प्र1.
वर्षभर हमने ये परिवर्तन देखे हैं, परंतु क्या पिछले वर्ष भी ऐसा ही हुआ होगा? क्या अगला वर्ष भी ऐसा ही होगा?
उत्तर
दोनों का उत्तर है — हाँ। पिछले वर्ष भी यही हुआ था और अगले वर्ष भी यही होगा। इसी कारण इसे क्रम कहते हैं — वह बात जो एक ही क्रम में बार-बार लौटकर आती है।
इसे आप स्वयं ऐसे जाँच सकते हैं —
- अपने दादा-दादी से पूछिए कि आपकी गली का आम कब बौराता है। वे बिना सोचे कहेंगे — “फरवरी के आस-पास”।
- किसी किसान से पूछिए कि वर्षा सामान्यतः कब आरंभ होती है। वह हर वर्ष के वही सप्ताह बताएगा, क्योंकि उसे ठीक समय पर बोना होता है।
- कोई पुराना कैलेंडर देखिए। दीपावली और पोंगल हर वर्ष लगभग एक ही समय पर पड़ते हैं।
- पिछले वर्ष के अपने वस्त्र याद कीजिए। स्वेटर लगभग इसी समय निकले थे।
| क्या होता है | कब | क्या यह दोहराया जाता है? |
|---|---|---|
| दिन बहुत गर्म हो जाते हैं | अप्रैल – जून | हाँ, प्रत्येक वर्ष |
| वर्षा आती है | जून के अंत, जुलाई | हाँ, प्रत्येक वर्ष |
| प्रवासी पक्षी आते हैं | अक्तूबर – नवंबर | हाँ, प्रत्येक वर्ष |
| सरसों के खेत पीले होते हैं | जनवरी – फरवरी | हाँ, प्रत्येक वर्ष |
| आम बौराता है | फरवरी – मार्च | हाँ, प्रत्येक वर्ष |
यह दोहराया क्यों जाता है: पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर ठीक एक वर्ष में पूरा करती है। चक्कर पूरा होते ही पृथ्वी वहीं आ जाती है जहाँ से चली थी और सूर्य के सामने उसी तरह होती है — इसलिए वही मौसम लौट आता है और प्रकृति वही सब दोहराती है। वर्षभर चलने वाले इसी दोहराए जाने वाले परिवर्तन-क्रम को हम ऋतुएँ कहते हैं।
पर बिलकुल वैसा ही नहीं: किसी वर्ष वर्षा एक सप्ताह देर से आ सकती है। कोई शीत ऋतु पिछली से अधिक ठंडी हो सकती है। क्रम दोहराया तो जाता है, पर हूबहू नहीं — कुछ-कुछ वैसे ही जैसे वही गीत हर बार थोड़ा अलग ढंग से गाया जाता है।