प्र1.
फिर भी ऐसे अन्य स्रोत हैं जो प्रदूषण नहीं करते हैं जिनका उपयोग करके हम बिजली उत्पन्न कर सकते हैं। क्या आप पता लगा सकते हैं कि ये स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर
हाँ — सूर्य, पवन और बहता या गिरता हुआ जल। इन तीनों से बनी विद्युत वायु में धुआँ नहीं भरती, इसलिए इसे स्वच्छ ऊर्जा कहते हैं।
| स्रोत | उसे पकड़ने वाली मशीन | कैसे काम करती है | भारत में कहाँ |
|---|---|---|---|
| सूर्य | सौर पैनल | चपटा काला पैनल सूर्य का प्रकाश ग्रहण कर उसे विद्युत में बदल देता है | भड़ला सौर पार्क, राजस्थान — विश्व के सबसे बड़े संयंत्रों में से एक |
| पवन | पवनचक्की | हवा लंबे पंखों को घुमाती है और घूमने से विद्युत बनती है | तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटक के पवन क्षेत्र |
| बहता या गिरता जल | बाँध या नदी पर लगी टर्बाइन | तेज़ बहता जल टर्बाइन नामक पहिया घुमाता है और उससे विद्युत बनती है | भाखड़ा नांगल जैसे बाँध; पहाड़ों के घराट |
कोयला → विद्युत + धुआँ और हानिकारक गैसें
सूर्य, पवन, जल → विद्युत + कुछ भी हानिकारक नहीं
सूर्य, पवन, जल → विद्युत + कुछ भी हानिकारक नहीं
ये तीनों प्रदूषण क्यों नहीं करते: इनमें कुछ जलाया ही नहीं जाता। सौर पैनल बस प्रकाश में रखा रहता है। पवनचक्की बस घूमती है। टर्बाइन को बस जल धकेलता है। जहाँ जलना नहीं, वहाँ धुआँ भी नहीं। एक और अच्छी बात — धूप, हवा और नदी का जल हर दिन लौटकर आते हैं, जबकि कोयला एक बार खोदकर जला दिया तो सदा के लिए समाप्त।
क्या आप जानते हैं? केरल का कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा विश्व का पहला ऐसा हवाई अड्डा है जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलता है। पूरा हवाई अड्डा, उसकी सारी बत्तियाँ और मशीनें — सब धूप से।