प्र1.
अपने आस-पास देखिए। क्या आपको कोई ऐसा जीव दिखाई देता है जिसके पास कुछ ऐसी विशेषता है जिससे उसे वहाँ रहने में सहायता मिलती है। वह क्या है?
उत्तर
हाँ — लगभग हर जीव में ऐसी कोई विशेषता होती है। उसके शरीर का वह भाग खोजिए जो ठीक उसी स्थान के अनुरूप है जहाँ वह रहता है। एक बार देखना आरंभ कीजिए, फिर ये हर ओर दिखने लगेंगी।
कैसे करें, चरण-दर-चरण।
- एक स्थान चुनिए — अपना आँगन, विद्यालय की दीवार, तालाब का किनारा, खेत या कोई वृक्ष।
- किसी एक जीव को पाँच मिनट चुपचाप देखिए।
- पूछिए: यहाँ रहने में कठिनाई क्या है? बहुत गरमी? बहुत पानी? शत्रु? पानी की कमी?
- अब वह अंग या आदत खोजिए जो उस कठिनाई का उत्तर है।
- इसे दो स्तंभों में लिखिए: कहाँ रहता है और क्या उसे वहाँ रहने में सहायता करता है।
| जीव | कहाँ रहता है | सहायक विशेषता |
|---|---|---|
| मैंग्रोव वृक्ष | वायुरहित लवणीय कीचड़ में | जल के ऊपर निकली श्वास-जड़ें; नमक पत्तियों से बाहर निकाल देता है |
| छिपकली | दीवारों और छतों पर | पंजों के नीचे चिपकने वाले गद्दे, जिससे वह उलटी लटक सकती है |
| नागफनी (कैक्टस) | सूखे, गरम स्थानों में | मोटा तना जो जल संचित रखता है, और पत्तियों की जगह काँटे ताकि जल कम उड़े |
| ऊँट | गरम रेतीले मरुस्थल में | चौड़े चपटे पैर जो रेत में नहीं धँसते, और वसा संचित रखने वाला कूबड़ |
| जलकुंभी | तालाब पर तैरती हुई | फूला हुआ, वायु भरा डंठल जो उसे तैराए रखता है |
| बत्तख | जल में और जल के बाहर | जल धकेलने के लिए झिल्लीदार पैर, और चिकने पंख जो भीगते नहीं |
| केंचुआ | मिट्टी के नीचे | लंबा मुलायम शरीर और सूक्ष्म रोम, जिनसे वह मिट्टी में पकड़कर आगे बढ़ता है |
| बरगद | बहुत बड़ा और भारी वृक्ष | लटकती जड़ें जो भूमि तक पहुँचकर अतिरिक्त खंभे बन जाती हैं |
| टिड्डा | घास और फसलों में | पत्तियों जैसा हरा शरीर, इसलिए सरलता से दिखता नहीं |
| छज्जे पर बैठा कबूतर | नगर की इमारतों पर | वह छज्जों पर घोंसला बनाता है, जैसे उसके पूर्वज चट्टानों की दरारों में बनाते थे |
नमूना उत्तर: मैंने अपने बरामदे की दीवार पर छिपकली को देखा। वह दीवार पर सीधे ऊपर चलती है और छत पर उलटी होकर भी गिरती नहीं। ऐसा इसलिए हो पाता है क्योंकि उसके हर पंजे के नीचे बहुत महीन गद्दों की पंक्तियाँ होती हैं जो सतह से चिपक जाती हैं। दीवार पर ऊँचे रहने से वह बिल्ली से बची रहती है, और वह ट्यूबलाइट के पास बैठती है क्योंकि कीट रोशनी की ओर आते हैं — इस तरह उसका भोजन स्वयं उस तक आ जाता है।
इन सबके पीछे का विचार: कोई जीव अपना शरीर स्वयं नहीं चुनता। बहुत लंबे समय में, जिनका शरीर उस स्थान के अनुरूप होता गया वे अधिक जिए और उनके बच्चे अधिक हुए, और धीरे-धीरे पूरी जाति वैसी ही हो गई। इसलिए जब भी कोई अनोखा अंग दिखे, यह पूछिए कि वह कौन-सी कठिनाई हल करता है। उत्तर लगभग हमेशा मिल जाता है।