यह कल्पना का प्रश्न है, इसलिए इसका कोई एक ‘सही’ उत्तर नहीं है। पर अच्छे उत्तर में तीन बातें ज़रूर होनी चाहिए — कौन-सा समय, कौन-सी जगह और सबसे ज़रूरी, क्यों।
कुछ दिशाएँ, जिनमें से आप चुन सकते हैं —
| कहाँ / कब | वहाँ जाकर क्या देखना चाहेंगे |
|---|---|
| बीता हुआ समय — इतिहास | हड़प्पा-मोहनजोदड़ो के स्नानागार में; नालंदा के विश्वविद्यालय की कक्षा में; अशोक के शिलालेख गढ़े जाते हुए; 1930 की दांडी यात्रा में गांधी जी के साथ चलते हुए। |
| बीता हुआ समय — अपना परिवार | जब दादा-दादी आपकी उम्र के थे, उनका गाँव और उनका स्कूल देखने। |
| बीता हुआ समय — कला | उस दिन जब पहली बार किसी सत्र में सत्रिया नृत्य रचा गया, या अजंता की गुफ़ाओं में चित्र बनते हुए देखने। |
| आने वाला समय | सन् 2100 की दुनिया — क्या तब भी बिहू मनाया जाएगा? क्या नदियाँ साफ़ होंगी? क्या स्कूल ऐसे ही होंगे? |
नमूना उत्तर:
“यदि मुझे टाइम-मशीन मिल जाए तो मैं आज से लगभग सौ साल पीछे, अपने ही गाँव में जाना चाहूँगी। मैं देखना चाहती हूँ कि तब यहाँ बिजली नहीं थी, तो लोग शाम कैसे बिताते थे; बच्चे कौन-से खेल खेलते थे; और वह बरगद का पेड़, जो आज हमारे स्कूल के सामने है, तब कितना छोटा रहा होगा। मैं अपनी परदादी से मिलना चाहूँगी, जिनकी सिर्फ़ एक धुँधली तस्वीर हमारे घर में टँगी है। मैं उनसे वे लोकगीत सुनना चाहूँगी जो अब किसी को याद नहीं। लौटते समय मैं वे गीत लिखकर ले आऊँगी, ताकि वे फिर से गाए जा सकें।”