प्र1.
छोटे-छोटे समूहों में अपने आस-पास उपलब्ध टहनियाँ, पत्तियाँ और रूई अथवा कागज जैसी मुलायम वस्तुएँ एकत्रित कीजिए। इन सामग्रियों से एक छोटी-सी चिड़िया का घोंसला बनाइए। एक अच्छा घोंसला कैसे बनता है? अंडों को सुरक्षित रखने के लिए घोंसले में क्या-क्या होना आवश्यक है?
उत्तर
अच्छा घोंसला बाहर से मज़बूत कटोरा और भीतर से मुलायम प्याला होता है। इसी क्रम में बनाइए तो बन जाएगा — उल्टा किया तो बिखर जाएगा।
चरण 1 — एकत्र कीजिए। केवल वही उठाइए जो पहले से गिरा हुआ हो। किसी जीवित पौधे से कुछ मत तोड़िए।
| परत | क्या एकत्र करें | उसका काम |
|---|---|---|
| बाहर | पतली सूखी टहनियाँ, नारियल के पत्ते की सींकें, कड़ी घास के डंठल | ढाँचा बनाती हैं और आकार सँभालती हैं |
| बीच | सूखी पत्तियाँ, मुलायम घास, पतली जड़ें, जूट की डोरी, नारियल की जटा | छिद्र भरती हैं और ढाँचे को बाँधती हैं |
| भीतर | रूई, पंख, फाड़ा हुआ मुलायम कागज, ऊन के टुकड़े | अंडों को गद्दी देती हैं और गरम रखती हैं |
चरण 2 — बनाइए, चरण-दर-चरण।
- तीन-चार लंबी टहनियों को गोल मोड़कर उनके सिरे आपस में लपेट दीजिए। यही किनारा है।
- छोटी टहनियों को इस घेरे में आर-पार बुनिए — एक के ऊपर, अगली के नीचे — जब तक कच्चा तल न बन जाए।
- मुट्ठी से बीच का भाग दबाइए, जिससे वह थाली नहीं, कटोरा बने।
- बाहर से हर छिद्र में सूखी घास और पत्तियाँ ठूँसिए, जब तक तल में से रोशनी न दिखे।
- भीतर रूई, पंख या मुलायम कागज लगाइए और उसे प्याले में चारों ओर चिकनाकर बैठाइए।
- आकार जाँचिए: किनारा बीच से ऊँचा होना चाहिए, ताकि अंडा बाहर की बजाय भीतर लुढ़के।
चरण 3 — जाँचिए। नकली अंडे की तरह एक छोटा कंकड़ या कंचा रखिए और घोंसले को धीरे से एक ओर झुकाइए। अच्छे घोंसले में कंचा लुढ़ककर बीच में लौट आता है। चपटे घोंसले में सीधा बाहर गिर जाता है। फिर घोंसले को किनारे से उठाइए — अच्छा घोंसला बँधा रहता है, झूलता नहीं।
एक अच्छा घोंसला कैसे बनता है?
| अच्छा घोंसला… | क्यों |
|---|---|
| गहरा और कटोरे जैसा | अंडे हवा में बाहर लुढ़कने के बजाय बीच में आ जाते हैं |
| किनारे पर मज़बूत | अंडों पर बैठी माँ-चिड़िया का भार उसे सँभालना है |
| भीतर से मुलायम | अंडे का छिलका पतला होता है। टहनियाँ उसे चटका देतीं |
| तल से बंद और गरम | अंडों को फूटने के लिए लगातार गरमी चाहिए |
| सूखा, या पानी निकल जाने वाला | वर्षा का जल बहकर निकल जाए, भरे नहीं |
| आस-पास के रंग जैसा | टहनी, घास और मिट्टी उसे कौओं, बिल्लियों और साँपों से छिपाती हैं |
| हल्का पर कसकर टिका हुआ | हवा से गिरना नहीं चाहिए; चिड़ियाँ इसे शाखा की दुफाँक में फँसाती हैं या लटकाती हैं |
| बस उतना ही बड़ा जितना चाहिए | छोटा प्याला बड़े प्याले से अधिक सरलता से गरम रहता है |
अंडों को सुरक्षित रखने के लिए घोंसले में क्या-क्या होना आवश्यक है?
- गहरे किनारे, जिससे अंडे बाहर न लुढ़कें।
- मुलायम अस्तर, जिससे छिलके न चटकें।
- ऊँचा और छिपा हुआ स्थान, बिल्ली, कुत्ते, साँप और हाथों की पहुँच से दूर।
- छिपाव — शाखा के आस-पास जैसे ही रंग।
- धूप और वर्षा से आड़, प्राय: ऊपर एक पत्तेदार शाखा।
- शाखा पर मज़बूत पकड़, ताकि हवा उसे गिरा न सके।
- माँ-चिड़िया, जो वास्तव में सबसे आवश्यक भाग है।
बनाकर आप क्या सीखते हैं: बनाकर देखिए, तब पता चलेगा कि यह कितना कठिन है। आपके पास दो हाथ, गोंद और कैंची हैं; चिड़िया के पास केवल चोंच है, और वह हवा में, बिना किसी बने-बनाए नक्शे के काम करती है। दर्ज़ी चिड़िया तो पौधे के रेशे से दो पत्तियों को सचमुच सिल देती है। बया लंबी घास की पत्तियों में गाँठें लगाकर लटकता हुआ घड़ा बनाती है, जिसमें द्वार के लिए एक नली होती है। एक बार घोंसला बनाने में असफल होने के बाद आप चिड़िया के घोंसले को कभी बेतरतीब नहीं कहेंगे।
ज़रूरी नियम: असली घोंसला कभी मत उठाइए, और जिस घोंसले में अंडे या बच्चे हों उसे कभी मत छुइए। उसे दूर से देखिए। यदि माँ-चिड़िया बार-बार लोगों को पास देखेगी तो वह अंडों को हमेशा के लिए छोड़ सकती है।