कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 9 भारत की ऋतुएँ के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
क्या आप जानते हैं कि भारत में कितनी ऋतुएँ होती हैं?
उत्तर

भारत में छह ऋतुएँ होती हैं। ये हैं — वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर। प्रत्येक ऋतु लगभग दो महीने की होती है और छहों मिलकर एक पूरा वर्ष बनाती हैं।

एक वर्ष वसंत मार्च–अप्रैल ग्रीष्म मई–जून वर्षा जुलाई–अगस्त शरद सितंबर–अक्तूबर हेमंत नवंबर–दिसंबर शिशिर जनवरी–फरवरी वृत्त में घूमते जाइए और आप वहीं लौट आएँगे जहाँ से चले थे।
भारत की छह ऋतुएँ, क्रम से। शिशिर समाप्त होते ही वसंत फिर आरंभ हो जाता है — यही वर्ष की लय है।
चार नहीं, छह क्यों: बहुत-से देशों में केवल चार ऋतुओं के नाम हैं। भारत में छह इसलिए हैं क्योंकि हमारे वर्ष में सचमुच छह स्पष्ट रूप से अलग मौसम आते हैं। हमारे यहाँ एक लंबी, अलग वर्षा ऋतु होती है जो अनेक ठंडे देशों में होती ही नहीं, और हमारी ठंड दो चरणों में आती है — पहले हलकी, ओस भरी हेमंत और फिर तीखी, कोहरे भरी शिशिर। इन्हें अलग नाम देने से भारत का वर्ष अधिक ठीक-ठीक बताया जा सकता है।
क्या आप जानते हैं? पृथ्वी का सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान मेघालय का मॉसिनराम भी भारत में है और सबसे शुष्क स्थानों में से एक राजस्थान का थार मरुस्थल भी। दोनों एक ही देश में हैं और दोनों में वही छह ऋतुएँ आती हैं, पर वे बिलकुल अलग अनुभव होती हैं।
प्र2.
तालिका भरिए — ऋतु / वर्ष के महीने (अपने क्षेत्र के अनुसार इसे भरिए)।
ऋतुवर्ष के महीने
(अपने क्षेत्र के अनुसार इसे भरिए)
वसंत 
ग्रीष्म 
वर्षा 
शरद 
हेमंत 
शिशिर 
पृष्ठ 156 पर छपी खाली तालिका।
उत्तर

प्रत्येक ऋतु लगभग दो महीने की होती है। नीचे उत्तर तथा मध्य भारत के अधिकांश भागों का सामान्य क्रम दिया है। आपके क्षेत्र में यह कुछ सप्ताह आगे या पीछे हो सकता है, इसलिए अपनी पुस्तक में लिखने से पहले शिक्षक और बड़ों से पूछ लीजिए।

ऋतुवर्ष के महीने (नमूना उत्तर)कैसा लगता है
वसंतफरवरी के मध्य से अप्रैल के मध्य तक (मार्च – अप्रैल)सुहावने दिन, ठंडी सुबहें। फूल खिलते हैं, नई पत्तियाँ आती हैं, कोयल बोलती है।
ग्रीष्मअप्रैल के मध्य से जून के मध्य तक (मई – जून)बहुत गर्मी और सूखापन। लंबे दिन, लू, सूखते तालाब।
वर्षाजून के मध्य से अगस्त के मध्य तक (जुलाई – अगस्त)भारी वर्षा, बादल भरा आकाश, चिपचिपी हवा। सब कुछ हरा हो जाता है।
शरदअगस्त के मध्य से अक्तूबर के मध्य तक (सितंबर – अक्तूबर)वर्षा रुक जाती है, आकाश साफ़ नीला हो जाता है, फ़सल पककर कट जाती है।
हेमंतअक्तूबर के मध्य से दिसंबर के मध्य तक (नवंबर – दिसंबर)ठंडी और शुष्क हवा, सुबह ओस, दिन छोटे होते जाते हैं।
शिशिरदिसंबर के मध्य से फरवरी के मध्य तक (जनवरी – फरवरी)सबसे ठंडे सप्ताह, कोहरा और पाला, नंगे वृक्ष, लंबी रातें।

कुछ क्षेत्रों में यह क्रम काफ़ी अलग है —

क्षेत्रवहाँ वर्ष कैसे चलता है
केरल और पश्चिमी तटवर्षा जल्दी आती है — लगभग जून के पहले सप्ताह में — और अक्तूबर-नवंबर में दूसरी बार भी होती है। शीत ऋतु केवल हलकी ठंडक भर होती है।
कश्मीर घाटीशीत ऋतु लंबी और हिमपात वाली होती है, नवंबर से मार्च तक। वसंत देर से, अप्रैल में आता है, जब बादाम और चेरी के वृक्ष खिलते हैं।
राजस्थान (थार मरुस्थल)ग्रीष्म बहुत लंबी और तपती हुई। वर्षा कम समय की और बहुत थोड़ी। शीत ऋतु की रातें आश्चर्यजनक रूप से ठंडी।
तमिलनाडुमुख्य वर्षा जून-जुलाई में नहीं, अक्तूबर-दिसंबर में लौटती हुई हवाओं से होती है।
असम और पूर्वोत्तरवर्षा जल्दी आरंभ होकर बहुत लंबी चलती है; अप्रैल-मई में भी खूब वर्षा होती है।
महीने केवल लगभग क्यों बताए जाते हैं: ऋतुएँ किसी निश्चित तारीख़ से आरंभ नहीं होतीं, जैसे विद्यालय का सत्र होता है। वे एक-दूसरे में घुलती-मिलती हैं। मानसून पहले केरल पहुँचता है और पूरे देश में फैलने में लगभग एक महीना लेता है, इसलिए केरल का जुलाई और पंजाब का जुलाई एक जैसे नहीं होते। इसीलिए पुस्तक कहती है — “अपने क्षेत्र के अनुसार इसे भरिए”।
वास्तविक जीवन से जाँचिए: पता कीजिए कि विद्यालय गर्मी की छुट्टियाँ कब घोषित करता है, पिछले वर्ष पहली तेज़ बारिश कब हुई थी और ऊनी कपड़े कब निकाले गए थे। ये तीन तिथियाँ आपके क्षेत्र की ऋतुएँ किसी भी पुस्तक से बेहतर बता देंगी।
क्या यह उपयोगी रहा?