कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 9 कक्षा की गतिविधि के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
चरण 1— कक्षा के लिए एक आरेख बनाना। आइए हम अपनी पत्रिका से अवलोकनों को ध्यान में रखते हुए कक्षा की दीवार के लिए एक आरेख बनाना आरंभ करें। आरेख में अप्रैल–जून, जुलाई–सितंबर, अक्तूबर–दिसंबर और जनवरी–मार्च तक की समय अवधियों को स्तंभों में बाँटा जाएगा। पंक्ति में पौधों का जीवन; पशु और पक्षी; वायु, उष्मा और प्रकाश; जल और जल निकाय; तथा मानव गतिविधियाँ लिखी जाएँगी।
विषयसमय अवधि
अप्रैल–जूनजुलाई–सितंबरअक्तूबर–दिसंबरजनवरी–मार्च
पौधों का जीवन    
पशु और पक्षी    
वायु, उष्मा और प्रकाश    
जल और जल निकाय    
मानव गतिविधियाँ    
आरेखीय प्रारूप, पृष्ठ 153 — कक्षा की दीवार के लिए खाली आरेख।
उत्तर

4 स्तंभों और 5 पंक्तियों वाला एक बड़ा आरेख बनाइए। चार स्तंभ वर्ष के चार भाग हैं। पाँच पंक्तियाँ वे पाँच बातें हैं जिन्हें आप वर्षभर देखते रहे हैं। इस प्रकार भरने के लिए 20 बक्से बनते हैं।

इसे कैसे बनाएँ —

  1. दो-तीन चार्ट पेपर टेप से जोड़कर एक बड़ी शीट बनाइए। वह इतनी बड़ी हो कि पूरी कक्षा अपनी जगह से पढ़ सके।
  2. बाईं ओर पंक्तियों के नाम के लिए और ऊपर स्तंभों के नाम के लिए चौड़ी जगह छोड़िए।
  3. पैमाने और गहरे मार्कर से रेखाएँ खींचिए। पहले पेंसिल से हल्का बनाइए, फिर ऊपर से मार्कर चलाइए।
  4. ऊपर चारों समय अवधियाँ लिखिए — अप्रैल–जून, जुलाई–सितंबर, अक्तूबर–दिसंबर, जनवरी–मार्च
  5. बाईं ओर पाँचों विषय लिखिए — पौधों का जीवन, पशु और पक्षी, वायु, उष्मा और प्रकाश, जल और जल निकाय, मानव गतिविधियाँ
  6. प्रत्येक विषय के नाम के आगे उसका छोटा चिह्न बनाइए, जैसा पुस्तक में है — पत्ता, पक्षी, सूर्य, जल की बूँद और चलता हुआ व्यक्ति।
  7. ऊपर शीर्षक लिखिए — हमारी ऋतुओं का आरेख — और उसके नीचे वर्ष लिखिए।
  8. इसे कक्षा की उस दीवार पर लगाइए जहाँ सब पहुँच सकें, ताकि बाद में भी कुछ जोड़ा जा सके।
विषयअप्रैल–जूनजुलाई–सितंबरअक्तूबर–दिसंबरजनवरी–मार्च
पौधों का जीवन
पशु और पक्षी
वायु, उष्मा और प्रकाश
जल और जल निकाय
मानव गतिविधियाँ
केवल पत्रिकाएँ क्यों नहीं, आरेख क्यों: आप में से प्रत्येक ने वर्ष का थोड़ा-सा भाग ही देखा। आपकी पत्रिका में आपकी गली और आपका वृक्ष है। जब सबकी टिप्पणियाँ एक ही जगह आ जाती हैं तो पूरी कक्षा एक ही दृष्टि में पूरे वर्ष का रूप देख लेती है। जो क्रम एक कॉपी में दिखाई नहीं देता, वह एक दीवार पर स्पष्ट हो जाता है।
सुझाव: हर बक्से में खूब जगह छोड़िए। बीस-तीस विद्यार्थी कुछ न कुछ जोड़ना चाहेंगे और बक्से आपके सोचने से कहीं जल्दी भर जाते हैं।
प्र2.
चरण 2— प्रारूप भरिए। प्रत्येक बक्से के लिए (उदाहरण के लिए अप्रैल से जून में पौधों में परिवर्तन) आप में से कोई एक विद्यार्थी खड़े होकर कक्षा के सभी सहपाठियों से निश्चित अवधि में उनके द्वारा लिखे गए परिवर्तनों के विषय में पूछ सकता है। आप में से प्रत्येक विद्यार्थी अपनी पत्रिका में लिखी गई टिप्पणियाँ और अनुभव कक्षा में साझा करेगा। टिप्पणियों पर चर्चा की जाएगी और मुख्य टिप्पणियाँ आरेख में लिखी जाएँगी।
विषयसमय अवधि
अप्रैल–जूनजुलाई–सितंबरअक्तूबर–दिसंबरजनवरी–मार्च
पौधों का जीवन    
पशु और पक्षी    
वायु, उष्मा और प्रकाश    
जल और जल निकाय    
मानव गतिविधियाँ    
आरेखीय प्रारूप, पृष्ठ 153 — कक्षा की दीवार के लिए खाली आरेख।
उत्तर

एक-एक करके बक्से लीजिए। एक विद्यार्थी खड़ा होकर बक्से का नाम पढ़े — “अप्रैल से जून, पौधों का जीवन” — और शेष कक्षा अपनी पत्रिका से बताए कि उसने क्या लिखा था। कक्षा मुख्य बातें तय करे और वही आरेख में लिखी जाएँ। फिर अगला विद्यार्थी अगला बक्सा ले।

इसे व्यवस्थित कैसे रखें —

  1. पहले क्रम तय कर लीजिए — एक-एक पंक्ति पूरी कीजिए, इधर-उधर मत कूदिए।
  2. जो विद्यार्थी खड़ा है वही आरेख पर लिखे। शेष सब अपनी पत्रिका से पढ़ें।
  3. केवल छोटे बिंदु लिखिए — तीन-चार शब्दों के, पूरे वाक्य नहीं।
  4. यदि दो लोगों ने अलग-अलग बातें देखी हों तो दोनों लिखिए। अलग-अलग गलियों में सचमुच अलग-अलग बातें दिखती हैं।
  5. यदि किसी ने ऐसी बात बताई जो और किसी ने नहीं देखी, तो पहले पूछिए — “तुमने यह ठीक कब देखा था?” और तब लिखिए।

भरे हुए आरेख का नमूना। आपकी कक्षा का आरेख इससे अलग होगा, क्योंकि यह इस पर निर्भर करता है कि आप कहाँ रहते हैं। यह नमूना उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र के लिए है।

विषयअप्रैल–जूनजुलाई–सितंबरअक्तूबर–दिसंबरजनवरी–मार्च
पौधों का जीवनआम, जामुन और लीची पकते हैं। गुलमोहर और अमलतास फूलों से लद जाते हैं। घास सूखकर भूरी हो जाती है। पत्तियाँ धूल भरी और मुरझाई-सी लगती हैं।सब कुछ हरा हो जाता है। खाली ज़मीन पर नई घास उग आती है। कुकुरमुत्ते निकल आते हैं। गीली दीवारों पर काई। खेतों में धान की रोपाई।गेंदा और गुलदाउदी खिलते हैं। धान सुनहरा होकर कट जाता है। अमरूद, संतरा, शरीफा और गन्ना तैयार। कुछ वृक्षों से पत्तियाँ झड़ने लगती हैं।सरसों के खेत पीले हो जाते हैं। गेहूँ बढ़ता है। क्यारियों में मटर, गाजर और पालक। फरवरी में आम बौराता है। पलाश और सेमल खिलते हैं। मार्च में नई पत्तियाँ।
पशु और पक्षीकोयल दिनभर ज़ोर से बोलती है। कौए और गौरैया छाया में चोंच खोले बैठे रहते हैं। कुत्ते खड़ी गाड़ियों के नीचे लेटे रहते हैं। मवेशियों को बार-बार पानी पिलाना पड़ता है।रात में मेंढक टर्राते हैं। गीली ज़मीन पर केंचुए और घोंघे निकल आते हैं। चारों ओर व्याध-पतंग (ड्रैगनफ़्लाई)। बहुत मच्छर। साँप भरे हुए बिलों से बाहर आ जाते हैं।झील पर प्रवासी पक्षी आते हैं — बत्तख, सारस, हंस। कीट कम हो जाते हैं। मवेशी कटे खेतों में चरते हैं। गिलहरियाँ भोजन जमा करती हैं।प्रवासी पक्षी अब भी झील पर, मार्च तक लौट जाते हैं। पक्षी घोंसले बनाने लगते हैं। कोयल फिर बोलने लगती है। फूलों के साथ तितलियाँ और मधुमक्खियाँ लौट आती हैं।
वायु, उष्मा और प्रकाशबहुत गर्मी और सूखापन। दोपहर में लू चलती है। दिन लंबे, रातें छोटी। सूर्योदय लगभग साढ़े पाँच बजे, सूर्यास्त लगभग सात बजे। धूप तीखी और सफ़ेद।आकाश प्रायः बादलों से भरा। धूप कम। हवा नम और चिपचिपी। मई जितनी गर्मी नहीं, पर उमस भरी। बादल गरजते हैं, बिजली चमकती है। दिन छोटे होने लगते हैं।आकाश साफ़ और गहरा नीला। हवा ठंडी और शुष्क हो जाती है। सुबह कुहासा, घास पर ओस। दिन छोटे — साढ़े पाँच बजे ही अंधेरा।जनवरी सबसे ठंडी। कई दिन घना कोहरा। आरंभ में दिन सबसे छोटे, फिर धीरे-धीरे लंबे होने लगते हैं। दोपहर की धूप सुहावनी लगती है। मार्च के मध्य तक फिर गरमी।
जल और जल निकायगड्ढे और छोटे तालाब सूख जाते हैं। तालाब की तली में दरारें। नल-हैंडपंप से पानी धीरे आता है। हम कहीं अधिक पानी पीते हैं। घड़े का पानी ठंडा रहता है।जगह-जगह पानी भर जाता है। तालाब और नदियाँ भर जाती हैं, कभी-कभी उफनती भी हैं। पानी मटमैला दिखता है — उबालकर या छानकर ही पीना चाहिए। कुओं का जल-स्तर बढ़ जाता है।तालाब अब भी भरे हैं पर स्तर धीरे-धीरे घटता है। नल का पानी ठंडा लगता है। सुबह घास पर खूब ओस।पानी बर्फ़-सा ठंडा लगता है। सबसे ठंडी सुबहों में घास पर पाला। तालाब का स्तर नीचा। हमें प्यास कम लगती है और हम पानी कम पीते हैं।
मानव गतिविधियाँगर्मी की छुट्टियाँ। पतले सूती वस्त्र और टोपी। पंखे और कूलर चलते हैं। लस्सी, आम पना, सत्तू, तरबूज़, बर्फ़। काम सुबह जल्दी या सूर्यास्त के बाद। खेतों की जुताई करके तैयारी।विद्यालय फिर खुलते हैं। छाता, बरसाती और गमबूट। धान और मक्का की बुवाई। भुट्टा और पकौड़े। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, ओणम, गणेश चतुर्थी, नाग पंचमी।स्वेटर बक्सों से बाहर आते हैं। उपज घर आती है। गेहूँ, सरसों और चने की बुवाई। नवरात्र, दशहरा, दीपावली, छठ, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस। रज़ाइयाँ धूप में डाली जाती हैं।ऊनी वस्त्र, मफ़लर, मोज़े। शाम को अलाव। गजक, तिल के लड्डू, गुड़, सरसों का साग। लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल, गणतंत्र दिवस, वसंत पंचमी, होली। पतंगबाज़ी। मार्च के अंत में गेहूँ की कटाई आरंभ।
भरा हुआ आरेख क्या दिखाता है: किसी भी पंक्ति को बाएँ से दाएँ पढ़िए और वही एक कहानी पाँच अलग-अलग ढंग से कही मिलेगी — गर्म और सूखा, फिर गीला और हरा, फिर ठंडा और सुनहरा, फिर सर्द और पीला, और फिर से गर्म। पौधे, पशु, वायु, जल और मनुष्य अलग-अलग काम नहीं कर रहे। वे सब एक ही मौसमी परिवर्तन का उत्तर दे रहे हैं।
तिथियाँ भी लिखिए: प्रत्येक बिंदु के आगे वह महीना लिखिए जिसमें आपने वह देखा। अगले वर्ष आपके कनिष्ठ विद्यार्थी जाँच सकेंगे कि आम उसी समय बौराया या नहीं — असली प्रकृति-अवलोकन ऐसे ही किया जाता है।
प्र3.
चरण 3— वर्षभर में हुए परिवर्तनों का अध्ययन। आइए हम सभी विद्यार्थी पाँच समूहों में बँट जाएँ। प्रत्येक समूह प्रस्तुत आरेख में से एक विषय का चुनाव करेगा और विभिन्न समय अवधियों में हुए परिवर्तन क्रम का अध्ययन करेगा। कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का उपयोग करते हुए आप अपने विषय पर पोस्टर बनाइए तथा उसमें वर्षभर होने वाले परिवर्तनों को दर्शाइए।
विषयसमय अवधि
अप्रैल–जूनजुलाई–सितंबरअक्तूबर–दिसंबरजनवरी–मार्च
पौधों का जीवन    
पशु और पक्षी    
वायु, उष्मा और प्रकाश    
जल और जल निकाय    
मानव गतिविधियाँ    
आरेखीय प्रारूप, पृष्ठ 153 — कक्षा की दीवार के लिए खाली आरेख।
उत्तर

प्रत्येक समूह आरेख की एक पंक्ति लेकर उसे ऐसा पोस्टर बनाए जिसमें पूरा वर्ष एक साथ दिखे। समूह 1 — पौधों का जीवन, समूह 2 — पशु और पक्षी, समूह 3 — वायु, उष्मा और प्रकाश, समूह 4 — जल और जल निकाय, समूह 5 — मानव गतिविधियाँ।

अच्छा पोस्टर कैसे बनाएँ —

  1. चार्ट पेपर को चार भागों में बाँटिए, प्रत्येक समय अवधि के लिए एक। बाएँ से दाएँ, ताकि वर्ष कहानी की तरह पढ़ा जाए।
  2. प्रत्येक भाग के ऊपर महीने स्पष्ट लिखिए।
  3. हर भाग में अनेक छोटे चित्रों के बजाय एक बड़ा चित्र बनाइए।
  4. चित्र के नीचे केवल तीन-चार छोटे बिंदु लिखिए।
  5. रंगों से बात कहिए — वर्षा के लिए हरा, ग्रीष्म के लिए पीला और भूरा, शीत के कोहरे के लिए धूसर और सफ़ेद।
  6. ऊपर शीर्षक और नीचे समूह के सदस्यों के नाम लिखिए।
  7. प्रस्तुति से पहले एक बार अभ्यास कीजिए। तय कर लीजिए कि कौन किस भाग पर बोलेगा।

किस समूह का पोस्टर क्या दिखाए —

समूहविषयपोस्टर का सुझाव
समूह 1पौधों का जीवनएक ही वृक्ष चार बार — ग्रीष्म की गर्मी में सूखा-सा, वर्षा में गहरा हरा, शरद में पत्तियाँ झड़ाता हुआ, और वसंत में नई पत्तियों तथा फूलों से भरा। नीचे एक पट्टी में दिखाइए कि किस ऋतु में बाज़ार में कौन-सा फल आता है।
समूह 2पशु और पक्षीएक ही तालाब चार बार। ग्रीष्म में बोलती कोयल, वर्षा में मेंढक और व्याध-पतंग, शीत में आते प्रवासी बत्तख और सारस, तथा वसंत में घोंसला बनाते पक्षी।
समूह 3वायु, उष्मा और प्रकाशहर ऋतु का आकाश — ग्रीष्म में चमकीला सफ़ेद, वर्षा में काले बादल, शरद में साफ़ नीला, शीत में कोहरे से भरा। हर ऋतु के सूर्योदय-सूर्यास्त के समय लिखिए और दिखाइए कि दिन कैसे लंबे-छोटे होते हैं।
समूह 4जल और जल निकायएक ही तालाब या गड्ढा चार बार — सूखा और दरारों वाला, लबालब भरा, धीरे-धीरे घटता हुआ, और नीचा जल-स्तर तथा घास पर पाला। हर बार जल-स्तर पर एक रेखा खींचिए।
समूह 5मानव गतिविधियाँएक ही गली के चार चित्र — शिकंजी बेचता ठेला, छाते के नीचे चलते लोग, दीपावली का बाज़ार, और शॉल ओढ़े लोगों के साथ अलाव। पर्वों के नाम और लोगों के वस्त्र भी दिखाइए।
एक समूह एक ही विषय क्यों ले: यदि आप पूरे वर्ष एक ही धागा पकड़कर चलें तो उसका बदलना स्पष्ट दिखता है; एक साथ सब कुछ देखने पर बात खो जाती है। और जब पाँचों पोस्टर अगल-बगल लगते हैं तो कक्षा को पता चलता है कि पाँचों धागे ठीक एक ही समय पर बदलते हैं — ऋतु इसी का नाम है।
बनावटी बात मत लिखिए: पोस्टर पर वही डालिए जो आपकी कक्षा ने सचमुच अपनी पत्रिकाओं में लिखा है। यदि किसी ने प्रवासी पक्षी नहीं देखा तो उसे मत बनाइए। जो सचमुच देखा गया उसका पोस्टर, कल्पना के सुंदर पोस्टर से कहीं अधिक मूल्यवान है।
प्र4.
चरण 4— पूरे वर्ष का एक साथ अवलोकन। जब सभी समूह अपनी प्रस्तुतियाँ कर लें तो नए समूह बनाइए, परंतु ध्यान रहे कि प्रत्येक नए समूह में प्रत्येक विषय से एक विद्यार्थी होना चाहिए। अब प्रत्येक समय अवधि के लिए चार नए समूह बनाइए। इन अवलोकनों की सहायता से अपनी समय अवधि (उदाहरण के लिए, जनवरी–मार्च) के विषय में जो आपने प्रकृति में देखा, उसे लोगों के जीवन में घटित होने वाले परिवर्तनों से जोड़ते हुए एक संक्षिप्त कहानी लिखिए। इसे कक्षा में पढ़कर सुनाइए।
विषयसमय अवधि
अप्रैल–जूनजुलाई–सितंबरअक्तूबर–दिसंबरजनवरी–मार्च
पौधों का जीवन    
पशु और पक्षी    
वायु, उष्मा और प्रकाश    
जल और जल निकाय    
मानव गतिविधियाँ    
आरेखीय प्रारूप, पृष्ठ 153 — कक्षा की दीवार के लिए खाली आरेख।
उत्तर

अब समूहों को आपस में मिला दीजिए। प्रत्येक नए समूह में पौधों वाला एक, पक्षियों वाला एक, वायु वाला एक, जल वाला एक और मानव गतिविधियों वाला एक विद्यार्थी हो — और प्रत्येक नया समूह वर्ष का एक भाग ले। इन पाँचों को मिलाकर उन तीन महीनों के विषय में आरेख की हर बात पता है।

कहानी कैसे बुनें —

  1. साथ बैठकर अपनी समय अवधि के अपने-अपने पाँच सेट बिंदु एक-एक करके पढ़िए।
  2. एक पात्र चुनिए — कोई बच्चा, कोई किसान, कोई गौरैया, कोई तालाब, या आम का वृक्ष भी।
  3. उस पात्र को तीन महीनों की यात्रा कराइए और रास्ते में उसे पाँचों विषयों से मिलाइए।
  4. कहानी छोटी रखिए — दस-बारह वाक्य पर्याप्त हैं।
  5. ध्यान रखिए कि हर विषय से कम-से-कम एक बात कहानी में आए, ताकि कोई सदस्य छूट न जाए।
  6. कक्षा में बारी-बारी से एक-एक वाक्य पढ़कर सुनाइए।

नमूना उत्तर — जनवरी–मार्च की कहानी

वसंत की प्रतीक्षा करती गौरैया

जनवरी में सुबहें इतनी कोहरे भरी थीं कि छत से नीम का पेड़ ही नहीं दिखता था। घास पाले से सफ़ेद रहती और दुकान के बाहर रखे घड़े का पानी बर्फ़-सा ठंडा होता। दुकान पर आने वाले बच्चे कानों पर मफ़लर लपेटे रहते और मकर संक्रांति पर उनकी दादी उन्हें गजक और तिल के लड्डू खिलातीं। चीकू गौरैया का पेड़ नंगा था और वह भूखी थी, क्योंकि कीड़े कहीं चले गए थे।

फिर फरवरी के एक दिन चीकू ने कुछ देखा। दुकान के पीछे का खेत चमकीला पीला हो गया था — सरसों फूल आई थी। मधुमक्खियाँ लौट आईं। कुछ तितलियाँ भी लौट आईं। नुक्कड़ वाले आम के पेड़ से मीठी गंध आने लगी और उसकी डालियों पर छोटे-छोटे भूरे बौर लगे थे।

मार्च तक कोहरा जा चुका था। दिन लंबे हो गए थे और दोपहर की धूप इतनी गुनगुनी थी कि बच्चे बिना स्वेटर के खेल सकते थे। होली पर रंग उड़े और पूरी गली सरसों के खेत जैसी दिखने लगी। जो बत्तखें पूरी सर्दी झील पर बिताकर गई थीं, वे उत्तर की ओर उड़ गईं और चीकू नीम के पेड़ पर तिनके ले जाने लगी, क्योंकि घोंसला बनाने का समय आ गया था। खेत का गेहूँ सुनहरा हो चुका था और किसान कह रहा था कि अगले सप्ताह कटाई आरंभ हो जाएगी।

चीकू ने कोई आरेख नहीं पढ़ा था। पर वह जानती थी, जैसे हर जीव जानता है, कि वर्ष का ठंडा भाग बीत चुका है और गर्म भाग फिर से आरंभ हो रहा है।

कहानी ही अंतिम चरण क्यों है: आरेख तथ्यों को अगल-बगल रखकर दिखाता है। कहानी दिखाती है कि वे तथ्य आपस में कैसे जुड़े हैं। कोहरा, सरसों, मधुमक्खियाँ, मफ़लर, पतंगें और घोंसला — ये पाँच अलग बातें नहीं हैं; ये सब इसलिए हुईं क्योंकि वर्ष का सबसे ठंडा भाग समाप्त हो रहा था। कहानी कहकर आप स्वयं को यह सिद्ध कर देते हैं कि आपने क्रम समझ लिया है, केवल बक्से रट नहीं लिए।
अपनी समय अवधि के लिए: अप्रैल–जून की कहानी सूखता हुआ तालाब कह सकता है। जुलाई–सितंबर की कहानी धान का नन्हा पौधा। अक्तूबर–दिसंबर की कहानी दूर से उड़कर आया सारस। ऐसा पात्र चुनिए जिसे परिवर्तन झेलना पड़े — कहानी अपने आप बन जाएगी।
क्या यह उपयोगी रहा?