मल्हार अध्याय 8 टाइम मशीन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) यदि आपको टाइम-मशीन मिल जाए तो आप उसमें बैठकर कौन-से समय में और कौन-से स्थान पर जाना चाहेंगे? क्यों?
उत्तर

यह कल्पना का प्रश्न है, इसलिए इसका कोई एक ‘सही’ उत्तर नहीं है। पर अच्छे उत्तर में तीन बातें ज़रूर होनी चाहिए — कौन-सा समय, कौन-सी जगह और सबसे ज़रूरी, क्यों

कुछ दिशाएँ, जिनमें से आप चुन सकते हैं —

कहाँ / कबवहाँ जाकर क्या देखना चाहेंगे
बीता हुआ समय — इतिहासहड़प्पा-मोहनजोदड़ो के स्नानागार में; नालंदा के विश्वविद्यालय की कक्षा में; अशोक के शिलालेख गढ़े जाते हुए; 1930 की दांडी यात्रा में गांधी जी के साथ चलते हुए।
बीता हुआ समय — अपना परिवारजब दादा-दादी आपकी उम्र के थे, उनका गाँव और उनका स्कूल देखने।
बीता हुआ समय — कलाउस दिन जब पहली बार किसी सत्र में सत्रिया नृत्य रचा गया, या अजंता की गुफ़ाओं में चित्र बनते हुए देखने।
आने वाला समयसन् 2100 की दुनिया — क्या तब भी बिहू मनाया जाएगा? क्या नदियाँ साफ़ होंगी? क्या स्कूल ऐसे ही होंगे?

नमूना उत्तर:

“यदि मुझे टाइम-मशीन मिल जाए तो मैं आज से लगभग सौ साल पीछे, अपने ही गाँव में जाना चाहूँगी। मैं देखना चाहती हूँ कि तब यहाँ बिजली नहीं थी, तो लोग शाम कैसे बिताते थे; बच्चे कौन-से खेल खेलते थे; और वह बरगद का पेड़, जो आज हमारे स्कूल के सामने है, तब कितना छोटा रहा होगा। मैं अपनी परदादी से मिलना चाहूँगी, जिनकी सिर्फ़ एक धुँधली तस्वीर हमारे घर में टँगी है। मैं उनसे वे लोकगीत सुनना चाहूँगी जो अब किसी को याद नहीं। लौटते समय मैं वे गीत लिखकर ले आऊँगी, ताकि वे फिर से गाए जा सकें।”

‘क्यों’ का उत्तर ही सबसे ज़रूरी है: ‘मैं डायनासोर देखना चाहूँगा’ — यह अधूरा उत्तर है। ‘मैं डायनासोर देखना चाहूँगा क्योंकि मैं जानना चाहता हूँ कि वे सचमुच कितने बड़े थे और उनकी आवाज़ कैसी थी’ — यह पूरा उत्तर है। कारण ही आपकी कल्पना को सोच में बदलता है।
प्र2.
(ख) आपको यदि कोई ऐसी वस्तु बनाने का अवसर मिले जो अभी तक नहीं बनाई गई है तो आप क्या बनाएँगे? क्यों बनाएँगे?
उत्तर

यहाँ सोचने का तरीक़ा यह है — पहले कोई ऐसी परेशानी चुनिए जो आपके आस-पास सचमुच है, फिर उसे हल करने वाली वस्तु की कल्पना कीजिए। तब आपका आविष्कार सिर्फ़ मज़ेदार नहीं, उपयोगी भी लगेगा।

परेशानीकल्पना की वस्तुवह क्या करेगी
बहुत-सी भाषाएँ, पर समझ किसी एक कीभाषा-बटनकान में लगाते ही कोई भी भाषा अपनी भाषा में सुनाई देने लगे। एंजेला को असमिया समझने के लिए यही चाहिए था।
कूड़े का ढेरकूड़ा-बदल पेटीजो कूड़ा डालो, वह खाद, काग़ज़ या ईंट बनकर निकले।
सूखा और पानी की कमीहवा से पानी बनाने वाली छतरीहवा की नमी खींचकर पीने का पानी बना दे।
दूर बसे गाँवों में डॉक्टर नहींजेब वाला जाँच-यंत्रहथेली पर रखते ही बता दे कि क्या तकलीफ़ है और कौन-सी दवा चाहिए।
भारी बस्ताबोलती किताब-पट्टीएक पतली पट्टी में सारी किताबें, जो पढ़कर भी सुना सके।

नमूना उत्तर:

“मैं एक ‘भाषा-बटन’ बनाना चाहूँगा — कान में लगने वाला एक छोटा-सा बटन, जो किसी भी भाषा को सुनते ही मेरी भाषा में बदलकर मुझे सुना दे। मैं इसे इसलिए बनाना चाहूँगा क्योंकि हमारे देश में सैकड़ों भाषाएँ हैं और अक्सर हम पड़ोसी राज्य में जाकर भी किसी से बात नहीं कर पाते। इस पाठ में भी एंजेला असम पहुँची तो अनु ने उसे कुछ असमिया शब्द सिखाए, तभी वे घुल-मिल पाईं। यदि भाषा-बटन होता तो हर बच्चा किसी भी राज्य में जाकर वहाँ के बच्चों से दोस्ती कर सकता, वहाँ के गीत समझ सकता और वहाँ की कहानियाँ सुन सकता। मेरे लिए यह सबसे बड़ा काम होगा — लोगों को आपस में जोड़ना।”

लिखते समय: वस्तु का एक नाम ज़रूर रखिए, बताइए वह कैसी दिखेगी, और अंत में किसका भला होगा। यही तीन बातें आपके आविष्कार को जीवित कर देती हैं।
प्र3.
(ग) क्या आपने कभी किसी संग्रहालय की यात्रा की है? संग्रहालय ऐसा स्थान होता है जहाँ विभिन्न कालों की प्राचीन वस्तुएँ देखने को मिलती हैं। कभी-कभी संग्रहालय की यात्रा भी ‘टाइम-मशीन’ की यात्रा जैसी लगती है। अवसर मिले तो आप भी किसी संग्रहालय की यात्रा अवश्य कीजिए और उसके बारे में कक्षा में बताइए।
उत्तर

संग्रहालय को ‘टाइम-मशीन’ क्यों कहा गया है — क्योंकि वहाँ हज़ारों साल पुरानी चीज़ें आपके सामने रखी होती हैं। मोहनजोदड़ो की नर्तकी की मूर्ति देखते ही आप पाँच हज़ार साल पीछे पहुँच जाते हैं, बिना कहीं गए। इसीलिए एंजेला को भी बरगद के नीचे बैठकर लगा था — “जैसे वह आश्चर्यजनक रूप से किसी टाइम-मशीन में आकर बैठ गई हो!”

भारत के कुछ प्रसिद्ध संग्रहालय —

संग्रहालयकहाँक्या देखने को मिलता है
राष्ट्रीय संग्रहालयनई दिल्लीहड़प्पा की नर्तकी, प्राचीन सिक्के, मूर्तियाँ, वस्त्र
भारतीय संग्रहालयकोलकाताभारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा संग्रहालय; ममी और जीवाश्म
असम राज्य संग्रहालयगुवाहाटीअसम की मूर्तियाँ, वाद्ययंत्र, बुनाई और जनजातीय जीवन की वस्तुएँ
सालार जंग संग्रहालयहैदराबाददुनिया भर से जुटाई गई कलाकृतियाँ और प्रसिद्ध संगीत-घड़ी
रेल संग्रहालयनई दिल्लीपुराने भाप-इंजन और शाही डिब्बे

यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान —

  1. पहले पता कर लीजिए कि वहाँ कौन-कौन से कक्ष (गैलरी) हैं, ताकि समय बँट जाए।
  2. हर वस्तु के नीचे लगी नाम-पट्टिका ज़रूर पढ़िए — उसमें वस्तु का नाम, काल और जगह लिखी होती है।
  3. एक छोटी कॉपी में तीन चीज़ों के नाम और उनका रेखाचित्र बनाइए, जो आपको सबसे अच्छी लगीं।
  4. वस्तुओं को छूइए मत और जहाँ मना हो वहाँ फ़ोटो मत लीजिए — ये चीज़ें बहुत नाज़ुक होती हैं।

नमूना उत्तर (कक्षा में बताने के लिए):

“पिछले वर्ष हम अपने विद्यालय के साथ राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली गए थे। वहाँ मुझे सबसे अच्छी लगी हड़प्पा की नर्तकी की छोटी-सी काँसे की मूर्ति। वह मुश्किल से एक बित्ते की है, पर उसके खड़े होने के ढंग में इतना आत्मविश्वास है कि लगता है वह अभी नाचना शुरू कर देगी। नाम-पट्टिका पर लिखा था कि यह लगभग साढ़े चार हज़ार साल पुरानी है। उसे देखकर मुझे लगा कि इतने साल पहले भी लोग नाचते थे — ठीक वैसे ही जैसे आज असम में बिहू पर नाचते हैं। उस पल मुझे सचमुच लगा कि मैं किसी टाइम-मशीन में बैठकर बहुत पीछे चला गया हूँ।”

क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ