प्र1.
इस पाठ में अनेक शब्द ऐसे हैं जो असम से विशेष रूप से जुड़े हैं। अपने समूह में मिलकर उन शब्दों की पहचान कीजिए। इसके बाद उन्हें नीचे दिए गए स्थान पर लिखिए— (संकेत— असम के नृत्य, त्योहार, भाषा आदि।)
उत्तर
पुस्तक में ‘असम’ लिखा एक सूरज बना है और उससे निकलती छह किरणें छह ख़ाली बादलों तक जाती हैं। हर बादल में असम से जुड़ा एक शब्द भरना है। पाठ में से चुने गए छह सबसे उपयुक्त शब्द ये हैं —
| बादल | शब्द | यह किस प्रकार का शब्द है | पाठ में कहाँ आया है |
|---|---|---|---|
| 1 | बिहू | त्योहार तथा नृत्य | “बसंत के आने की खुशी में वे सभी एक त्योहार मनाते हैं, जिसे ‘बिहू’ कहा जाता है।” |
| 2 | सत्रिया | नृत्य (शास्त्रीय) | “वे सभी… सत्रिया नृत्य का फ़िल्मांकन करने वाले थे।” |
| 3 | सत्र | स्थान — वैष्णव मठ | “जहाँ सभी ‘सत्रों’, अर्थात मठों की पीठ है।” |
| 4 | असमिया | भाषा | “अनु ने एंजेला को कुछ असमिया शब्द भी सिखाए।” |
| 5 | गुवाहाटी | नगर | “गुवाहाटी के एक होटल में सामान्य होने के बाद…” |
| 6 | माजुली | स्थान — नदी-द्वीप, जहाँ दक्षिणापथ सत्र है | चित्र का शीर्षक — “दक्षिणापथ सत्र का सेंक्टोरियम, माजुली में”। |
यदि और शब्द भरने हों तो ये भी पाठ से लिए जा सकते हैं —
| शब्द | असम से क्या जुड़ाव |
|---|---|
| बोहाग / रोंगाली बिहू | बैसाख (अप्रैल) में मनने वाला बिहू — असमिया नए साल का त्योहार। |
| भोगाली / माघ बिहू | माघ (जनवरी) का बिहू — भोज और पकवानों वाला। |
| कोंगाली / काटी बिहू | कार्तिक (अक्तूबर) का बिहू — दीप जलाने और फ़सल की रखवाली का समय। |
| दक्षिणापथ सत्र | वह सत्र जहाँ एंजेला का परिवार ठहरा। |
| मलंग | गुवाहाटी के पास का वह गाँव जहाँ एंजेला ने बिहू देखा। |
| मूँगा सिल्क | असम का सुनहरा रेशम — ‘झरोखे से’ वाले लेख का विषय। |
| वैष्णव मठ | वह परंपरा जिसमें से सत्रिया नृत्य निकला। |
पहचानने का तरीक़ा: ऐसे शब्द ढूँढ़ने के लिए पाठ पर सरसरी नज़र दौड़ाइए और उन शब्दों पर घेरा बनाइए जो — (1) हिंदी शब्दकोश में सामान्य रूप से न मिलें, (2) किसी जगह, त्योहार, नृत्य, भाषा या पहनावे का नाम हों, और (3) केवल इसी पाठ में दिखें। ‘बिहू’, ‘सत्र’, ‘सत्रिया’ तीनों इसी जाँच पर खरे उतरते हैं।
मज़ेदार बात: ‘सत्र’ और ‘सत्रिया’ एक ही मूल के शब्द हैं — जैसे ‘गाँव’ से ‘गँवई’, वैसे ही ‘सत्र’ से ‘सत्रिया’। यानी नृत्य का नाम उसी जगह पर पड़ा जहाँ वह जन्मा। ऐसे ही ‘बिहू’ एक ही शब्द से त्योहार और नृत्य दोनों का नाम बन गया — इसी बात पर तो एंजेला को अचरज हुआ था।