मल्हार अध्याय 8 अनुमान या कल्पना से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “बिहू नृत्य और इसके उत्सव से अचंभित एंजेला और उसके परिवार ने इसके साथ-साथ लजीज पकवानों का पूरा आनंद लिया।” — एंजेला और उसका परिवार बिहू नृत्य और उसके उत्सव को देखकर अचंभित क्यों हो गया?
उत्तर

वे इसलिए अचंभित हुए क्योंकि उन्होंने जीवन में ऐसा कुछ पहले कभी नहीं देखा था। लंदन में उत्सव प्रायः बंद हॉल में, टिकट लेकर, कुर्सियों पर बैठकर देखे जाते हैं। यहाँ पूरा गाँव खुले आसमान के नीचे, एक पेड़ के तले इकट्ठा था और सब अपने ही आनंद के लिए नाच रहे थे।

पाठ के आधार पर अचंभे के पाँच कारण —

  • अपार भीड़ और खुला मंच — “वहाँ एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे मंच बनाया गया था… एंजेला ने एक पेड़ के नीचे एक साथ इतने लोगों को पहले कभी नहीं देखा था।”
  • माहौल का जादू — “वहाँ आस-पास उत्सव जैसा माहौल देखकर वह हतप्रभ थी।” उसे लगा जैसे वह टाइम-मशीन में या सपनों की दुनिया में आ बैठी हो।
  • रंग और पोशाक — लड़कियों की “लाल और बादामी रंग की गहरी डिजाइन वाली खूबसूरत पोशाक” और लड़कों के हाथ में वाद्ययंत्र। “वे सभी काफ़ी रंगीन और मस्त लग रहे थे।”
  • नाचने वालों की मस्ती — “उनका हिलता-डुलता शरीर, हाथ-पैर की हलचल से समझ आ रहा था कि वे मौज-मस्ती के नृत्य में खोए हुए हैं।”
  • लजीज पकवान — नृत्य के साथ-साथ मिले असमिया पकवान, जिनका स्वाद उनके लिए बिलकुल नया था।

सबसे गहरा कारण यह है कि एंजेला के लिए यह कहानी का सच हो जाना था। पाठ के आरंभ में ही लिखा है — “उसे ऐसी कहानियों का पात्र बनने में मज़ा आता था, जिनमें दूर-दराज़ की दुनिया का जिक्र हो… उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि जल्दी ही यात्राओं की उसकी ये कहानियाँ सच साबित होने वाली हैं।” कल्पना का सच में बदल जाना — इससे बड़ा अचंभा और क्या होगा!

प्र2.
(ख) “जब तक एंजेला कुछ समझ पाती, तब तक वह लंदन से नई दिल्ली होते हुए गुवाहाटी की उड़ान पर थी।” — एंजेला और उसकी माँ एलेसेंड्रा ने भारत की यात्रा से पहले कौन-कौन सी तैयारियाँ की होंगी?
उत्तर

पाठ में दो तैयारियों का ज़िक्र सीधे मिलता है — बाक़ी हमें अनुमान से जोड़नी हैं। इसीलिए यह गतिविधि ‘अनुमान या कल्पना से’ के नीचे रखी गई है।

पाठ में लिखी हुई तैयारियाँ —

  • माँ ने एंजेला के स्कूल से छुट्टी बढ़वाई — “उन्होंने एंजेला के स्कूल से उसकी बसंत की छुट्टियों को एक हफ़्ते और बढ़ाने की अनुमति ले ली, जिससे एंजेला और उसके पिता ब्रायन भी उनके साथ जा सकें।”
  • सबने जल्दी-जल्दी सामान बाँधा — “वे सभी जल्दी ही तैयार हो गए।” यात्रा की योजना इतनी जल्दबाज़ी में बनी थी कि एंजेला हैरान रह गई।

अनुमान से जोड़ी जाने वाली तैयारियाँ —

किसनेक्या तैयारी की होगीक्यों ज़रूरी थी
माँ एलेसेंड्रापासपोर्ट और भारत का वीज़ा बनवाना; लंदन–नई दिल्ली–गुवाहाटी की हवाई टिकटें बुक कराना; गुवाहाटी के होटल में कमरा आरक्षित कराना।दूसरे देश में जाने के लिए ये काग़ज़ अनिवार्य हैं, और उनके पास केवल एक महीना था।
माँ (फ़िल्म के लिए)कैमरा, ट्राइपॉड, माइक, बैटरियाँ, मेमोरी कार्ड जुटाना; असम में किन-किन लोगों से मिलना है, उनकी सूची बनाना; सत्र में ठहरने और रीना सेन के घर रुकने की बात पक्की करना; फ़िल्मांकन की अनुमति लेना।डॉक्यूमेंट्री का काम बिना पूर्व-योजना के एक महीने में पूरा नहीं हो सकता था।
माँ (जानकारी)असम, बिहू और सत्रिया के बारे में पहले से पढ़ना।तभी तो वे रास्ते भर एंजेला को असम के बारे में बता पा रही थीं।
एंजेलाअप्रैल के असम के मौसम के अनुसार हल्के कपड़े रखना; स्कूल का छूटा हुआ काम पूरा करने की योजना; अपने दोस्त जेम्स और कीरा को बताना; भारत के बारे में — ताजमहल आदि के बारे में — पढ़ना।उसे तो पहले से ही ताजमहल वाली कहानियों से प्यार था।
पिता ब्रायनअपने काम से छुट्टी लेना और घर बंद करने की व्यवस्था करना।वे भी साथ जा रहे थे।
उत्तर लिखते समय: पहले वे दो बातें लिखिए जो पाठ में सचमुच लिखी हैं, फिर लिखिए “इसके अलावा उन्होंने यह भी किया होगा…”। इस तरह आपका उत्तर तथ्य और कल्पना दोनों दिखाएगा, और यही इस गतिविधि का उद्देश्य है।
प्र3.
(ग) “वहाँ एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे मंच बनाया गया था।” — बिहू नृत्य के लिए बरगद के पेड़ के नीचे मंच क्यों बनाया गया होगा?
उत्तर

इसके कई कारण हो सकते हैं। सबसे मज़बूत कारण यह है कि बिहू गाँव का, सबका त्योहार है — इसलिए उसका मंच भी ऐसी जगह बनेगा जहाँ पूरा गाँव बिना टिकट, बिना बुलावे के आ सके। और गाँव में ऐसी जगह बरगद का पेड़ ही होता है।

कारणसमझाइए
1. बरगद सबसे बड़ी छाया देता हैअप्रैल में असम में धूप और गरमी दोनों होती हैं। बरगद की फैली हुई डालें एक साथ सैकड़ों लोगों को छाया दे देती हैं — “वह जगह लोगों से भरी हुई थी।”
2. गाँव की चौपाल वहीं होती हैभारत के गाँवों में बरगद या पीपल का पेड़ ही मिलने-बैठने की परंपरागत जगह है। वहाँ मंच बनाने से किसी को बताना नहीं पड़ता कि कार्यक्रम कहाँ है।
3. जगह बड़ी और खुली होती हैपेड़ के चारों ओर मैदान होता है, इसलिए मंच के सामने बहुत लोग बैठ सकते हैं और नाचने वालों को भी जगह मिल जाती है।
4. बिहू खेती और प्रकृति का त्योहार हैजो त्योहार फ़सल और बसंत के आने की खुशी में मनाया जाता हो, उसका मंच कमरे में नहीं, पेड़ के नीचे ही सजना चाहिए। यहाँ पेड़ स्वयं उत्सव का हिस्सा बन जाता है।
5. बरगद पूजनीय और शुभ माना जाता हैभारत में बरगद को लंबी आयु और शुभता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए मंगल-कार्य उसके नीचे करना शुभ समझा जाता है।
6. कोई ख़र्च नहींप्राकृतिक छत मिल गई तो न पंडाल लगाना पड़ा, न बिजली का बड़ा इंतज़ाम — गाँव का त्योहार गाँव के साधनों से ही मन गया।
इसी से पाठ की एक और बात खुलती है: इसी खुले, प्राकृतिक मंच के कारण एंजेला को लगा कि वह “किसी टाइम-मशीन में आकर बैठ गई हो” — क्योंकि वहाँ आधुनिक कुछ भी नहीं था। यदि वही नृत्य किसी चमचमाते सभागार में होता, तो शायद यह अनुभव ही न होता। मंच की जगह ने ही अनुभव को इतना अनोखा बना दिया।
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