प्र1.
छोटे-छोटे समूहों में चर्चा कर अपने आस-पास के किसी ऐसे पशु अथवा पक्षी का चयन करें जिसे संरक्षण की आवश्यकता हो। आप उसकी सहायता कैसे कर सकते हैं? उनके संरक्षण के लिए एक योजना बनाइए और उसे अपनी कक्षा के साथ साझा कीजिए।
उत्तर
ऐसा जीव चुनिए जिसे आप सचमुच अपने विद्यालय के पास देख सकते हैं, और योजना के तीन भाग लिखिए — क्या गड़बड़ है, आप क्या करेंगे, और कैसे जानेंगे कि काम बना। असम की महिलाओं ने हरगिला पक्षी के लिए ठीक यही किया, और उसकी संख्या बढ़ गई।
चरण 1 — चुनिए। स्थानीय जीव लीजिए। जिसे आप देख सकते हैं, वह दस प्रसिद्ध जीवों से अधिक मूल्यवान है।
| पशु या पक्षी | उसके साथ क्या गड़बड़ है | बच्चे वास्तव में क्या कर सकते हैं |
|---|---|---|
| गौरैया | नई इमारतों में घोंसले के लिए छेद या छज्जे नहीं; दाने और कीट कम | गत्ते या लकड़ी के घोंसला-बक्से लगाइए; दीवार पर उथला जल-पात्र रखिए; थोड़ा दाना डालिए |
| गली के कुत्ते | भूख, प्यास, चोट, क्रूरता | जल-पात्र रखिए; घायल कुत्ते के बारे में किसी बड़े को बताइए; कभी पत्थर मत मारिए |
| तालाब के मेंढक और मछलियाँ | तालाब में प्लास्टिक और गंदा पानी भर रहा है | महीने में एक बार सफाई; तालाब के पास कूड़ेदान; उसमें कपड़े न धोने का पोस्टर |
| तितलियाँ और मधुमक्खियाँ | फूलदार पौधे नहीं; छिड़काव से कीट मर रहे हैं | विद्यालय में गमलों में गेंदा, तुलसी और करी पत्ता लगाइए; वहाँ छिड़काव न करने का निवेदन कीजिए |
| गिद्ध | घोंसले के पुराने वृक्ष घट रहे हैं; ज़हरीला भोजन | जिन बड़े पुराने वृक्षों पर वे घोंसला बनाते हैं उन्हें बचाइए; मरे पशु में ज़हर न डालने की बात फैलाइए |
| मंदिर के पास के बंदर | तला-भुना खिलाया जाना, तारों में उलझना | विनम्र सूचना-पट्ट कि उन्हें चिप्स के पैकेट न खिलाएँ |
| खेतों के मोर | पंखों के लिए शिकार; ज़हरीला दाना | जाल दिखे तो किसी बड़े को बताइए; गरमी में जल-पात्र रखिए |
चरण 2 — यह योजना भरिए।
| योजना का भाग | नमूना उत्तर — गौरैया |
|---|---|
| कौन-सा जीव और कहाँ | गौरैया, हमारे विद्यालय की दीवार और द्वार के नीम के वृक्ष के आस-पास |
| क्या गड़बड़ है | नई इमारत की दीवारें चिकनी हैं, घोंसले के लिए कोई छेद नहीं; गरमी में पानी नहीं मिलता |
| हम क्या करेंगे | पुराने जूते के डिब्बों और गत्ते से दस घोंसला-बक्से बनाएँगे; उन्हें छत के किनारे लगाएँगे; दो मिट्टी के पात्र भरे रखेंगे; वृक्ष के पास मुट्ठी भर खुदा चावल डालेंगे |
| कौन क्या करेगा | समूह क बक्से बनाएगा; समूह ख प्रतिदिन सुबह पानी भरेगा; समूह ग हर शुक्रवार गिनती करेगा |
| कौन सहायता करेगा | कक्षा-शिक्षक, विद्यालय का माली, और एक अभिभावक जिन्होंने पहले घोंसला-बक्सा लगाया है |
| कैसे जानेंगे कि काम बना | हर शुक्रवार पाँच मिनट गौरैयाँ गिनकर संख्या चार्ट पर लिखेंगे। कोई घोंसला-बक्सा काम में आए तो उसकी तिथि लिखेंगे |
| दूसरों को कैसे बताएँगे | विद्यालय के द्वार पर पोस्टर और प्रार्थना सभा में दो मिनट की बात |
हरगिला की कहानी सही आदर्श क्यों है: हरगिला (गरुड़) को लोग नापसंद करते थे — उसे गंदा कहते थे और उसके घोंसले वाले वृक्ष काट देते थे। असम की महिलाओं ने यह बदल दिया। उन्होंने कोई वन घेरा नहीं। उन्होंने पक्षी को अच्छा नाम दिया, बच्चों को उसके घोंसलों की रक्षा करना सिखाया, और उसे गर्व की बात बना दिया। पूरा गाँव जुड़ा, इसलिए संख्या बढ़ी। संरक्षण तब सबसे अच्छा चलता है जब स्थानीय लोग स्वयं चाहें, बाहर से आदेश मिलने पर नहीं।
छोटा रखिए और चलाते रहिए। पूरी गरमी प्रतिदिन भरा गया एक जल-पात्र उस बड़े पोस्टर से अधिक पक्षियों की सहायता करता है जो एक बार बनाकर भुला दिया जाए। वही चुनिए जिसे आप लगातार कर सकें।