आप क्या देखेंगे: आरंभ में दोनों बातियाँ जल उठती हैं। बिना तेल वाला दीपक 1 केवल कुछ ही क्षण जलता है — सूखी रूई स्वयं जलकर काली पड़ जाती है और लौ बुझ जाती है। तेल वाला दीपक 2 स्थिर पीली लौ के साथ देर तक जलता रहता है और उसकी बाती समाप्त नहीं होती।
इसे कैसे करें (किसी बड़े व्यक्ति की देख-रेख में):
- दो मिट्टी के दीपक थाली या पत्थर के फ़र्श पर, कागज़ और कपड़े से दूर, अगल-बगल रखिए।
- साफ़ रूई से एक जैसी दो बातियाँ बटिए और एक-एक हर दीपक में रखिए।
- दीपक 1 को सूखा ही रहने दीजिए। दीपक 2 में एक चम्मच तेल डालिए ताकि बाती उसमें भीग जाए। एक मिनट रुकिए, जिससे तेल बाती में ऊपर चढ़ जाए।
- बड़े व्यक्ति दोनों बातियों को एक ही समय पर प्रज्वलित करें।
- दोनों लौ को देखते रहिए। धीरे-धीरे गिनिए या घड़ी देखिए।
| मैंने क्या देखा | दीपक 1 (बिना तेल) | दीपक 2 (तेल सहित) |
|---|---|---|
| क्या जलता है? | हाँ | हाँ |
| लौ का आकार | छोटी और कमज़ोर | ऊँची और स्थिर |
| कितनी देर जलता है | केवल कुछ क्षण | कई मिनट, जब तक तेल है |
| बाद में बाती | जलकर काली और भुरभुरी | बची रहती है, केवल सिरा काला पड़ता है |