प्र1.
वस्तुएँ किस कारण से गति करती हैं, चमकती हैं, ध्वनि उत्पन्न करती हैं और ठंडी अथवा गर्म होती हैं?
उत्तर
यह सब ऊर्जा के कारण होता है। कोई वस्तु गति करे, चमके, ध्वनि करे, गर्म हो या ठंडी हो — हर बार उसके पीछे ऊर्जा होती है।
पुस्तक इसे एक ही वाक्य में कहती है —
ऊर्जा वह है जिसके कारण वस्तुएँ गति करती हैं, प्रकाशमान होती हैं, ध्वनि उत्पन्न करती हैं, कार्य करती हैं और ताप परिवर्तित करती हैं।
अब कुछ रोज़ की वस्तुओं को उनकी ऊर्जा से मिलाइए।
| जो हम देखते हैं | क्या हो रहा है | ऊर्जा कहाँ से आ रही है |
|---|---|---|
| दौड़ता हुआ बालक | गति | उसका खाया हुआ भोजन |
| सड़क पर चलता स्कूटर | गति | पेट्रोल |
| दोपहर का सूर्य | प्रकाश और ऊष्मा | स्वयं सूर्य |
| जलता हुआ बल्ब | प्रकाश | विद्युत |
| बजती हुई ढोलक | ध्वनि | बजाने वाले का हाथ, अर्थात् भोजन |
| चूल्हे पर उबलता जल | गर्म होना | जलती हुई रसोई गैस |
| दूध ठंडा रखता रेफ्रिजरेटर | ठंडा होना | विद्युत |
एक वाक्य में मूल बात: कुछ भी अपने आप नहीं होता। यदि किसी वस्तु में परिवर्तन हो रहा है — वह चलने लगे, चमके, बजे, गर्म हो या ठंडी हो — तो वह परिवर्तन लाने में ऊर्जा खर्च हुई है।
चर्चा के लिए: आपस में पूछिए, “यदि किसी वस्तु में कोई ऊर्जा ही न हो तो संसार कैसा होगा?” कुछ भी नहीं चलेगा। कोई ध्वनि नहीं। कोई प्रकाश नहीं — क्योंकि सूर्य का प्रकाश भी तो ऊर्जा ही है। इसीलिए पुस्तक कहती है कि ऊर्जा ही हमारी दुनिया को क्रियाशील और जीवंत बनाती है।