मल्हार अध्याय 8 खिलौने विभिन्न प्रकार के

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) अनु के खिलौने कैसे थे? लंदन में एंजेला के खिलौने कैसे रहे होंगे?
उत्तर

अनु के खिलौने — पाठ में इनका ब्योरा साफ़ दिया गया है —

“गुड़िया, लकड़ी के खिलौने और नारियल की जटा से बने घर। कितने अनोखे खिलौने!
अनु का पसंदीदा खिलौना लकड़ी का बना तीर-कमान था।”

यानी अनु के सारे खिलौने हाथ से बने थे और प्रकृति से मिली चीज़ों — लकड़ी और नारियल की जटा — से बने थे। ये खिलौने बटन दबाने पर अपने आप कुछ नहीं करते थे; इनसे खेलने के लिए बच्चे को स्वयं कहानी गढ़नी पड़ती थी। इसीलिए अनु तीर-कमान लेकर राम बन जाती और एंजेला रावण — “उस कूद-फाँद और लड़ाई का कोई अंत नहीं था।”

लंदन में एंजेला के खिलौने कैसे रहे होंगे — यह अनुमान का हिस्सा है। पाठ में इसका सीधा वर्णन नहीं है, पर दो सुराग़ मिलते हैं — “उसने लंदन में ऐसे खिलौने कभी नहीं देखे थे” और “उसने महसूस किया कि लंदन के जीवन से यहाँ सब कुछ कितना अलग था!”

तुलनाअनु के खिलौनेएंजेला के खिलौने (अनुमान)
बने किससेलकड़ी, नारियल की जटा, कपड़ा — प्राकृतिक चीज़ेंप्लास्टिक, धातु, बैटरी वाले पुर्ज़े
बनाए किसनेगाँव के कारीगरों ने हाथ से, इसलिए हर खिलौना अलगकारख़ाने में मशीन से, इसलिए सब एक जैसे
कहाँ से आएआस-पास से हीदुकान या ऑनलाइन ऑर्डर से
कैसे खेले जाते हैंबच्चा स्वयं कहानी बनाता है — राम-रावण का खेलखिलौना स्वयं चलता-बोलता है; वीडियो गेम में नियम पहले से तय
उदाहरणतीर-कमान, गुड़िया, जटा का घररिमोट वाली कार, बोलने वाली गुड़िया, वीडियो गेम, बिल्डिंग-ब्लॉक
एंजेला को अनु के खिलौने अच्छे क्यों लगे: क्योंकि वे उसके लिए नए थे और उनमें खेलने वाले के लिए जगह थी। जो खिलौना सब कुछ ख़ुद कर देता है, वहाँ बच्चे के करने को कुछ नहीं बचता। लकड़ी का तीर-कमान कुछ नहीं करता — इसीलिए उसके साथ पूरी रामायण खेली जा सकती है।
प्र2.
(ख) आप घर पर कौन-कौन से खिलौनों से खेलते रहे हैं? उनके नाम बताइए।
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। सोचने में आसानी हो, इसके लिए खिलौनों को तीन ढेरियों में बाँट लीजिए —

ढेरीउदाहरण
दुकान से आए खिलौनेरिमोट वाली कार, गुड़िया, लूडो, साँप-सीढ़ी, पहेली (पज़ल), बिल्डिंग-ब्लॉक, कैरम
हाथ से बने / परंपरागत खिलौनेमिट्टी के बर्तन और जानवर, लकड़ी का लट्टू, चन्नापटना के रंगीन खिलौने, कठपुतली, गुड़िया, डमरू, फ़िरकी
घर पर ख़ुद बनाए खिलौनेकाग़ज़ की नाव और हवाई जहाज़, माचिस की डिब्बी की गाड़ी, कपड़े की गेंद, धागे और डिब्बे का टेलीफ़ोन, पुराने चप्पल का पहिया

नमूना उत्तर:

“मैं घर पर लट्टू, कंचे, लूडो और कैरम से खेलता रहा हूँ। मेरे पास एक मिट्टी का हाथी भी है जो मेले से आया था, और एक लकड़ी की गाड़ी जो मेरे नाना ने अपने हाथ से बनाई थी। जब कुछ न हो तो मैं और मेरी बहन काग़ज़ की नाव बनाकर बारिश के पानी में तैराते हैं। मुझे लट्टू सबसे अच्छा लगता है, क्योंकि उसे नचाना सीखने में मुझे पूरे दो हफ़्ते लगे थे।”

बताते समय: केवल नाम गिनाकर मत रुकिए। एक खिलौने के बारे में दो वाक्य ज़रूर कहिए — वह कहाँ से आया और उससे जुड़ी कोई याद। तभी सुनने वालों को मज़ा आएगा।
प्र3.
(ग) भारत के प्रत्येक प्रांत में हाथ से बच्चों के अनोखे खिलौने बनाए जाते हैं। आपके यहाँ बच्चों के लिए हाथ से बने कौन-कौन से खिलौने मिलते हैं?
उत्तर

पहले अपने आस-पास पता कीजिए — मेले में, हाट में, बस अड्डे के पास या किसी शिल्प-दुकान में। नीचे भारत के कुछ प्रसिद्ध हस्तनिर्मित खिलौने दिए गए हैं; अपने प्रांत का नाम इनमें ढूँढ़िए।

प्रांतप्रसिद्ध हाथ के खिलौनेकिससे बनते हैं
असम / पूर्वोत्तरगुड़िया, बाँस-बेंत के खिलौने, नारियल की जटा से बने घर, मुखौटे (माजुली के)बाँस, बेंत, लकड़ी, जटा, मिट्टी
कर्नाटकचन्नापटना के चमकीले रंगीन खिलौनेहल्की लकड़ी और वनस्पति रंग
आंध्र प्रदेशकोंडापल्ली के लकड़ी के खिलौने, एटिकोप्पका के लाख वाले खिलौनेमुलायम लकड़ी, लाख
उत्तर प्रदेशवाराणसी के लकड़ी के खिलौने, चित्रकूट के काठ के खिलौनेलकड़ी
राजस्थानकठपुतली, ऊँट-हाथी की कपड़े की गुड़ियालकड़ी, कपड़ा, धागा
पश्चिम बंगालकृष्णानगर की मिट्टी की मूर्तियाँ, उल्लू-गुड़ियाचिकनी मिट्टी
महाराष्ट्र / गुजरातसावंतवाड़ी के लकड़ी के खिलौने, कच्छ की कपड़े की गुड़ियालकड़ी, कपड़ा, दर्पण-काम
बिहार / झारखंडमिट्टी के घोड़े-हाथी, बाँस की डलिया-खिलौनेमिट्टी, बाँस

नमूना उत्तर:

“हमारे यहाँ मेले में मिट्टी के खिलौने बहुत मिलते हैं — घोड़ा, हाथी, सीटी वाली चिड़िया और छोटे-छोटे बर्तन। इनके अलावा लकड़ी का लट्टू, काग़ज़ की फ़िरकी और कपड़े की गुड़िया भी मिलती है। ये सब हमारे गाँव के कुम्हार और बढ़ई चाचा अपने हाथ से बनाते हैं। मैंने एक बार कुम्हार चाचा को चाक पर मिट्टी की चिड़िया बनाते देखा — मिट्टी का लोंदा घूमते-घूमते चिड़िया बन गया, यह देखकर मुझे बहुत अचरज हुआ।”

हाथ के खिलौने क्यों ख़ास हैं: ये आस-पास मिलने वाली चीज़ों से बनते हैं, इसलिए सस्ते होते हैं; ये मिट्टी, लकड़ी और कपड़े के होते हैं, इसलिए पर्यावरण को नुक़सान नहीं पहुँचाते; और हर खिलौना हाथ से बना होने के कारण थोड़ा-थोड़ा अलग होता है — ठीक वैसे ही जैसे अनु का तीर-कमान दुनिया में सिर्फ़ एक था।
प्र4.
(घ) भारत के बच्चे स्वयं भी अपने लिए अनोखे खिलौने बना लेते हैं। आप भी तो कागज़, मिट्टी आदि से कोई न कोई खिलौना बनाना जानते होंगे? आप अपने हाथों से बनाए किसी खिलौने को कक्षा में लाकर दिखाइए और उसे बनाने का तरीका सबको सिखाइए।
उत्तर

यह करके दिखाने वाली गतिविधि है। इसे तीन चरणों में कीजिए — बनाइए, लाइए, सिखाइए। सिखाते समय क्रम से बोलिए ताकि सुनने वाला साथ-साथ बना सके।

घर की चीज़ों से बनने वाले कुछ खिलौने —

खिलौनाक्या चाहिएकैसे बनेगा
काग़ज़ की फ़िरकीचौकोर काग़ज़, पिन, पेंसिलकाग़ज़ के चारों कोनों से बीच तक कटाव कीजिए, एक-एक कोना बीच में मोड़कर पिन से पेंसिल की रबड़ पर टाँक दीजिए। हवा में दौड़िए — फ़िरकी घूमेगी।
धागे-डिब्बे का टेलीफ़ोनदो माचिस/दियासलाई के डिब्बे या काग़ज़ के गिलास, एक लंबा धागादोनों डिब्बों के पेंदे में छेद करके धागे के दोनों सिरे बाँध दीजिए। धागा तानकर एक सिरे से बोलिए, दूसरे सिरे पर सुनाई देगा।
मिट्टी की सीटी वाली चिड़ियाचिकनी गीली मिट्टीमिट्टी की छोटी गोली बनाकर चोंच और पूँछ खींचिए, पूँछ में पतला छेद कीजिए और धूप में सुखाइए।
काग़ज़ की नाव और हवाई जहाज़एक काग़ज़केवल मोड़ने से बनते हैं — कैंची या गोंद की भी ज़रूरत नहीं।
बोतल के ढक्कनों की गाड़ीमाचिस की डिब्बी, चार ढक्कन, दो सींकसींकों को धुरी बनाकर ढक्कनों में डालिए और डिब्बी के नीचे चिपका दीजिए।

नमूना उत्तर (कक्षा में सिखाने का तरीक़ा):

“मैं आज आपको काग़ज़ की फ़िरकी बनाना सिखाऊँगा। इसके लिए चाहिए — एक चौकोर काग़ज़, एक पिन और एक पेंसिल जिसके पीछे रबड़ लगी हो।

  1. काग़ज़ को दोनों तिरछे कोनों से मोड़कर खोलिए। बीच में एक निशान (×) बन जाएगा।
  2. चारों कोनों से बीच के निशान तक कैंची से कट लगाइए, पर बीच तक पूरा मत काटिए — थोड़ा छोड़ दीजिए।
  3. अब हर कोने का एक-एक सिरा उठाकर बीच में लाइए। चारों सिरे बीच में इकट्ठे हो जाएँगे।
  4. चारों सिरों को एक साथ पिन से बेधकर पेंसिल की रबड़ में टाँक दीजिए। ध्यान रहे — पिन ज़रा ढीली रखिए, तभी फ़िरकी घूमेगी।
  5. अब इसे हवा में लेकर दौड़िए या फूँक मारिए।

मुझे यह खिलौना इसलिए पसंद है क्योंकि यह बिना पैसे के बन जाता है और इससे यह भी समझ आता है कि हवा में कितनी शक्ति होती है।”

सिखाते समय ध्यान रखिए: पहले सामान गिनाइए, फिर एक-एक क़दम क्रम से बताइए, और जहाँ ग़लती होने की आशंका हो वहाँ चेतावनी दीजिए (जैसे — ‘पिन ज़्यादा कसकर मत लगाइए’)। कैंची और पिन का इस्तेमाल बड़ों की देख-रेख में ही कीजिए।
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