नहीं — वर्षभर केवल एक ही ऋतु रहना अच्छा नहीं होगा, चाहे वह हमें कितनी ही प्रिय क्यों न हो। प्रत्येक ऋतु हमें कुछ ऐसा देती है जो दूसरी नहीं दे सकती, और परिवर्तन ही वह चीज़ है जो सब कुछ जीवित और बढ़ता हुआ रखती है।
नमूना उत्तर: ऋतु बदलने पर मुझे बहुत उत्साह होता है। लंबी गर्मी के बाद पहली वर्षा की गंध बहुत अच्छी लगती है और सब बाहर दौड़ पड़ते हैं। पहली ठंडी सुबह का अर्थ है रज़ाई और गजक। सर्दी के बाद पहला गुनगुना दिन आते ही मैं बिना स्वेटर के बाहर जा सकता हूँ। पर मैं नहीं चाहूँगा कि कोई एक ऋतु पूरे वर्ष बनी रहे। यदि बारह महीने गर्मी रहे तो तालाब और कुएँ सूख जाएँगे, फ़सलें जल जाएँगी और पीने का पानी ही नहीं बचेगा। यदि वर्षभर वर्षा हो तो फ़सलें खेत में ही सड़ जाएँगी और सड़कों पर पानी भरा रहेगा। यदि वर्षभर सर्दी रहे तो कुछ भी नहीं पकेगा और आम तो मिलेंगे ही नहीं। मुझे ऋतुएँ इसलिए अच्छी लगती हैं क्योंकि हर ऋतु अपना फल, अपना पर्व और अपना आनंद लाती है — और कुछ महीने बाद मैं अगली ऋतु के लिए तैयार हो जाता हूँ।
| यदि यही ऋतु वर्षभर रहे… | क्या अच्छा लगेगा | क्या बिगड़ जाएगा |
|---|---|---|
| ग्रीष्म | लंबे दिन, छुट्टियाँ, आम, तैरना | तालाब और कुएँ सूख जाएँगे। फ़सलें नष्ट हो जाएँगी। पीने, पकाने और खेती के लिए पानी नहीं बचेगा। |
| वर्षा | चारों ओर हरियाली, भरपूर पानी, गर्मी नहीं | फ़सलें सड़ जाएँगी। बाढ़ रुकेगी ही नहीं। कपड़े कभी नहीं सूखेंगे। गंदे पानी से होने वाले रोग बढ़ जाएँगे। |
| शीत | ठंडी हवा, पसीना नहीं, अच्छी नींद | धान और आम को गर्मी चाहिए — वे होंगे ही नहीं। निर्धन लोगों को ठंड में बहुत कष्ट होगा। कोहरे से रेल और बसें रुक जाएँगी। |