कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 7 गतिविधि 4 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
आइए समझें कि ईंधन किस प्रकार कार्य करते हैं — 1. किसी समतल सतह पर दो दीपक रखिए। 2. एक दीपक में बिना तेल के रूई की बाती रखिए और दूसरे दीपक में रूई की बाती रखकर उसमें तेल डालिए। 3. किसी बड़े व्यक्ति की देख-रेख में दोनों दीपकों की बातियों को प्रज्वलित कीजिए। 4. अवलोकन कीजिए कि दोनों दीपकों का क्या होता है।
उत्तर

आप क्या देखेंगे: आरंभ में दोनों बातियाँ जल उठती हैं। बिना तेल वाला दीपक 1 केवल कुछ ही क्षण जलता है — सूखी रूई स्वयं जलकर काली पड़ जाती है और लौ बुझ जाती है। तेल वाला दीपक 2 स्थिर पीली लौ के साथ देर तक जलता रहता है और उसकी बाती समाप्त नहीं होती।

इसे कैसे करें (किसी बड़े व्यक्ति की देख-रेख में):

  1. दो मिट्टी के दीपक थाली या पत्थर के फ़र्श पर, कागज़ और कपड़े से दूर, अगल-बगल रखिए।
  2. साफ़ रूई से एक जैसी दो बातियाँ बटिए और एक-एक हर दीपक में रखिए।
  3. दीपक 1 को सूखा ही रहने दीजिए। दीपक 2 में एक चम्मच तेल डालिए ताकि बाती उसमें भीग जाए। एक मिनट रुकिए, जिससे तेल बाती में ऊपर चढ़ जाए।
  4. बड़े व्यक्ति दोनों बातियों को एक ही समय पर प्रज्वलित करें।
  5. दोनों लौ को देखते रहिए। धीरे-धीरे गिनिए या घड़ी देखिए।
दीपक 1 — बिना तेल लौ क्षण भर में बुझी छोटी, क्षणिक लौ दीपक 2 — तेल सहित देर तक स्थिर जलता रहा ऊँची, स्थिर लौ तेल
बाती एक जैसी, आरंभ की लौ भी एक जैसी — अंतर केवल इतना कि एक को ईंधन मिलता रहा।
मैंने क्या देखादीपक 1 (बिना तेल)दीपक 2 (तेल सहित)
क्या जलता है?हाँहाँ
लौ का आकारछोटी और कमज़ोरऊँची और स्थिर
कितनी देर जलता हैकेवल कुछ क्षणकई मिनट, जब तक तेल है
बाद में बातीजलकर काली और भुरभुरीबची रहती है, केवल सिरा काला पड़ता है
सुरक्षा पहले: यह गतिविधि केवल किसी बड़े व्यक्ति के साथ ही कीजिए। लंबे बाल बाँध लीजिए, ढीली आस्तीन ऊपर कर लीजिए, पास में एक मग जल रखिए और दीपक पत्थर या धातु की थाली पर ही रखिए — कागज़ या कपड़े पर कभी नहीं।
प्र2.
(क) कौन-सा दीपक अधिक देर तक जलता रहा? ऐसा क्यों हुआ?
उत्तर

दीपक 2 — तेल वाला दीपक — बहुत अधिक देर तक जलता रहा। वह इसलिए देर तक जला क्योंकि उसके पास लौ को बनाए रखने के लिए ईंधन था। दीपक 1 में कोई ईंधन नहीं था, इसलिए सूखी रूई के जलते ही उसकी लौ बुझ गई।

दीपक 2 के भीतर क्या हो रहा है, चरण दर चरण —

  1. बाती का निचला सिरा तेल में डूबा रहता है।
  2. रूई की बाती अपने रेशों से तेल को धीरे-धीरे ऊपर खींचती है, जैसे कपड़ा जल सोख लेता है।
  3. ऊपर पहुँचकर लौ की ऊष्मा उस तेल को वाष्प में बदल देती है।
  4. यही वाष्प जलती है और वही लौ के रूप में हमें दिखाई देती है।
  5. जितना तेल जलता है, उतना ही और तेल बाती से ऊपर चढ़ आता है।
  6. इस प्रकार लौ को बार-बार ईंधन मिलता रहता है — और दीपक खाली होने तक वह जलती रहती है।
दीपक 1: सूखी बाती → बाती स्वयं जली → क्षण भर में लौ बुझी
दीपक 2: तेल बाती से ऊपर चढ़ा → तेल जला → और तेल आया → लौ जलती रही
याद रखने योग्य बात: लौ अपने आप जीवित नहीं रहती। उसे लगातार कुछ चाहिए। जो भी वस्तु हम उसे देते हैं — तेल, गैस, लकड़ी, कोयला, पेट्रोल — उसे ईंधन कहते हैं। ईंधन नहीं, तो लौ नहीं।
प्र3.
(ख) यहाँ ईंधन की तरह व्यवहार करने वाला पदार्थ क्या है?
उत्तर

यहाँ ईंधन तेल है। पुस्तक अगले पृष्ठ पर यही कहती है — “यहाँ ईंधन तेल है।”

बाती को देखकर भ्रम मत होने दीजिए। बाती तो केवल वह नली है जो तेल को लौ तक पहुँचाती है। वह स्वयं ईंधन नहीं है — इसीलिए देर तक जलने के बाद भी बाती बची रहती है, जबकि तेल समाप्त हो जाता है।

भागउसका काम
मिट्टी का दीपकतेल को सुरक्षित रूप से रखता है
रूई की बातीतेल को बूँद-बूँद लौ तक पहुँचाती है
तेलयही ईंधन है — यही जलकर प्रकाश और ऊष्मा देता है
वायुजलने के लिए वायु चाहिए; लौ को ढक दीजिए तो वह बुझ जाती है
ईंधन और कहाँ मिलता है: अध्याय बताता है कि हम दैनिक जीवन में भोजन पकाने, दीपक जलाने और वाहन चलाने जैसे अनेक कामों के लिए भिन्न-भिन्न ईंधनों का उपयोग करते हैं। चूल्हे की रसोई गैस, चूल्हे की लकड़ी, स्कूटर का पेट्रोल, ट्रैक्टर का डीजल और दीपक का तेल — ये सब ईंधन हैं। हर एक में ऊर्जा भरी है, जो जलने पर बाहर आती है।
करके देखिए: दीपक 2 को जलाकर उस पर एक काँच का गिलास उलटा ढक दीजिए। तेल पर्याप्त होने पर भी लौ मंद होकर बुझ जाती है। केवल ईंधन काफ़ी नहीं — जलने के लिए वायु भी चाहिए।
क्या यह उपयोगी रहा?