कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 7 गतिविधि 6 के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
फिरकी — 1. कागज का एक चौकोर टुकड़ा लीजिए। 2. मापक की सहायता से इसकी दो विकर्ण रेखाएँ खींचें। 3. अब आपके पास चार समान भाग हैं। 4. चारों रेखाओं के ऊपर से आधी दूरी तक काटिए। 5. प्रत्येक कोने को मोड़िए और चित्र में दर्शाए अनुसार एक पिन से इसे एक छड़ी से जोड़िए। 6. अब इस फिरकी को चलती हवा के सामने लाइए। यदि हवा नहीं चल रही है तो इसे ऊँचा उठाकर साथ लेकर दौड़िए।फिरकी बनाने के चरण 1 से 5, जैसे पृष्ठ 123 पर दर्शाए गए हैं।
उत्तर
इसे चरण दर चरण कैसे बनाएँ:
कड़े कागज़ का लगभग 15 सेंटीमीटर भुजा वाला एक चौकोर टुकड़ा काटिए। पतला गत्ता या पुराना ग्रीटिंग कार्ड सबसे अच्छा रहेगा।
मापक से एक कोने से सामने वाले कोने तक रेखा खींचिए। दूसरे जोड़े कोनों के लिए भी वैसा ही कीजिए। ये दोनों विकर्ण हैं — वे रेखाएँ जो आमने-सामने के कोनों को जोड़ती हैं। ये बीच में एक-दूसरे को काटती हैं।
अब चौकोर कागज़ चार बराबर त्रिभुजों में बँट गया है।
हर विकर्ण पर कोने से केंद्र की ओर काटिए — किंतु आधी दूरी पर रुक जाइए। केंद्र तक मत काटिए, नहीं तो कागज़ चार टुकड़ों में बँट जाएगा।
अब चार खुले कोने बन गए हैं। हर कटान से एक-एक कोना उठाकर केंद्र पर मोड़िए और चारों को उँगली से एक साथ दबाकर रखिए।
एक पिन को चारों मुड़े कोनों और कागज़ के केंद्र से आर-पार निकालकर किसी छड़ी, पेंसिल की रबर या पतले बाँस में गड़ा दीजिए।
पिन को थोड़ा ढीला रखिए, जिससे कागज़ स्वतंत्र रूप से घूम सके।
अब इसे चलती हवा के सामने ऊँचा उठाइए। हवा न चल रही हो तो इसे उठाकर साथ लेकर दौड़िए।
चौकोर कागज़ → दो विकर्ण → चार आधी कटानें → चारों कोने मोड़कर छड़ी में पिन से जोड़ना।
यदि फिरकी न घूमे: पिन बहुत कसा है — उसे थोड़ा ढीला कीजिए। या मुड़े हुए कोने भारी हैं — केवल नोकें ही मोड़िए। या कागज़ बहुत मुलायम है — कड़ा गत्ता लीजिए।
प्र2.
क्या आपकी फिरकी घूमती है?
उत्तर
हाँ, फिरकी गोल-गोल घूमती है। हवा तेज़ हो तो वह इतनी तेज़ी से घूमती है कि उसके रंग आपस में मिले हुए दिखने लगते हैं। हवा रुकते ही वह धीमी होकर ठहर जाती है। हवा न चल रही हो तो उसे उठाकर दौड़ते ही वह घूमने लगती है।
मैं क्या करता हूँ
फिरकी क्या करती है
शांत हवा में स्थिर पकड़ता हूँ
बिल्कुल नहीं घूमती
हल्की हवा में पकड़ता हूँ
धीरे-धीरे घूमती है
तेज़ हवा में पकड़ता हूँ
तेज़ी से घूमती है और हल्की सरसराहट करती है
ऊपर उठाकर दौड़ता हूँ
घूमती है, क्योंकि मैंने हवा को उसके पास से तेज़ी से गुज़ार दिया
एक ओर से फूँक मारता हूँ
घूमती है; दूसरी ओर से फूँकने पर उलटी दिशा में घूमती है
ऐसा क्यों होता है: हर मुड़ा हुआ कोना एक तिरछी छोटी पंखुड़ी बना देता है, ठीक किसी नन्हे पाल की तरह। चलती हवा उस तिरछी पंखुड़ी में से सीधी नहीं निकल पाती, इसलिए वह उस पर धक्का देती है। सभी पंखुड़ियों पर धक्का एक ही ओर लगता है, अत: पूरी फिरकी घूम जाती है। इस प्रकार चलती हवा ने कार्य किया — अर्थात् पवन ऊर्जा का स्रोत है। पुस्तक भी यही कहती है — फिरकी का घूमना, कागज़ का जलना तथा जल-चक्रिका का घूमना हमें दर्शाते हैं कि पवन, सूर्य और जल ऊर्जा के स्रोत हैं जिनके कारण वस्तुएँ कार्य करती हैं।
बड़ी फिरकी: पवनचक्की एक विशाल फिरकी ही तो है। हवा उसके लंबे पंखों को घुमाती है और उस घुमाव से विद्युत बनाई जाती है। प्राचीन जहाज़ भी इसी पवन से चलते थे — गुजरात और तमिलनाडु के व्यापारी पाल-नौकाओं से अफ्रीका, अरेबिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया तक जाते थे।