कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
वर्षभर हमने ये परिवर्तन देखे हैं, परंतु क्या पिछले वर्ष भी ऐसा ही हुआ होगा? क्या अगला वर्ष भी ऐसा ही होगा?
उत्तर

दोनों का उत्तर है — हाँ। पिछले वर्ष भी यही हुआ था और अगले वर्ष भी यही होगा। इसी कारण इसे क्रम कहते हैं — वह बात जो एक ही क्रम में बार-बार लौटकर आती है।

इसे आप स्वयं ऐसे जाँच सकते हैं —

  1. अपने दादा-दादी से पूछिए कि आपकी गली का आम कब बौराता है। वे बिना सोचे कहेंगे — “फरवरी के आस-पास”।
  2. किसी किसान से पूछिए कि वर्षा सामान्यतः कब आरंभ होती है। वह हर वर्ष के वही सप्ताह बताएगा, क्योंकि उसे ठीक समय पर बोना होता है।
  3. कोई पुराना कैलेंडर देखिए। दीपावली और पोंगल हर वर्ष लगभग एक ही समय पर पड़ते हैं।
  4. पिछले वर्ष के अपने वस्त्र याद कीजिए। स्वेटर लगभग इसी समय निकले थे।
क्या होता हैकबक्या यह दोहराया जाता है?
दिन बहुत गर्म हो जाते हैंअप्रैल – जूनहाँ, प्रत्येक वर्ष
वर्षा आती हैजून के अंत, जुलाईहाँ, प्रत्येक वर्ष
प्रवासी पक्षी आते हैंअक्तूबर – नवंबरहाँ, प्रत्येक वर्ष
सरसों के खेत पीले होते हैंजनवरी – फरवरीहाँ, प्रत्येक वर्ष
आम बौराता हैफरवरी – मार्चहाँ, प्रत्येक वर्ष
यह दोहराया क्यों जाता है: पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर ठीक एक वर्ष में पूरा करती है। चक्कर पूरा होते ही पृथ्वी वहीं आ जाती है जहाँ से चली थी और सूर्य के सामने उसी तरह होती है — इसलिए वही मौसम लौट आता है और प्रकृति वही सब दोहराती है। वर्षभर चलने वाले इसी दोहराए जाने वाले परिवर्तन-क्रम को हम ऋतुएँ कहते हैं।
पर बिलकुल वैसा ही नहीं: किसी वर्ष वर्षा एक सप्ताह देर से आ सकती है। कोई शीत ऋतु पिछली से अधिक ठंडी हो सकती है। क्रम दोहराया तो जाता है, पर हूबहू नहीं — कुछ-कुछ वैसे ही जैसे वही गीत हर बार थोड़ा अलग ढंग से गाया जाता है।
प्र2.
आपके क्षेत्र में ऋतुओं को क्या कहते हैं?
उत्तर

घर पर पूछिए और वही नाम लिखिए जो आपका परिवार सचमुच बोलता है। रोज़मर्रा की हिंदी में अधिकतर लोग तीन-चार ऋतुओं के ही नाम लेते हैं — गरमी, बरसात, सर्दी और कभी-कभी बसंत — जबकि पुस्तक छह नाम बताती है।

नमूना उत्तर: हमारे क्षेत्र में मुख्यतः तीन ऋतुएँ कही जाती हैं — अप्रैल से जून तक गरमी, जुलाई से सितंबर तक बरसात, और नवंबर से फरवरी तक सर्दी। बीच के सुहावने सप्ताहों को फरवरी-मार्च में बसंत और अक्तूबर-नवंबर में, जब पत्तियाँ झड़ती हैं, पतझड़ कहा जाता है।

पुस्तक में (संस्कृत नाम)रोज़मर्रा की हिंदी मेंकुछ अन्य भारतीय भाषाओं में
वसंतबसंतबोसोंतो (बांग्ला) · इलवेनिल (तमिल) · वसंत (मराठी)
ग्रीष्मगरमीग्रीष्मो (बांग्ला) · मुदुवेनिल (तमिल) · उन्हाळा (मराठी)
वर्षाबरसातबोर्षा (बांग्ला) · कार् (तमिल) · पावसाळा (मराठी)
शरदशरद / पतझड़शरत् (बांग्ला) · कूदिर् (तमिल)
हेमंतहेमंतहेमोंतो (बांग्ला) · मुन्पनि (तमिल)
शिशिरसर्दी / जाड़ाशीत (बांग्ला) · पिन्पनि (तमिल) · हिवाळा (मराठी)
अलग-अलग जगह नामों की संख्या अलग क्यों: लोग उन्हीं ऋतुओं को नाम देते हैं जिन्हें वे सचमुच अनुभव करते हैं। उत्तर भारत में कड़ी सर्दी, तेज़ गर्मी और स्पष्ट वर्षा होती है, इसलिए वहीं तीन नाम सबसे अधिक चलते हैं। केरल में वर्षभर गर्मी रहती है और बदलती है केवल वर्षा, इसलिए वहाँ बात मुख्यतः बरसात के महीनों की होती है। ऋतुएँ प्रकृति बनाती है; नाम लोग बनाते हैं।
पता कीजिए: परिवार के किसी बुज़ुर्ग से उनकी भाषा के ऋतु-नाम पूछिए। इनमें से कुछ पुराने नाम धीरे-धीरे भुलाए जा रहे हैं, और उन्हें लिख लेना उन्हें बचाने का एक छोटा-सा तरीका है।
क्या यह उपयोगी रहा?