मल्हार अध्याय 8 सोच-विचार के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “एंजेला के मन में कई तरह के विचार चल रहे थे।” उसके मन में कौन-कौन से विचार चल रहे होंगे?
उत्तर

यह वाक्य उस समय आता है जब बिहू देखकर लौटते हुए माँ ने एंजेला से पूछा कि ‘उसे बिहू कैसा लगा?’ एंजेला तुरंत उत्तर नहीं दे पाई — क्योंकि उसने एक साथ इतना कुछ देखा था कि मन में कई विचार एक साथ चल रहे थे।

पाठ के आधार पर उसके मन के विचार ये रहे होंगे —

मन में उठा विचारपाठ का आधार
यह कितना अनोखा है कि उत्सव और नृत्य — दोनों का नाम एक ही है, ‘बिहू’!“उसे अच्छा लगा कि इस उत्सव और नृत्य दोनों को ‘बिहू’ कहा जाता है।”
क्या संगीत और नृत्य सिर्फ़ त्योहारों पर ही होते हैं?“उसने माँ से पूछा कि क्या संगीत और नृत्य सिर्फ़ त्योहारों पर ही होते हैं।”
एक पेड़ के नीचे इतने सारे लोग! क्या मैं सचमुच किसी टाइम-मशीन या सपनों की दुनिया में आ गई हूँ?“उसे ऐसा लग रहा था, जैसे वह आश्चर्यजनक रूप से किसी टाइम-मशीन में आकर बैठ गई हो! या क्या वह उस वक्त किसी सपनों की दुनिया में थी?”
लड़कियों की लाल-बादामी पोशाक और लड़कों के वाद्ययंत्र कितने सुंदर हैं!“लड़कों ने वाद्ययंत्र ले रखे हैं और लड़कियों ने लाल और बादामी रंग की गहरी डिजाइन वाली खूबसूरत पोशाक पहन रखी है।”
मैं भी अपने घर पर बसंत आने पर ऐसे ही नाचूँगी।“उसकी इच्छा हुई कि वह भी अपने घर पर बसंत के आगमन पर ऐसे ही नृत्य करेगी।”
लंदन का जीवन और यहाँ का जीवन कितना अलग है!“उसने महसूस किया कि लंदन के जीवन से यहाँ सब कुछ कितना अलग था!”

इन सबको एक वाक्य में समेटें तो एंजेला के मन में अचरज, जिज्ञासा और खुशी — तीनों एक साथ चल रहे थे। अचरज इस बात का कि यह सब उसकी कल्पना की कहानियों जैसा था; जिज्ञासा इस बात की कि नृत्य आख़िर होता क्यों है; और खुशी इस बात की कि वह इसका हिस्सा बन गई।

यहाँ ध्यान देने की बात: लेखिका ने ‘कई तरह के विचार’ लिखकर उन्हें गिनाया नहीं — पर पाठ में आगे-पीछे बिखेर दिया। ऐसे प्रश्न में उत्तर आस-पास के दो पैराग्राफ़ों से चुनकर बनाना होता है, अपने मन से गढ़कर नहीं।
प्र2.
(ख) “बिहू एक कृषि आधारित त्योहार है।” कैसे?
उत्तर

बिहू को कृषि आधारित त्योहार इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह किसी देवता या किसी राजा की स्मृति से नहीं, बल्कि खेत के काम के कैलेंडर से बँधा हुआ है। पाठ में इसका सीधा प्रमाण है —

“असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है।
सबसे पहले जब किसान बीज बोते हैं,
फिर जब वे धान रोपते हैं
और फिर तब, जब खेतों में अनाज तैयार हो जाता है।”

यानी बिहू खेती के तीनों बड़े पड़ावों पर लौटता है। जहाँ खेती का चरण बदला, वहाँ बिहू आ गया। इसीलिए यह त्योहार फ़सल का त्योहार है।

इसके तीन और प्रमाण पाठ में मिलते हैं —

  • समय — यह अप्रैल में, बसंत के आगमन पर पड़ता है, जो असम में नए साल की शुरुआत है। खेती का नया वर्ष भी यहीं से शुरू होता है।
  • जगह — एंजेला ने इसे किसी शहर के सभागार में नहीं, गुवाहाटी के पास मलंग गाँव में, खुले आसमान के नीचे बरगद के पेड़ तले देखा।
  • माँ का कथन — “असम का बिहू नृत्य ग्रामीण जनजीवन के साथ-साथ फसल लगाने से लेकर बसंत के आगमन तक से जुड़ा हुआ है।”
जोड़कर देखिए: भारत के लगभग सारे बड़े लोक-त्योहार इसी तरह खेती से जुड़े हैं — पंजाब की बैसाखी, तमिलनाडु का पोंगल, केरल का ओणम, ओडिशा का नुआखाई। पाठ की यह पंक्ति भी यही बताती है — “भारत में जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा किसानों का है।” जहाँ इतने किसान हों, वहाँ त्योहार भी फ़सल के साथ चलेंगे।
प्र3.
(ग) ऐसा लगता है कि भारत से जाने के बाद भी एंजेला के मन में असम ही छाया हुआ था। पाठ से इस कथन के समर्थन के लिए कुछ उदाहरण खोजकर लिखिए।
उत्तर

हाँ, यह कथन बिलकुल सही है। पाठ के अंतिम दो पैराग्राफ़ इसके प्रमाणों से भरे हैं। नीचे पाँच उदाहरण दिए गए हैं —

क्रमपाठ का उदाहरणयह क्या सिद्ध करता है
1.“वापस लौटने के बाद भी वह चलने, खाना खाने और यहाँ तक कि खेलने के दौरान भी नृत्य करती रही।”नृत्य उसकी दिनचर्या में घुल गया — वह अब ‘देखने वाली’ नहीं, ‘करने वाली’ बन गई थी।
2.“वापस लंदन जाने के बाद वह उन सभी रिकॉर्डिंग्स को देखती रही, जो उसकी माँ ने रिकॉर्ड की थी।”असम को बार-बार देखना ही उसका मनपसंद काम बन गया।
3.“पूरे उत्साह के साथ वह असम की समृद्ध नृत्य परंपरा को याद करती रही। रंग-बिरंगा सत्रिया और आनंदित करने वाला बिहू।”उसे दोनों नृत्यों का अलग-अलग स्वभाव तक याद रह गया था।
4.“एंजेला ने लंदन में अपनी कक्षा में, स्वयं किए गए नृत्य की वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ उसका प्रदर्शन किया।”वह असम को केवल अपने पास नहीं रखना चाहती थी, दूसरों तक पहुँचाना चाहती थी।
5.“अब एंजेला के पास अपने लिए, असम के नृत्यों—बिहू और सत्रिया के साथ अपना खुद का मनोरंजन था।”असम अब उसकी यात्रा की याद भर नहीं, उसका अपना शौक़ बन चुका था।

सबसे मज़बूत प्रमाण चौथा वाला है — क्योंकि माँ और पापा ने मिलकर “असमी नृत्य पर एक शानदार योजना” बनाई और एंजेला ने अपनी कक्षा में वह नृत्य किया। “उसके सहपाठियों और शिक्षकों को यह बहुत पसंद आया।” जो चीज़ मन में सिर्फ़ छाई हो, वह याद बनकर रह जाती है; जो मन में बस गई हो, वह इस तरह बाहर आती है।

प्र4.
(घ) समय के बदलने के साथ-साथ सत्रिया नृत्य की परंपरा में क्या बदलाव आया है?
उत्तर

सत्रिया नृत्य की परंपरा में सबसे बड़ा बदलाव यह आया कि यह मठ की चारदीवारी से निकलकर मंच पर आ गया, और पुरुषों का नृत्य होने से महिलाओं का भी नृत्य बन गया। माँ ने एंजेला को यही बताया था। इसे तीन पड़ावों में देखिए —

पड़ावक्या स्थिति थीपाठ का प्रमाण
पहलेसत्रिया केवल सत्रों (वैष्णव मठों) के भीतर होता था और केवल साधु ही इसे करते थे।“एलेसेंड्रा ने वैष्णव मठ के सभागार में नृत्य कर रहे युवा साधुओं का फ़िल्मांकन किया।” इसी को देखकर एंजेला ने सोचा — “क्या सत्रिया नृत्य सिर्फ़ लड़कों और पुरुषों के लिए है?”
बीसवीं शताब्दी के मध्य मेंकुछ साधु मठों से बाहर आकर पुरुषों और महिलाओं — दोनों को सत्रिया सिखाने लगे। इसका विरोध हुआ।“शुरू में ऐसे साधुओं को मठों से निकाल दिया गया।”
आधुनिक दौर मेंमहिला कलाकारों का मंच पर सत्रिया करना सामान्य बात हो गई।“आधुनिक दौर में महिला सत्रिया कलाकारों के लिए मंच पर नृत्य करना आम बात हो गई है।

इस बदलाव का सबसे सुंदर प्रमाण उसी रात एंजेला को मिल गया। उसने प्रिया और रीता जैसी महिला नृत्यांगनाओं को जय-विजय की कथा पर नाचते देखा — “सफ़ेद पगड़ीनुमा टोपी में दो महिलाएँ नृत्य और नाटक की शैली में कमाल का अभिनय कर रही हैं।” और एंजेला को लगा कि “उन महिला कलाकारों की प्रस्तुति सत्रिया नृत्य करने वाले पुरुष कलाकारों से भी बेहतर थी।”

इससे क्या सीख मिलती है: परंपराएँ पत्थर की लकीर नहीं होतीं। जो लोग परंपरा को नए लोगों तक ले जाते हैं, उन्हें शुरू में विरोध झेलना पड़ता है — जैसे उन साधुओं को मठ से निकाल दिया गया। पर जो कला और लोगों तक पहुँचती है, वही जीवित रहती है। यदि वे साधु बाहर न आते, तो शायद आज सत्रिया दुनिया भर के मंचों पर न होता — और एलेसेंड्रा की डॉक्यूमेंट्री भी न बन पाती।
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