प्र1.
1. एक गुब्बारा लीजिए और पूरा फूल जाने तक इसमें हवा भरिए। 2. इसे कसकर पकड़िए। 3. फिर गुब्बारे के मुँह को छोड़ दीजिए और अवलोकन कीजिए कि क्या होता है?
उत्तर
आप क्या देखेंगे: छोड़ते ही गुब्बारा तेज़ी से कमरे में उड़ जाता है। वह टेढ़ी-मेढ़ी, घूमती हुई राह पर उड़ता है, साथ में सीटी जैसी आवाज़ करता है और सारी हवा निकल जाने पर नीचे गिर जाता है।
इसे कैसे करें:
- गुब्बारे में तब तक हवा भरिए जब तक वह अच्छी तरह फूल न जाए। इतना मत भरिए कि फट जाए।
- उसके मुँह को अँगूठे और उँगली से कसकर दबाइए। उसे चेहरे से दूर, ऊपर की ओर पकड़िए।
- अब उँगलियाँ खोल दीजिए — गुब्बारे को फेंकिए मत, बस छोड़ दीजिए।
- देखिए वह किस ओर उड़ता है और उसकी ध्वनि सुनिए।
| मैंने क्या देखा | मेरा अवलोकन |
|---|---|
| हवा | मुँह से तेज़ धार में बाहर निकलती है। हथेली पास रखने पर उसका झोंका अनुभव होता है। |
| गुब्बारा | हवा जिस ओर निकलती है, गुब्बारा ठीक उसकी उलटी दिशा में उड़ता है। |
| उसका मार्ग | सीधा नहीं — टेढ़ा-मेढ़ा, क्योंकि उसका मुँह फड़फड़ाता रहता है। |
| ध्वनि | सीटी जैसी आवाज़, जो संकरे मुँह से निकलती हवा से बनती है। |
| अंत में | हवा समाप्त होते ही गुब्बारा ढीला पड़कर नीचे गिर जाता है। |
ऐसा क्यों होता है: हवा भरते समय आप बहुत सी हवा को थोड़ी-सी जगह में भर देते हैं। तनी हुई रबर उस हवा को दबाकर रखती है। मुँह खोलते ही हवा बाहर की ओर दौड़ पड़ती है। हवा पीछे की ओर जाती है और गुब्बारे को आगे की ओर धकेल देती है। पुस्तक के शब्दों में — जब हवा गुब्बारे से बाहर निकलती है तो यह गुब्बारे को आगे की ओर धकेलती है। इस प्रकार वायु की गति ऊर्जा उत्पन्न करती है।
स्वयं अनुभव कीजिए: गुब्बारा फिर फुलाइए और छोड़ने से पहले उसे गाल के पास रखिए। छोड़ते ही त्वचा पर हवा का झोंका लगेगा। यही चलती हुई हवा धक्का दे रही है।