कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 9 ऋतुओं का उत्सव के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
भारत में ऋतुओं से जुड़े कई गीत गाए जाते हैं। क्या आप ऐसे किसी गीत के विषय में जानते हैं? कुछ गीतों के विषय में पता कीजिए।
उत्तर

हाँ — भारत के लगभग हर भाग में ऋतुओं के गीत हैं, विशेषकर वर्षा और वसंत के। अपनी दादी-नानी, संगीत के शिक्षक और पड़ोसियों से पूछिए और कम-से-कम तीन गीत लिख लीजिए।

इन्हें कैसे खोजें —

  1. घर के सबसे बुज़ुर्ग व्यक्ति से कहिए कि बचपन में सीखा हुआ कोई गीत सुनाएँ।
  2. संगीत के शिक्षक से पूछिए कि विद्यालय के कार्यक्रमों में कौन-से ऋतु-गीत गाए जाते हैं।
  3. पर्वों के समय ध्यान से सुनिए — तीज, होली और बिहू के गीत सब ऋतु-गीत ही हैं।
  4. गीत की पहली दो पंक्तियाँ, उसकी ऋतु का नाम और यह लिखिए कि आपको किसने सिखाया।
ऋतुकिस प्रकार के गीतभारत के भिन्न भागों के उदाहरण
वर्षावर्षा और झूले के गीत, जो स्त्रियाँ वृक्षों पर पड़े झूलों पर गाती हैंउत्तर प्रदेश और बिहार के कजरी तथा झूला गीत; वर्षा के लिए गाया जाने वाला राग मल्हार; राजस्थान के तीज गीत; पंजाबी के बरसात-गीत
वसंतफूलों, रंगों और नए आरंभ के गीतब्रज क्षेत्र के होरी और फाग; वसंत पंचमी पर गाए जाने वाले बसंत गीत; बंगाल में रवींद्रनाथ ठाकुर के वसंत-गीत
शरद / उपजफ़सल कटने के बाद कृतज्ञता के गीतअसम के बिहू गीत; बैसाखी पर पंजाब के भांगड़ा और गिद्धा गीत; पोंगल और ओणम पर गाए जाने वाले उपज-गीत
शिशिरअलाव और पर्व के गीतपंजाब के लोहड़ी गीत, जैसे दुल्ला भट्टी वाला प्रसिद्ध गीत, जो आग के चारों ओर गाया जाता है
ऋतुएँ गीत क्यों बन गईं: समाचार-पत्र और मौसम की भविष्यवाणी से बहुत पहले, गीत ही वह तरीका था जिससे लोग याद रखते थे कि कब बोना है, कब काटना है और कब उत्सव मनाना है। पहली वर्षा का गीत गाना मिलकर आकाश देखने का ही एक ढंग है। इसीलिए इनमें से लगभग हर गीत में कोई फ़सल, कोई वृक्ष या कोई पक्षी भी आता है।
कक्षा में यह कीजिए: प्रत्येक विद्यार्थी एक गीत लाए। उन्हें ऋतुओं के क्रम में गाइए — वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शीत — और आपने गाते-गाते पूरा वर्ष पार कर लिया होगा।
प्र2.
अपने शिक्षक की और बड़ों की सहायता से यह जानने का प्रयास कीजिए कि आपके क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु और शीत ऋतु में उगने वाली फ़सलें कौन-सी हैं? नीचे दी गई तालिका भरिए।
ग्रीष्मकालीन फसलेंशीतकालीन फसलें
  
  
  
  
पृष्ठ 157 पर छपी खाली तालिका।
उत्तर

किसी किसान से पूछिए, या सब्ज़ी बाज़ार में देखिए कि इस समय कौन-सी सब्ज़ियाँ आ रही हैं। नीचे उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र का नमूना उत्तर है। अपने क्षेत्र की फ़सलें स्वयं भरिए।

ग्रीष्मकालीन फसलेंशीतकालीन फसलें
धान — पहली वर्षा के साथ बोया जाता हैगेहूँ
मक्कासरसों
बाजरा और ज्वारचना और मटर
कपास और गन्नाआलू, गाजर, मूली और शलजम
तरबूज़, खरबूजा और खीरापालक, मेथी, सरसों का साग और धनिया
क्षेत्रवहाँ क्या उगाया जाता है
पंजाब और हरियाणावर्षा में धान; शीत ऋतु में गेहूँ और सरसों
राजस्थानवर्षा में बाजरा, ज्वार और मोठ; शीत ऋतु में चना और सरसों — सभी कम पानी वाली फ़सलें
केरल और तटीय कर्नाटकधान, नारियल, केला, काली मिर्च और कसावा — गर्म और नम मौसम में लगभग वर्षभर
असम और पश्चिम बंगालवर्षा में धान, जूट और चाय; शीत ऋतु में आलू और सरसों
महाराष्ट्र और गुजरातवर्षा में कपास, ज्वार और मूँगफली; शीत ऋतु में गेहूँ, चना और प्याज़
कोई फ़सल किसी ऋतु की क्यों होती है: हर पौधे की अपनी ज़रूरत होती है। धान को पानी में खड़ा रहना पड़ता है, इसलिए वह वर्षा आते ही बोया जाता है। गेहूँ को दाना भरते समय ठंडा मौसम चाहिए और पकते समय गर्म, शुष्क दिन, इसलिए वह नवंबर में बोया और मार्च में काटा जाता है। खरबूजे-तरबूज़ को तेज़ धूप और शुष्क गर्मी चाहिए, इसलिए वे ग्रीष्म में उगाए जाते हैं। ग़लत ऋतु में बोई गई फ़सल या तो सूख जाती है या सड़ जाती है — इसीलिए किसान ऋतुओं पर सबसे अधिक ध्यान देता है।
दो शब्द जो आप सुनेंगे: वर्षा के साथ बोई और शरद में काटी जाने वाली फ़सलें खरीफ़ कहलाती हैं। वर्षा के बाद बोई और वसंत में काटी जाने वाली फ़सलें रबी कहलाती हैं। किसी किसान से पूछिए, वह तुरंत ये दोनों शब्द बोलेगा।
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