कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 7 गतिविधि 1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
1. एक गुब्बारा लीजिए और पूरा फूल जाने तक इसमें हवा भरिए। 2. इसे कसकर पकड़िए। 3. फिर गुब्बारे के मुँह को छोड़ दीजिए और अवलोकन कीजिए कि क्या होता है?
उत्तर

आप क्या देखेंगे: छोड़ते ही गुब्बारा तेज़ी से कमरे में उड़ जाता है। वह टेढ़ी-मेढ़ी, घूमती हुई राह पर उड़ता है, साथ में सीटी जैसी आवाज़ करता है और सारी हवा निकल जाने पर नीचे गिर जाता है।

इसे कैसे करें:

  1. गुब्बारे में तब तक हवा भरिए जब तक वह अच्छी तरह फूल न जाए। इतना मत भरिए कि फट जाए।
  2. उसके मुँह को अँगूठे और उँगली से कसकर दबाइए। उसे चेहरे से दूर, ऊपर की ओर पकड़िए।
  3. अब उँगलियाँ खोल दीजिए — गुब्बारे को फेंकिए मत, बस छोड़ दीजिए।
  4. देखिए वह किस ओर उड़ता है और उसकी ध्वनि सुनिए।
मैंने क्या देखामेरा अवलोकन
हवामुँह से तेज़ धार में बाहर निकलती है। हथेली पास रखने पर उसका झोंका अनुभव होता है।
गुब्बाराहवा जिस ओर निकलती है, गुब्बारा ठीक उसकी उलटी दिशा में उड़ता है।
उसका मार्गसीधा नहीं — टेढ़ा-मेढ़ा, क्योंकि उसका मुँह फड़फड़ाता रहता है।
ध्वनिसीटी जैसी आवाज़, जो संकरे मुँह से निकलती हवा से बनती है।
अंत मेंहवा समाप्त होते ही गुब्बारा ढीला पड़कर नीचे गिर जाता है।
ऐसा क्यों होता है: हवा भरते समय आप बहुत सी हवा को थोड़ी-सी जगह में भर देते हैं। तनी हुई रबर उस हवा को दबाकर रखती है। मुँह खोलते ही हवा बाहर की ओर दौड़ पड़ती है। हवा पीछे की ओर जाती है और गुब्बारे को आगे की ओर धकेल देती है। पुस्तक के शब्दों में — जब हवा गुब्बारे से बाहर निकलती है तो यह गुब्बारे को आगे की ओर धकेलती है। इस प्रकार वायु की गति ऊर्जा उत्पन्न करती है।
स्वयं अनुभव कीजिए: गुब्बारा फिर फुलाइए और छोड़ने से पहले उसे गाल के पास रखिए। छोड़ते ही त्वचा पर हवा का झोंका लगेगा। यही चलती हुई हवा धक्का दे रही है।
प्र2.
विस्तारित गतिविधि — हवा भरे गुब्बारे से बना रॉकेट : 1. गुब्बारे में हवा भरिए और इस पर एक स्ट्रॉ को टेप की सहायता से चिपका दीजिए। 2. स्ट्रॉ में से एक धागा आर-पार निकालिए। धागे को तानकर इसके दोनों छोर आमने-सामने की दीवारों में लगी कीलों से बाँध दीजिए। अब गुब्बारे को छोड़ दीजिए और इसे डोरी पर चलता हुआ देखिए।
उत्तर

आप क्या देखेंगे: गुब्बारा स्ट्रॉ को साथ लेकर धागे पर एक छोर से दूसरे छोर तक सर्र से दौड़ जाता है। इस बार वह इधर-उधर नहीं भटकता, क्योंकि धागा उसे सीधा रखता है।

इसे कैसे बनाएँ:

  1. एक स्ट्रॉ को काटकर लगभग आधा कर लीजिए।
  2. 3 से 5 मीटर लंबा धागा स्ट्रॉ में से आर-पार निकालिए।
  3. धागे को तानकर उसके दोनों छोर आमने-सामने की दीवारों में लगी कीलों से बाँध दीजिए, या दो साथी दोनों छोर पकड़ लें।
  4. गुब्बारे में हवा भरिए और उसका मुँह दबाकर रखिए।
  5. दूसरे हाथ से टेप की दो पट्टियों से गुब्बारे को स्ट्रॉ पर चिपका दीजिए। ध्यान रहे, गुब्बारे का मुँह पीछे की ओर हो।
  6. स्ट्रॉ को धागे के एक छोर तक सरका दीजिए। देख लीजिए कि धागा कसकर तना हुआ है।
  7. अब गुब्बारे का मुँह छोड़ दीजिए।
तना हुआ धागा स्ट्रॉ टेप गुब्बारे को स्ट्रॉ से जोड़ता है हवा इधर निकलती है रॉकेट इधर दौड़ता है
हवा एक ओर जाती है, गुब्बारा दूसरी ओर — और धागा उसका मार्ग सीधा रखता है।
ऐसा क्यों होता है: यह वही धक्का है जो गतिविधि 1 में था। हवा पीछे की ओर निकलती है और गुब्बारा आगे की ओर धकेला जाता है। पहली गतिविधि में गुब्बारा कहीं भी जा सकता था। यहाँ स्ट्रॉ धागे में पिरोया है, इसलिए गुब्बारा केवल धागे के साथ ही चल सकता है। इसी कारण वह सीधा एक छोर से दूसरे छोर तक जाता है। सच्चा रॉकेट भी ऐसे ही काम करता है — वह पीछे की ओर गर्म गैस फेंकता है और स्वयं आगे बढ़ता है।
यदि ठीक से न चले: धागे को और कसकर तानिए, हल्का गुब्बारा लीजिए, ध्यान रखिए कि टेप धागे से न चिपके, और गुब्बारे का मुँह धागे के समांतर पीछे की ओर ही रखिए।
क्या यह उपयोगी रहा?