मल्हार अध्याय 8 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “रीना आंटी की एक बिटिया थी— अनु” — ‘बिटिया’ का अर्थ है ‘बेटी’। बेटी को प्यार से बुलाने के लिए और स्नेह जताने के लिए ‘बिटिया’ शब्द का प्रयोग भी किया जाता है। ‘बिटिया’ जैसा ही एक अन्य शब्द ‘बिट्टो’ भी है। आपके घर में आपको प्यार से किन-किन नामों से पुकारा जाता है?
उत्तर

यह आपके अपने घर से जुड़ा प्रश्न है, इसलिए इसका उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। पहले यह समझ लीजिए कि प्यार के नाम बनते कैसे हैं —

बनने का ढंगउदाहरण
असली नाम को छोटा कर देनासुरेंद्र → सुरी; कविता → कवि; अभिषेक → अभि; रुक्मिणी → रुक्मी
नाम को दुहरा देनामीना → मीनू-मीनू; गोलू-मोलू; टीना-मीना
रिश्ते का ही प्यार-भरा रूपबेटी → बिटिया, बिट्टो, बिटिया रानी; बेटा → बेटवा, बबुआ, लल्ला
गुण या आदत से बना नामगोलू (गोल-मटोल), चीकू, लाडो, राजा बेटा, नन्ही
अपनी बोली का शब्दभोजपुरी में ‘बबुनी’, अवधी में ‘गुड्डो’, मराठी में ‘बाळ’, बांग्ला में ‘खोका/खुकी’, असमिया में ‘बापु/माजोनी’

नमूना उत्तर:

“मेरा नाम अनुराधा है, पर घर पर मुझे कोई इस नाम से नहीं बुलाता। माँ मुझे ‘अनु’ कहती हैं और जब बहुत प्यार आता है तो ‘बिटिया रानी’। पापा मुझे ‘गुड़िया’ कहते हैं। दादी मुझे अपनी बोली में ‘लाडो’ पुकारती हैं, और मेरा छोटा भाई मुझे ‘दीदू’ कहता है। मुझे ‘लाडो’ सबसे अच्छा लगता है, क्योंकि यह नाम केवल दादी के मुँह से निकलता है और इसे सुनते ही लगता है कि कोई मुझे बहुत चाहता है।”

अच्छे उत्तर में यह ज़रूर हो: (1) आपके सारे प्यार-भरे नाम, (2) कौन-सा नाम कौन बुलाता है, और (3) आपको कौन-सा सबसे अच्छा लगता है और क्यों। तीसरी बात ही उत्तर को आपका अपना बनाती है।
प्र2.
(ख) आपके नाम का क्या अर्थ है? आपका नाम किसने रखा? पता करके बताइए।
उत्तर

यह पता लगाने वाला काम है। इसे तीन चरणों में कीजिए —

  1. घर में पूछिए — माँ, पिता, दादा-दादी या नाना-नानी से पूछिए कि नाम किसने चुना, किस दिन रखा गया और क्यों यही नाम चुना गया। कई घरों में नामकरण की एक छोटी-सी कहानी होती है।
  2. अर्थ खोजिए — हिंदी शब्दकोश में देखिए। अधिकतर भारतीय नाम संस्कृत, अरबी-फ़ारसी या स्थानीय बोलियों से आते हैं और उनका कोई न कोई सुंदर अर्थ होता है।
  3. लिखिए — नाम, अर्थ, किसने रखा, क्यों रखा — चारों बातें एक साथ।
नामअर्थनामअर्थ
अनुअनुराधा — एक नक्षत्र का नाम; ‘अनु’ का अर्थ ‘पीछे चलने वाला, साथी’आरवमधुर ध्वनि, संगीत
रीनाशुद्ध, स्वच्छदीपिकाछोटा दीपक, प्रकाश देने वाली
जयाविजय पाने वालीइशानसूर्य, दिशा का स्वामी
शिवेंद्रशिव + इंद्र — कल्याणकारी और श्रेष्ठसनाप्रशंसा, स्तुति

नमूना उत्तर:

“मेरा नाम दीपिका है। इसका अर्थ है — ‘छोटा दीपक’ या ‘प्रकाश फैलाने वाली’। यह नाम मेरी दादी ने रखा था। वे बताती हैं कि मेरा जन्म दीपावली से दो दिन पहले हुआ था, जब घर की छत पर दीपों की कतार सजी थी। उन्होंने कहा — ‘यह हमारे घर का दीपक है, इसका नाम दीपिका ही होगा।’ मुझे अपना नाम अच्छा लगता है, क्योंकि इसके साथ एक कहानी जुड़ी है।”

यह गतिविधि क्यों दी गई है: नाम केवल पुकारने का शब्द नहीं होता। उसमें परिवार की भाषा, उसका धर्म-विश्वास, उसका इलाक़ा और कभी-कभी उस दिन की कोई घटना छिपी होती है। अपने नाम का अर्थ जान लेना अपनी जड़ों को जानने का पहला क़दम है।
प्र3.
(ग) “वे एक साथ खेल रहे थे” — आप कौन-कौन से खेल अपने मित्रों के साथ मिलकर खेलते हैं? बताइए।
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। ध्यान दीजिए कि पाठ में अनु और एंजेला ने कोई महँगा खेल नहीं खेला — उन्होंने राम और रावण बनकर लकड़ी के तीर-कमान से खेला। “वे एक साथ खेल रहे थे, उस कूद-फाँद और लड़ाई का कोई अंत नहीं था।” यानी सबसे अच्छे खेल वे होते हैं जिनमें कल्पना हो और साथी हों।

खेल का प्रकारउदाहरणक्या चाहिए
दौड़-भाग वालेकबड्डी, खो-खो, पकड़म-पकड़ाई, आइस-पाइस (छुपा-छुपी), लंगड़ी टाँग, रस्साकशीखुला मैदान, कुछ साथी
गेंद वालेक्रिकेट, फ़ुटबॉल, पिट्ठू (सतोलिया), वॉलीबॉलएक गेंद
बैठकर खेले जाने वालेगिट्टे, कंचे, साँप-सीढ़ी, लूडो, शतरंज, अंत्याक्षरी, नाम-जगह-जानवर-चीज़बहुत कम सामान
कल्पना वालेघर-घर, डॉक्टर-मरीज़, दुकान-दुकान, स्कूल-स्कूल, और अनु-एंजेला जैसा राम-रावण का खेलसिर्फ़ कल्पना
ज़मीन पर बनाकरस्टापू (किट-किट), गोटी, चिड़िया उड़एक चॉक या पत्थर

नमूना उत्तर:

“मैं अपने मित्रों के साथ सबसे ज़्यादा पिट्ठू और खो-खो खेलती हूँ। शाम को हम गली में सात चपटे पत्थर जमाकर पिट्ठू खेलते हैं — गेंद मारकर ढेर गिराना और फिर पकड़े जाने से पहले उसे दोबारा जमाना। छुट्टी के दिन हम घर-घर भी खेलते हैं, जिसमें कोई माँ बनता है, कोई मेहमान। बारिश में जब बाहर नहीं जा पाते तो हम नाम-जगह-जानवर-चीज़ खेलते हैं। मुझे पिट्ठू सबसे अच्छा लगता है, क्योंकि उसमें पूरी टीम को एक साथ दौड़ना पड़ता है और जीत किसी एक की नहीं होती।”

बताते समय यह भी जोड़िए: खेल का नाम, वह कैसे खेला जाता है, कितने साथी चाहिए, और आपको वही खेल क्यों पसंद है। इससे आपका उत्तर सूची न रहकर एक छोटा-सा वर्णन बन जाएगा — ठीक वैसा ही, जैसा इस पाठ की लेखिका ने बिहू का किया है।
प्र4.
(घ) “असम में नृत्य की भी एक समृद्ध परंपरा है।” — आपने इस पाठ में बिहू और सत्रिया नृत्यों के बारे में तो पढ़ा है। आपके प्रांत में कौन-कौन से नृत्य प्रसिद्ध हैं? आपको कौन-सा नृत्य करना पसंद है?
उत्तर

पहले अपने प्रांत के नृत्य पता कीजिए — घर के बड़ों से, शिक्षक से या पुस्तकालय से। नीचे कुछ राज्यों के प्रसिद्ध नृत्य दिए गए हैं; इनमें से अपना राज्य ढूँढ़िए।

राज्य / प्रदेशप्रसिद्ध लोक नृत्यशास्त्रीय नृत्य
असमबिहू, बगुरुंबा, झुमुरसत्रिया
पंजाबभांगड़ा, गिद्दा
गुजरातगरबा, डांडिया रास
राजस्थानघूमर, कालबेलिया, भवाई
उत्तर प्रदेशराई, चरकुला, धोबियाकथक
महाराष्ट्रलावणी, कोली, तमाशा
ओडिशाछऊ, गोटीपुआओडिसी
तमिलनाडुकुम्मी, कोलाट्टम, करगट्टमभरतनाट्यम
केरलथेय्यम, कैकोट्टिकलीकथकली, मोहिनीअट्टम
आंध्र प्रदेशवीरनाट्यम, धीमसाकुचिपुड़ी
मणिपुरथांग-ता, लाई हराओबामणिपुरी
झारखंड / छत्तीसगढ़छऊ, पाइका / पंथी, ककसार
जम्मू-कश्मीर / हिमाचलरौफ़, कुड़ / नाटी
पश्चिम बंगालछऊ, बाउल, गंभीरा

नमूना उत्तर:

“मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ। हमारे प्रांत में घूमर सबसे प्रसिद्ध नृत्य है, जिसमें स्त्रियाँ घेरदार घाघरा पहनकर गोल घेरे में घूमती हैं। इसके अलावा कालबेलिया और भवाई भी बहुत प्रसिद्ध हैं — भवाई में तो नर्तकी सिर पर कई मटके रखकर नाचती है। तीज-गणगौर और विवाह के अवसर पर हमारे यहाँ घूमर ज़रूर होता है। मुझे घूमर करना सबसे अच्छा लगता है, क्योंकि इसमें ताली और घूमने का ताल बहुत जल्दी सीखा जा सकता है और सब मिलकर करते हैं। जैसे असम के लोग बिहू में बसंत का स्वागत करते हैं, वैसे ही हम घूमर से त्योहार का स्वागत करते हैं।”

ध्यान दीजिए: प्रश्न दो हिस्सों में है — पहले प्रांत के प्रसिद्ध नृत्य गिनाइए, फिर बताइए आपको कौन-सा करना पसंद है और क्यों। दूसरे हिस्से का उत्तर देना मत भूलिए, यही आपका अपना उत्तर है।
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