प्र1.
यदि विद्युत न हो तो आपका दिन कैसा व्यतीत होगा?
उत्तर
दिन बहुत कठिन और बहुत धीमा हो जाएगा। न पंखा, न अँधेरे के बाद प्रकाश, न रेफ्रिजरेटर, न पंप, न फ़ोन, न टेलीविज़न — और अनेक लोगों का काम ही रुक जाएगा।
- प्रात:काल। मोबाइल का अलार्म नहीं बजेगा। मोटर टंकी में जल नहीं चढ़ा पाएगी, इसलिए हाथ से जल भरना पड़ेगा।
- रसोई। रेफ्रिजरेटर बंद है, अत: कल का दूध और सब्ज़ियाँ खराब होने लगेंगी। मिक्सी नहीं चलेगी — चटनी सिल पर पीसनी होगी।
- तैयार होना। वर्दी के लिए इस्तरी नहीं। गीज़र नहीं, अत: ठंडे जल से स्नान।
- विद्यालय। कक्षा गर्म और अँधेरी। न पंखा, न बल्ब, न कंप्यूटर, न प्रोजेक्टर, और जल ठंडा करने वाली मशीन भी बंद।
- दुकानें और अस्पताल। दुकानों के फ्रीज़र पिघल जाएँगे। अस्पतालों को जनित्र (जनरेटर) चलाना पड़ेगा, क्योंकि वहाँ यंत्र और प्रकाश जीवन बचाने के लिए आवश्यक हैं।
- कारखाने। मशीनें रुक जाएँगी, कुछ बनेगा नहीं और लोगों का एक दिन का काम चला जाएगा।
- संध्या। गृहकार्य सूर्यास्त से पहले करना होगा, या दीपक और मोमबत्ती के प्रकाश में।
- रात। गलियाँ अँधेरी। घर शांत और गर्म। लोग हवा के लिए छत पर सोएँगे।
इसका इतना असर क्यों होता है: विद्युत कोई एक मशीन नहीं है — वह लगभग हर मशीन के पीछे है। इसलिए जब वह जाती है तो प्रकाश, गति, ध्वनि, ऊष्मा और शीतलन — सब एक साथ चले जाते हैं। इसीलिए अध्याय कहता है कि विद्युत के कारण हमारा जीवन कितना सरल हो गया है।
एक अच्छी बात भी ध्यान दीजिए: हज़ारों वर्षों तक लोग इसके बिना रहे हैं। भारत के परंपरागत घरों में मोटी दीवारें और छोटी खिड़कियाँ होती थीं, जिससे घर गर्मी में ठंडा और सर्दी में गर्म रहता था। आँगन, छत पर चटाई, हाथ का पंखा और जल ठंडा रखता मटका — ये पुराने उपाय आज भी विद्युत कटौती में काम आते हैं।