अनु के खिलौने — पाठ में इनका ब्योरा साफ़ दिया गया है —
अनु का पसंदीदा खिलौना लकड़ी का बना तीर-कमान था।”
यानी अनु के सारे खिलौने हाथ से बने थे और प्रकृति से मिली चीज़ों — लकड़ी और नारियल की जटा — से बने थे। ये खिलौने बटन दबाने पर अपने आप कुछ नहीं करते थे; इनसे खेलने के लिए बच्चे को स्वयं कहानी गढ़नी पड़ती थी। इसीलिए अनु तीर-कमान लेकर राम बन जाती और एंजेला रावण — “उस कूद-फाँद और लड़ाई का कोई अंत नहीं था।”
लंदन में एंजेला के खिलौने कैसे रहे होंगे — यह अनुमान का हिस्सा है। पाठ में इसका सीधा वर्णन नहीं है, पर दो सुराग़ मिलते हैं — “उसने लंदन में ऐसे खिलौने कभी नहीं देखे थे” और “उसने महसूस किया कि लंदन के जीवन से यहाँ सब कुछ कितना अलग था!”
| तुलना | अनु के खिलौने | एंजेला के खिलौने (अनुमान) |
|---|---|---|
| बने किससे | लकड़ी, नारियल की जटा, कपड़ा — प्राकृतिक चीज़ें | प्लास्टिक, धातु, बैटरी वाले पुर्ज़े |
| बनाए किसने | गाँव के कारीगरों ने हाथ से, इसलिए हर खिलौना अलग | कारख़ाने में मशीन से, इसलिए सब एक जैसे |
| कहाँ से आए | आस-पास से ही | दुकान या ऑनलाइन ऑर्डर से |
| कैसे खेले जाते हैं | बच्चा स्वयं कहानी बनाता है — राम-रावण का खेल | खिलौना स्वयं चलता-बोलता है; वीडियो गेम में नियम पहले से तय |
| उदाहरण | तीर-कमान, गुड़िया, जटा का घर | रिमोट वाली कार, बोलने वाली गुड़िया, वीडियो गेम, बिल्डिंग-ब्लॉक |