मल्हार अध्याय 8 पंक्तियों पर चर्चा

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “असम, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, जिसे अपने वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है। इसके साथ असम में नृत्य की भी एक समृद्ध परंपरा है।”
उत्तर

अर्थ — यह पंक्ति एंजेला की माँ ने हवाई यात्रा के दौरान कही थी। इसमें असम की चार पहचानें एक साथ गिनाई गई हैं — वन्य-जीवन, रेशम, चाय के बागान और नृत्य की समृद्ध परंपरा

पहचानइसका अर्थपाठ में इसका सूत्र कहाँ खुलता है
वन्य-जीवनअसम के जंगलों में एक सींग वाला गैंडा, हाथी और अनेक पक्षी मिलते हैं।पहेली वाली गतिविधि में भी जंगल-बाघ की बात आती है — “हाबि आसे बाघ नाइ”।
रेशमअसम का सुनहरा मूँगा सिल्क, जो दुनिया में केवल असम और पूर्वोत्तर में बनता है।‘झरोखे से’ का पूरा लेख इसी रेशम पर है।
चाय के बागानअसम भारत में सबसे अधिक चाय उगाने वाले राज्यों में है।इसी से पता चलता है कि असम एक कृषि-प्रधान प्रदेश है।
नृत्य की समृद्ध परंपराबिहू (लोक) और सत्रिया (शास्त्रीय) — दो बिलकुल अलग मिज़ाज के नृत्य एक ही राज्य में।पूरा पाठ इसी वाक्य को खोलकर दिखाता है।

मुझे इसका यह अर्थ समझ में आया — किसी प्रदेश की पहचान केवल उसकी प्रकृति और उपज से नहीं बनती, उसकी कला से भी बनती है। इसीलिए वाक्य में ‘इसके साथ’ शब्द आया है — मानो लेखिका कह रही हों कि जंगल, रेशम और चाय तो असम की बाहरी पहचान हैं, नृत्य उसकी भीतरी पहचान है। और यह बात इस पूरे पाठ का बीज है, क्योंकि एलेसेंड्रा असम इसी भीतरी पहचान को फ़िल्म में उतारने आई थीं।

जोड़कर देखिए: अपने राज्य के बारे में ठीक इसी ढाँचे का एक वाक्य बनाइए — “____, भारत के ____ क्षेत्र में है, जिसे अपने ____, ____ और ____ के लिए जाना जाता है। इसके साथ यहाँ ____ की भी एक समृद्ध परंपरा है।” यह अभ्यास बताता है कि हर प्रदेश के पास अपनी एक कला ज़रूर है।
प्र2.
(ख) “पूरी दुनिया की संस्कृतियों में लोग नृत्य और संगीत से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं।”
उत्तर

अर्थ — यह बात माँ ने तब कही जब एंजेला ने पूछा कि क्या संगीत और नृत्य सिर्फ़ त्योहारों पर ही होते हैं। माँ का उत्तर था — नहीं। नृत्य और संगीत मन की भाषा हैं, और यह भाषा दुनिया की हर संस्कृति में बोली जाती है।

मनुष्य के पास भावना कहने के दो रास्ते हैं — शब्द और शरीर-स्वर। शब्दों की भाषा हर देश में अलग होती है, इसलिए एंजेला असमिया नहीं समझ सकती थी। पर नाचते हुए शरीर और बजते ढोल की भाषा उसे तुरंत समझ आ गई — इसीलिए लंदन की एक बच्ची असम के गाँव में बैठकर मंत्रमुग्ध हो सकी। यही इस पंक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण स्वयं एंजेला है।

पाठ से तीन उदाहरण —

  • खुशी — “बसंत के आने की खुशी में वे सभी एक त्योहार मनाते हैं, जिसे ‘बिहू’ कहा जाता है।” यहाँ नृत्य ऋतु के बदलने की खुशी कह रहा है।
  • श्रद्धा — सत्रों में साधु नृत्य और नाटक के ज़रिए भगवान विष्णु की कथा कहते हैं। यहाँ नृत्य भक्ति की भावना कह रहा है।
  • शक्ति और वीरता — जय-विजय की प्रस्तुति में नृत्यांगनाओं ने “शक्ति, बल और आकर्षण” दिखाया। यहाँ नृत्य वीर-भाव कह रहा है।
इस पंक्ति के आगे की बात: माँ ने साथ ही जोड़ा — “असम का बिहू नृत्य ग्रामीण जनजीवन के साथ-साथ फसल लगाने से लेकर बसंत के आगमन तक से जुड़ा हुआ है।” यानी नृत्य केवल मंच की चीज़ नहीं, वह लोगों के रोज़ के जीवन से निकलता है। जहाँ खेती है, वहाँ फ़सल का नृत्य है; जहाँ मठ है, वहाँ भक्ति का नृत्य है।
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