कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 7 गतिविधि 8 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
जल-चक्रिका — 1. कागज का एक खाली कप और पाँच चम्मच लीजिए। 2. कप में एक ही समतल में समान दूरी पर पाँच छिद्र कीजिए और इसमें चम्मचों के अग्रभाग को जोड़िए। 3. फिर कप की तली के केंद्र से एक पेंसिल या स्ट्रॉ आर-पार कराइए। 4. अवलोकन कीजिए कि क्या कप पेंसिल या स्ट्रॉ के चारों ओर एक पहिए की तरह घूमता है। 5. अपने पहिए को किसी खाली डिब्बे पर संतुलित कीजिए जैसा चित्र में दर्शाया गया है।
कागज के कप की जल-चक्रिका, डिब्बे पर संतुलित — जैसा पृष्ठ 124 पर दर्शाया गया है।
उत्तर

इसे कैसे बनाएँ:

  1. कागज़ का एक खाली कप लीजिए — चाय का उपयोग किया हुआ कप भी चलेगा। उसे पोंछकर सुखा लीजिए।
  2. कप की बगल में एक ही ऊँचाई पर, बराबर दूरी पर पाँच छोटे छिद्र कीजिए, जैसे घड़ी के अंकों की तरह।
  3. हर छिद्र में एक प्लास्टिक का चम्मच इस प्रकार लगाइए कि चम्मच का कटोरा बाहर की ओर हो और पाँचों एक ही दिशा में हों। हिलें तो थोड़ी टेप लगा दीजिए।
  4. कप की तली के ठीक बीच में एक छोटा छिद्र कीजिए और उसमें से एक पेंसिल या स्ट्रॉ सीधा आर-पार निकालिए। यही पेंसिल धुरी है।
  5. कप को हाथ से हल्के-से घुमाइए। देखिए कि वह पेंसिल के चारों ओर पहिए की तरह स्वतंत्र घूमता है या नहीं। अटके तो छिद्र थोड़ा बड़ा कर दीजिए।
  6. पेंसिल के दोनों सिरे किसी बाल्टी या टब के किनारे पर, या दो ऊँचे गिलासों पर टिका दीजिए, जिससे कप हवा में लटका रहे और घूम सके।
पेंसिल (धुरी) यहाँ पानी उड़ेलिए पहिया घूमता है पेंसिल को बाल्टी पर टिकाइए ताकि कप स्वतंत्र रूप से घूम सके।
पाँच चम्मचों वाला कागज़ का कप, पेंसिल पर घूमता हुआ — घर की बनी जल-चक्रिका।

चरण 4 पर आपका अवलोकन: कप सचमुच पेंसिल के चारों ओर पहिए की तरह स्वतंत्र घूमता है। यही जाँच बताती है कि आपकी चक्रिका तैयार है।

इसे बाल्टी के ऊपर या बाहर कीजिए। छींटे अवश्य पड़ेंगे। कप छोटा हो तो पेंसिल के स्थान पर स्ट्रॉ लीजिए — वह हल्का होता है, इसलिए पहिया अधिक सरलता से घूमता है।
प्र2.
6. अब अपने पहिए पर पानी उड़ेलिए। 7. क्या पानी के कारण पहिया घूमने लगता है?
उत्तर

हाँ। गिरता हुआ पानी चम्मचों से टकराते ही पहिया घूमने लगता है। पतली धार डालिए तो वह धीरे घूमता है। मोटी और तेज़ धार डालिए तो तेज़ी से घूमता है। पानी रोकते ही वह धीमा होकर रुक जाता है।

कैसे उड़ेलें:

  1. एक मग या बोतल में पानी भरिए।
  2. उसे पहिए के एक ओर के ऊपर पकड़िए — बीच में नहीं।
  3. ऐसी सम धार डालिए कि पानी चम्मचों के कटोरों में गिरे।
  4. पहिए को देखिए। फिर और ऊँचाई से डालकर फिर देखिए।
मैं कैसे उड़ेलता हूँपहिया क्या करता है
धीमी बूँद-बूँद धारधीरे घूमता है और कभी-कभी रुक जाता है
सम धारलगातार, गोल-गोल घूमता रहता है
अधिक ऊँचाई सेतेज़ घूमता है — पानी अधिक ज़ोर से आकर टकराता है
पहिए के ठीक बीच मेंलगभग नहीं घूमता; धक्का किनारे के चम्मचों पर पड़ना चाहिए
पानी डालना बंदधीमा होकर रुक जाता है
ऐसा क्यों होता है: गिरते हुए जल में ऊर्जा होती है क्योंकि वह गतिमान है। जब वह चम्मच के कटोरे में गिरता है तो उसे नीचे की ओर धकेल देता है। अगला चम्मच घूमकर सामने आता है और उसे भी धक्का मिलता है, इस प्रकार पहिया घूमता रहता है। बहते जल की ऊर्जा पहिए के घुमाव में बदल गई। अत: बहता जल ऊर्जा का स्रोत है
असली रूप: पहाड़ी क्षेत्रों में घराट नामक जल-चक्कियाँ बहते जल से अनाज पीसती हैं — नाले में लगा बड़ा लकड़ी का पहिया चक्की का पाट घुमाता है, न ईंधन, न विद्युत। जल-विद्युत केंद्र में गिरता हुआ जल टर्बाइन नामक बड़ा पहिया घुमाता है और उससे पूरे नगर के लिए विद्युत बनती है। आपका कागज़ का कप भी इसी सिद्धांत पर चलता है।
क्या यह उपयोगी रहा?