, चौड़ाई में फैले हुए, आपस में और दोनों सिरों से बँधे हुए। केवल एक डोरी झूल जाएगी और खिलौना फिसल जाएगा।
क्या चाहिए। दो कुर्सियाँ, डोरी का गोला या कई लंबे फीते, कुछ सीधी डंडियाँ या स्केल, चिपकाने वाली टेप, और एक छोटा हल्का खिलौना।
चरण 1 — व्यवस्था कीजिए। दोनों कुर्सियाँ पीठ से पीठ, लगभग आधा मीटर की दूरी पर रखिए। सब कुछ दोनों के बीच तना रहना चाहिए; कुछ भी फर्श को न छुए।
चरण 2 — पहले सरल तरीके आज़माइए और उन्हें असफल होते देखिए।
| आप क्या करते हैं | क्या होता है | क्यों |
|---|---|---|
| एक अकेली डोरी, कुर्सी से कुर्सी | वह झूल जाती है, खिलौना बीच तक फिसलकर गिर जाता है | खिलौने को अगल-बगल से कुछ नहीं थामता |
| दो डोरियाँ साथ-साथ | खिलौना फिर भी उनके बीच से फिसल जाता है | डोरियों के बीच कोई तल नहीं है |
| आर-पार रखी एक डंडी | बहुत हल्का खिलौना टिकता है, पर डंडी लुढ़क या पलट जाती है | सिरे बँधे हुए नहीं हैं |
चरण 3 — वह पुल बनाइए जो काम करता है।
- एक कुर्सी से दूसरी कुर्सी तक चार डोरियाँ बाँधिए। उन्हें फैलाकर साथ-साथ रखिए, सीढ़ी की पटरियों की तरह।
- हर डोरी को कसकर खींचकर कुर्सी के पाए से मज़बूती से बाँधिए। ढीली डोरी का अर्थ है झूलता पुल।
- अब चारों डोरियों के आर-पार डंडियाँ एक के बाद एक, पास-पास रखिए। ये सीढ़ी के डंडे हैं।
- हर डंडी को दोनों सिरों पर डोरियों से बाँधिए या टेप कीजिए। इसे मत छोड़िए — बिना बँधी डंडी लुढ़क जाती है।
- दो और डोरियाँ लेकर डंडियों के ऊपर-नीचे से बुनते हुए आर-पार ले जाइए, जिससे पूरा ढाँचा एक हो जाए।
- बाहरी किनारों से दो छोटी डोरियाँ कुर्सी की पीठ तक बाँधिए, रेलिंग की तरह। ये पुल को मुड़ने से रोकती हैं।
- अब बीच में खिलौना रखिए।
आप क्या देखेंगे। अकेली डोरी खिलौना बिल्कुल नहीं सँभाल पाई थी। बुना हुआ पुल उसे सरलता से सँभालता है और मुश्किल से झुकता है। दूसरा खिलौना भी रख दीजिए, फिर भी सँभालता है। अब भार एक सूत पर नहीं, छह-आठ सूतों पर बँट गया है।
| पुल की बनावट | खिलौना टिका? | क्यों |
|---|---|---|
| एक डोरी | नहीं | पूरा भार एक ही सूत पर; वह V आकार में झूल जाती है |
| दो डोरियाँ, बीच में कुछ नहीं | नहीं | खिलौने के टिकने के लिए कोई सतह नहीं |
| चार डोरियाँ + आर-पार डंडियाँ, बिना बाँधे | बस किसी तरह | डंडियाँ खिसकती और अलग हो जाती हैं |
| चार डोरियाँ + बँधी डंडियाँ + बीच में बुनी डोरियाँ | हाँ, मज़बूती से | हर भाग हर दूसरे भाग को थामता है; भार पूरे ढाँचे पर बँट जाता है |