प्र1.
केरल की शीत ऋतु कश्मीर की शीत ऋतु से अलग होती है। असम की वर्षा ऋतु राजस्थान की वर्षा ऋतु से अलग होती है। आपको क्या लगता है, ऐसा क्यों होता है?
उत्तर
क्योंकि भारत बहुत बड़ा देश है, और किसी स्थान का मौसम इस पर निर्भर करता है कि वह स्थान कहाँ है — भूमध्य रेखा से कितना दूर, कितनी ऊँचाई पर, समुद्र से कितना पास, और उसके आस-पास पर्वत हैं या नहीं। ऋतु वही है; स्थान अलग है।
शीत ऋतु अलग क्यों होती है —
- भूमध्य रेखा से दूरी। केरल भूमध्य रेखा के पास है, जहाँ वर्षभर सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं। कश्मीर बहुत उत्तर में है, जहाँ किरणें तिरछी पड़ती हैं और बहुत कम गर्मी देती हैं।
- समुद्र तल से ऊँचाई। कश्मीर घाटी पर्वतों के बीच ऊँचाई पर है। जितनी ऊँचाई, उतनी ठंड। केरल समुद्र तल पर है।
- समुद्र की निकटता। केरल के एक ओर समुद्र है। जल धीरे गर्म होता है और धीरे ठंडा होता है, इसलिए समुद्र तट का मौसम संतुलित रखता है — न बहुत गर्म, न बहुत ठंडा। कश्मीर के पास कोई समुद्र नहीं है।
- हिमालय। शीत ऋतु में कश्मीर घाटी के चारों ओर के पर्वतों पर हिम गिरता है और उस हिम की ठंडी हवा घाटी में बैठ जाती है। केरल के आस-पास कहीं हिम नहीं है।
वर्षा ऋतु अलग क्यों होती है —
- मानसूनी हवाएँ बंगाल की खाड़ी के ऊपर से बहते हुए बहुत सारी जलवाष्प अपने साथ ले लेती हैं।
- वे सबसे पहले असम और पूर्वोत्तर पहुँचती हैं, जब वे नमी से भरी होती हैं।
- वहाँ की पहाड़ियाँ हवा को ऊपर चढ़ने पर विवश करती हैं। ऊपर उठती हवा ठंडी हो जाती है और ठंडी हवा अपनी नमी सँभाल नहीं पाती — इसलिए वहीं भारी वर्षा हो जाती है। असम के पास मेघालय का मॉसिनराम पृथ्वी का सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान है।
- राजस्थान तक पहुँचते-पहुँचते ये हवाएँ बहुत दूर स्थल पर चल चुकी होती हैं और अपनी अधिकांश नमी खो चुकी होती हैं।
- राजस्थान समुद्र से बहुत दूर, देश के भीतर है, और अरावली पहाड़ियाँ हवाओं के मार्ग के आर-पार नहीं, बल्कि उनके साथ-साथ फैली हैं, इसलिए वे हवा को ऊपर उठने पर विवश नहीं करतीं।
- परिणाम है थार मरुस्थल — भारत के सबसे शुष्क स्थानों में से एक।
| कश्मीर घाटी (शीत ऋतु) | केरल (शीत ऋतु) | |
|---|---|---|
| कितनी ठंड | हाड़ कँपाने वाली; कई रातों में तापमान शून्य से नीचे | केवल थोड़ी ठंडक, लगभग 22–28 °C |
| हिम | खूब हिमपात | कभी हिम नहीं गिरती |
| वस्त्र | फ़िरन, भारी ऊनी वस्त्र, गर्मी के लिए कांगड़ी | वर्ष के बाकी दिनों जैसे ही सूती वस्त्र |
| वृक्ष | चिनार आदि वृक्ष नंगे खड़े रहते हैं | नारियल के वृक्ष वर्षभर हरे रहते हैं |
| असम (वर्षा ऋतु) | राजस्थान (वर्षा ऋतु) | |
|---|---|---|
| वर्षा | महीनों तक बहुत भारी | कुछ ही दिनों में थोड़ी-सी |
| नदियाँ | ब्रह्मपुत्र उफनकर बाढ़ ले आती है | नाले थोड़े समय भरते हैं और फिर सूख जाते हैं |
| भूमि | हरी, गीली, घने वन और चाय के बाग़ान | रेतीली, सूखी, काँटेदार झाड़ियाँ |
| खेती | धान, जिसे बहुत पानी चाहिए | बाजरा और ज्वार, जिन्हें बहुत कम पानी चाहिए |
इन सबके पीछे का विचार: ऋतु मौसम का वह परिवर्तन है जो पूरे देश पर आता है, पर जिस भूमि पर वह पहुँचता है वह हर जगह अलग है। ऊँची भूमि ठंडी होती है। समुद्र के पास की भूमि संतुलित रहती है। पर्वत के पीछे की भूमि को वर्षा कम मिलती है। इसीलिए जो मानसून चेरापूँजी को डुबो देता है वही जैसलमेर पर केवल छींटे डालता है — और दोनों जगह वर्षा ऋतु ही चल रही होती है।
अपने स्थान की बात कीजिए: चर्चा में अपने नगर की तुलना उस स्थान से कीजिए जहाँ आपका कोई संबंधी रहता है। पूछिए — “वहाँ मई में अधिक गर्मी पड़ती है या कम? वर्षा अधिक होती है या कम? ऐसा क्यों?” और ऊपर बताए चार कारणों से उत्तर समझाइए।