कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 7 गतिविधि 7 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
सूर्य के प्रकाश को केंद्रित करना — 1. एक कागज का टुकड़ा और एक आवर्धक लेंस लीजिए। 2. कागज को इस प्रकार रखिए कि सूर्य का प्रकाश उस पर सीधा पड़े और आवर्धक लेंस का उपयोग करके प्रकाश को कागज पर केंद्रित कीजिए। सुझाव — इस गतिविधि को किसी वयस्क व्यक्ति के निरीक्षण में ही किया जाना चाहिए।
उत्तर

इसे कैसे करें — केवल किसी वयस्क व्यक्ति के साथ:

  1. खुली धूप वाला स्थान चुनिए। पत्थर या नंगी ज़मीन पर खड़े होइए, घास या कागज़, कपड़े और सूखे पत्तों के पास कभी नहीं।
  2. आरंभ करने से पहले पास में एक मग जल रख लीजिए।
  3. कागज़ का छोटा टुकड़ा ज़मीन या पत्थर पर सीधा बिछाइए। गहरे रंग का या समाचार-पत्र का टुकड़ा सबसे उपयुक्त है।
  4. आवर्धक लेंस को सूर्य और कागज़ के बीच में पकड़िए।
  5. लेंस को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे कीजिए। कागज़ पर प्रकाश का एक गोला दिखाई देगा, जो हिलाने पर बड़ा-छोटा होता रहेगा।
  6. जहाँ वह गोला सबसे छोटा और सबसे चमकीला हो जाए, वहीं रुक जाइए। वह बिंदु ही फोकस है — वह स्थान जहाँ सारा प्रकाश एकत्र हो गया है।
  7. लेंस को वहीं स्थिर पकड़े रहिए और उस बिंदु को देखते रहिए।
सूर्य आवर्धक लेंस कागज़ पर चमकीला गर्म बिंदु चौड़े लेंस पर पड़ने वाला सारा प्रकाश एक ही छोटे बिंदु पर सिमट जाता है।
लेंस सूर्य के चौड़े प्रकाश-पुंज को एक ही छोटे बिंदु पर एकत्र कर देता है।
सुरक्षा के नियम, और ये आवश्यक हैं: लेंस से सूर्य को कभी मत देखिए — इससे आँखों को हानि हो सकती है। गर्म बिंदु को किसी की त्वचा, कपड़े या बालों पर मत डालिए। यह गतिविधि नंगी ज़मीन पर, वयस्क के साथ और पास में जल रखकर ही कीजिए। पूरा होने पर लेंस को उलटा करके रख दीजिए, जिससे वह स्वयं कहीं आग न लगा दे।
प्र2.
3. आपके कागज का क्या होता है?
उत्तर

उस चमकीले बिंदु पर कागज़ बहुत गर्म हो जाता है। वह पहले भूरा पड़ता है, फिर काला होता है, फिर उससे धुआँ उठने लगता है, और लेंस स्थिर रखने पर वह जलकर एक छोटा छेद बना देता है।

समयबिंदु पर क्या होता है
तुरंतएक बहुत चमकीला छोटा बिंदु बन जाता है
कुछ क्षण बादउस स्थान पर कागज़ भूरा पड़ जाता है
थोड़ी देर बादभूरा निशान काला हो जाता है और पतली धुएँ की लकीर उठती है
स्थिर पकड़े रहने परकागज़ में आग लग जाती है और छोटा-सा छेद जल जाता है
ऐसा क्यों होता है: सूर्य का प्रकाश ऊष्मा साथ लाता है। पूरे पन्ने पर फैली हुई वह ऊष्मा कागज़ को केवल हल्का गर्म करती है। आवर्धक लेंस अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को मोड़कर एक ही नन्हे बिंदु पर एकत्र कर देता है। अब जो ऊष्मा पूरे लेंस पर फैली थी, वह चावल के दाने से भी छोटे स्थान में सिमट जाती है। इतनी छोटी जगह में सिमटकर वह कागज़ जलाने भर की तेज़ हो जाती है। कुछ जोड़ा नहीं गया — वही धूप केवल केंद्रित कर दी गई, अर्थात् एक स्थान पर एकत्र कर दी गई।
यही सिद्धांत, काम में: सौर कुकर चमकदार परावर्तक चादरों से धूप को बर्तन पर एकत्र करता है और बिना किसी ईंधन के दाल-चावल पका देता है। बड़े सौर संयंत्रों में दर्पणों की पंक्तियाँ धूप एकत्र करके भाप बनाती हैं। सूर्य एक घंटे में पृथ्वी को इतनी ऊर्जा देता है जितनी पृथ्वी के सभी मनुष्य पूरे वर्ष में उपयोग करते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?