कक्षा ६ हिंदी अध्याय 8 पत्र के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
(क) मान लीजिए आप एंजेला हैं। आप लंदन लौट चुकी हैं और आपको भारत की बहुत याद आ रही है। अपनी सखी अनु को पत्र लिखकर बताइए कि आपको कैसा अनुभव हो रहा है।
उत्तर

यह अनौपचारिक पत्र (मित्र को लिखा जाने वाला पत्र) है। इसमें भाषा घरेलू और भाव भरी होनी चाहिए। इसके छह हिस्से होते हैं —

हिस्साक्या लिखें
1. पता और दिनांकऊपर दाईं ओर — भेजने वाले का पता और नीचे तारीख़।
2. संबोधनप्रिय अनु / प्रिय सखी अनु
3. अभिवादन-कुशलक्षेम‘मैं यहाँ ठीक हूँ, आशा है तुम भी ठीक होगी।’
4. मुख्य बातभारत की यादें — बिहू, सत्रिया, खिलौने, खेल — और यह कि अब कैसा लग रहा है।
5. समापनफिर मिलने की इच्छा, घर के बड़ों को प्रणाम।
6. हस्ताक्षरतुम्हारी सखी — एंजेला

नमूना उत्तर:

25, केंजिंग्टन
लंदन, यूनाइटेड किंगडम
10 मई, 20××

प्रिय सखी अनु,

ढेर सारा प्यार!

मैं यहाँ लंदन पहुँच गई हूँ और बिलकुल ठीक हूँ। आशा है तुम, रीना आंटी और सत्र के सब लोग कुशल से होंगे।

अनु, तुम्हें क्या बताऊँ — यहाँ लौटे कई दिन हो गए, पर मेरा मन अब भी असम में ही अटका हुआ है। सुबह स्कूल जाते हुए जब मैं सड़क पार करती हूँ, तो अचानक कानों में ढोल और पेपा की आवाज़ गूँज जाती है और पैर अपने आप बिहू की ताल पर चलने लगते हैं। माँ हँसती हैं और कहती हैं कि मैं खाना खाते हुए भी नाचती रहती हूँ। सच कहूँ तो वे ग़लत नहीं कहतीं!

मुझे मलंग गाँव का वह बरगद का पेड़ बहुत याद आता है, जिसके नीचे इतने सारे लोग एक साथ बैठे थे। मैंने लंदन में एक पेड़ के नीचे कभी इतने लोग नहीं देखे। और तुम्हारे वे खिलौने — नारियल की जटा से बना छोटा-सा घर और लकड़ी का तीर-कमान! यहाँ मेरे सारे खिलौने प्लास्टिक के हैं, वे बजते तो हैं पर उनसे राम-रावण का खेल नहीं खेला जा सकता। तुम्हें याद है, तुम राम बनती थीं और मैं शक्तिशाली रावण? मुझे वह कूद-फाँद बहुत याद आती है।

एक और बात। पिछले हफ़्ते मैंने अपनी कक्षा में असम के नृत्यों पर प्रस्तुति दी। माँ ने जो वीडियो बनाया था, वह भी दिखाया और थोड़ा-सा बिहू ख़ुद भी करके दिखाया। मेरी शिक्षिका और मेरे सारे सहपाठी बहुत ख़ुश हुए। जेम्स तो कह रहा था कि वह भी असम जाएगा। उस दिन मुझे लगा कि असम का एक टुकड़ा मैं अपने साथ लंदन ले आई हूँ।

तुमने जो असमिया शब्द सिखाए थे, मैं उन्हें रोज़ दोहराती हूँ ताकि भूल न जाऊँ। तुम मुझे अपने पत्र में और नए शब्द लिखकर भेजना। मैं तुम्हें अंग्रेज़ी के शब्द भेजूँगी।

अगली बार मैं भोगाली बिहू के समय आना चाहूँगी, ताकि वे पकवान चख सकूँ जिनकी तुम बात करती थीं। रीना आंटी को मेरा प्रणाम कहना।

तुम्हारी प्यारी सखी,
एंजेला

अच्छे पत्र की पहचान: इसमें केवल ‘मुझे बहुत याद आती है’ मत लिखिए — वह चीज़ लिखिए जो याद आती है। ‘बरगद का पेड़’, ‘नारियल की जटा का घर’, ‘राम-रावण का खेल’ — ये ठोस चीज़ें ही पत्र को सजीव बनाती हैं। और यह याद रखिए कि पत्र एंजेला लिख रही है, इसलिए उसी की आँखों से, उसी के अनुभव लिखिए।
प्र2.
(ख) आप जानते होंगे कि पत्र लिखने के लिए आवश्यक सामग्री, जैसे— पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय लिफाफे आदि डाकघर से खरीदे जा सकते हैं। संभव हो तो आप भी अपने घर के पास के डाकघर में जाइए और एक पोस्टकार्ड खरीदकर पत्र लिखने के लिए उसका उपयोग कीजिए।
उत्तर

यह करके देखने वाली गतिविधि है। पहले जान लीजिए कि डाकघर में मिलने वाली सामग्री होती क्या है —

सामग्रीयह क्या हैकब काम आती है
पोस्टकार्डखुला, कड़े काग़ज़ का एक पत्ता। एक तरफ़ पता, दूसरी तरफ़ संदेश।छोटा-सा संदेश भेजने के लिए। यह सबसे सस्ता है, पर इसे कोई भी पढ़ सकता है।
अंतर्देशीय पत्र (इनलैंड लेटर)नीले रंग का काग़ज़, जिसे मोड़कर चिपकाया जाता है।देश के भीतर लंबा और निजी पत्र भेजने के लिए।
लिफ़ाफ़ाअलग से ख़रीदा जाने वाला कवर, जिसमें अलग काग़ज़ रखकर भेजा जाता है।जब पत्र लंबा हो या कोई काग़ज़ भी साथ भेजना हो।
एयरोग्राम / एयर-मेल लिफ़ाफ़ाहल्का, हवाई डाक से जाने वाला लिफ़ाफ़ा।दूसरे देश पत्र भेजने के लिए — जैसे एंजेला को लंदन।
डाक-टिकटपत्र पर चिपकाई जाने वाली छोटी पर्ची, जो डाक का शुल्क चुकाने का प्रमाण है।लिफ़ाफ़े पर। पोस्टकार्ड और अंतर्देशीय पत्र पर टिकट पहले से छपा होता है।

करने का क्रम —

  1. घर के किसी बड़े के साथ नज़दीकी डाकघर जाइए और खिड़की पर जाकर कहिए — “एक पोस्टकार्ड दीजिए।”
  2. पोस्टकार्ड के दाईं ओर पाने वाले का पूरा पता लिखिए — नाम, मकान/गली, गाँव या शहर, ज़िला, राज्य और पिन कोड। पिन कोड ज़रूर लिखिए, इसी से चिट्ठी सही डाकघर पहुँचती है।
  3. बाईं ओर और पीछे की ओर अपना संदेश लिखिए। ऊपर अपना पता और तारीख़ छोटे अक्षरों में लिख दीजिए।
  4. लिखा हुआ पोस्टकार्ड लाल डाक-पेटी में डाल दीजिए।
  5. अपनी कॉपी में लिखिए कि पोस्टकार्ड कितने का मिला, आपने किसे भेजा, और उत्तर कितने दिन में आया।
मज़ेदार बात: मोबाइल पर संदेश एक पल में पहुँच जाता है, फिर भी चिट्ठी का अपना ही आनंद है — उसमें भेजने वाले की अपनी लिखावट होती है, और वह वर्षों तक सँभालकर रखी जा सकती है। इसीलिए दुनिया भर में लोग आज भी पत्र लिखते हैं।
प्र3.
(ग) क्या आपने कभी डाक-टिकट देखा है? संसार के सभी देश डाक-टिकट जारी करते हैं। भारत का डाक-विभाग भी समय-समय पर डाक-टिकट जारी करता है। डाक-टिकट किसी देश की संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध कराते हैं। इसलिए अनेक लोग देश-विदेश के डाक-टिकटों को एकत्रित करना पसंद करते हैं। नीचे भारत के विभिन्न लेखकों के सम्मान में जारी किए गए कुछ डाक-टिकटों के चित्र दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से देखिए—
क्रमडाक-टिकट पर छपा नामटिकट पर छपा वर्ष / जीवन-कालमूल्य
1.डा. वृंदावनलाल वर्मा / DR. VRINDAVANLAL VERMA1997₹2.00
2.तुलसीदास1533–16241 आ.
3.सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ / SURYAKANT TRIPATHI NIRALA1896–196125 पै.
4.सुभद्राकुमारी चौहान / SUBHADRAKUMARI CHAUHAN1904–194825 पै.
5.कबीर / Kabir—₹15.00
6.पं. श्रीलाल शुक्ल / Pandit Shrilal Shukla2017₹10.00
7.प्रेमचंद / PREM CHAND1880–193630 पै.
8.मैथिलीशरण गुप्त / MAITHILI SHARAN GUPTA1886–196425 पै.
9.बाबू गुलाबराय / BABU GULABRAI—₹5.00
10.भारतेंदु हरिश्चंद्र / BHARATENDU HARISHCHANDRA1850–188525 पै.
11.कुबेरनाथ राय / KUBERNATH RAY2019₹5.00
12.हरिवंशराय बच्चन / HARIVANSH RAI BACHCHAN—₹5.00
13.प्रताप नारायण मिश्र / Pratap Narayan Mishra2013₹5.00
14.डॉ. शम्भुनाथ सिंह / DR. SHAMBHUNATH SINGH2017₹5.00
15.हज़ारी प्रसाद द्विवेदी / HAZARI PRASAD DWIVEDI1997₹2.00
16.आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी / ACHARYA MAHAVIR PRASAD DWIVEDI1864–19380.15
17.राहुल सांकृत्यायन / RAHUL SANKRITYAYAN1893–1963₹1.00
18.दुष्यन्त कुमार / DUSHYANT KUMAR2009₹5.00
19.महादेवी वर्मा / MAHADEVI VERMA—₹2.00
20.सुमित्रानंदन पंत / SUMITRANANDAN PANT2015₹5.00
21.रामधारी सिंह ‘दिनकर’ / RAMDHARI SINGH DINKAR—₹3.00
पुस्तक के पृष्ठ 90 और 91 पर इक्कीस डाक-टिकटों के चित्र छपे हैं — पृष्ठ 90 पर पाँच-पाँच के तीन क्रम और पृष्ठ 91 पर तीन-तीन के दो क्रम। हर टिकट पर लेखक का चित्र, उनका नाम (हिंदी और अंग्रेज़ी में), ‘भारत INDIA’ तथा टिकट का मूल्य छपा है; कुछ पर जीवन-काल भी दिया गया है। टिकटों के चित्र यहाँ नहीं दिए जा सकते, इसलिए उन पर छपी जानकारी यहाँ उसी क्रम में दी गई है — चित्र पाठ्यपुस्तक में देखिए।
उत्तर

पुस्तक के पृष्ठ 90–91 पर छह डाक-टिकट छपे हैं। ये सब भारत के प्रसिद्ध हिंदी लेखकों-कवियों के सम्मान में जारी किए गए थे। पहचान इस प्रकार है —

टिकट पर नाममूल्यये कौन थेटिकट पर और क्या दिखता है
महावीर प्रसाद द्विवेदी0.15हिंदी गद्य और खड़ी बोली को सँवारने वाले लेखक-संपादक; ‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादक।चश्मा पहने चित्र और ‘1864–1938’ जीवनकाल।
राहुल सांकृत्यायन1.00घुमक्कड़ लेखक और यात्रा-साहित्य के पितामह; ‘घुमक्कड़ शास्त्र’ के रचयिता।चित्र के साथ ‘1893–1963’ और पीछे यात्रा करते लोगों का दृश्य।
दुष्यंत कुमार5.00हिंदी ग़ज़ल को नई पहचान देने वाले कवि।चित्र के साथ किताबों का ढेर; जारी वर्ष 2009।
महादेवी वर्मा2.00छायावाद की प्रमुख कवयित्री, ‘आधुनिक मीरा’ कही जाती हैं।चित्र के साथ एक भावपूर्ण रेखाचित्र।
सुमित्रानंदन पंत5.00छायावाद के प्रमुख कवि, प्रकृति के सुकुमार कवि कहलाते हैं।चश्मा पहने चित्र और पीछे बर्फ़ीले पहाड़; जारी वर्ष 2015।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’3.00राष्ट्रकवि; ‘रश्मिरथी’ और ‘उर्वशी’ के रचयिता।गोल घेरे में चित्र और पीछे कुछ मानव-आकृतियाँ; जारी वर्ष 1999।

देखते समय इन बातों पर ध्यान दीजिए —

  1. हर टिकट पर ऊपर ‘भारत / INDIA’ लिखा है — यह बताता है कि टिकट किस देश ने जारी किया।
  2. हर टिकट पर एक मूल्य छपा है (0.15, 1.00, 2.00, 3.00, 5.00 रुपये) — यही डाक का शुल्क है।
  3. नाम हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में लिखा है, ताकि पूरे देश और विदेश में पढ़ा जा सके।
  4. चित्र के पीछे बना दृश्य लेखक के काम की ओर इशारा करता है — जैसे राहुल सांकृत्यायन के टिकट पर यात्रा और दुष्यंत कुमार के टिकट पर किताबें।
डाक-टिकट जमा करना: इस शौक़ को फ़िलेटली कहते हैं। घर आई चिट्ठियों के टिकट काटकर, पानी में भिगोकर लिफ़ाफ़े से अलग कीजिए, सुखाकर एक कॉपी में चिपकाइए और नीचे लिख दीजिए — किस देश का, किस वर्ष का, किस विषय पर। कुछ ही महीनों में आपके पास इतिहास, कला और प्रकृति का एक छोटा-सा संग्रहालय बन जाएगा।
प्र4.
(क) आपको इनमें से कौन-सा डाक-टिकट सबसे अच्छा लगा और क्यों?
उत्तर

यह आपकी अपनी पसंद का प्रश्न है — कोई भी टिकट चुना जा सकता है, बशर्ते आप कारण बताएँ। कारण देते समय इन तीन में से किसी एक पर बात कीजिए — टिकट का चित्र, टिकट के रंग, या टिकट पर बने उस लेखक का काम।

नमूना उत्तर 1:

“मुझे राहुल सांकृत्यायन वाला डाक-टिकट सबसे अच्छा लगा। इसका कारण यह है कि इस टिकट पर केवल लेखक का चित्र नहीं है — उनके पीछे पहाड़ी रास्ते पर चलते हुए यात्रियों का दृश्य भी बना है। यह दृश्य उनके बारे में सब कुछ कह देता है, क्योंकि वे जीवन भर घूमते रहे और घुमक्कड़ी पर ही उन्होंने लिखा। मुझे लगा कि यह टिकट लेखक का चेहरा नहीं, उनका जीवन दिखा रहा है। और यह पाठ भी तो एक यात्रा का ही वर्णन है — इसीलिए यह टिकट मुझे इस पाठ के सबसे पास लगा।”

नमूना उत्तर 2:

“मुझे सुमित्रानंदन पंत वाला टिकट सबसे अच्छा लगा, क्योंकि उसके पीछे बर्फ़ से ढके पहाड़ बने हैं। पंत जी को प्रकृति का कवि कहा जाता है और वे हिमालय की गोद में बसे गाँव कौसानी में जन्मे थे। टिकट का हल्का नीला रंग मुझे ठंडी हवा जैसा लगा। मुझे यह देखकर अच्छा लगा कि टिकट बनाने वाले ने कवि की कविताओं का भाव भी उसमें भर दिया।”

कारण कैसे मज़बूत बनाएँ: ‘मुझे यह अच्छा लगा क्योंकि यह सुंदर है’ — यह कमज़ोर कारण है, क्योंकि इससे कुछ पता नहीं चलता। ‘मुझे यह अच्छा लगा क्योंकि इसमें लेखक के पीछे उनकी यात्राओं का दृश्य बना है’ — यह मज़बूत कारण है, क्योंकि इसमें आपने टिकट में सचमुच कुछ देखा है।
प्र5.
(ख) डाक-टिकटों पर लेखकों के बारे में कौन-कौन सी जानकारी दी गई है?
उत्तर

इन डाक-टिकटों को ध्यान से देखने पर लेखकों के बारे में पाँच तरह की जानकारी मिलती है —

जानकारीटिकट पर वह कहाँ दिखती हैउदाहरण
1. लेखक का नामटिकट पर हिंदी और अंग्रेज़ी — दोनों लिपियों में छपा है।‘महादेवी वर्मा / MAHADEVI VERMA’, ‘सुमित्रानंदन पंत / SUMITRANANDAN PANT’
2. लेखक का चित्रटिकट के बीच में उनका मुख-चित्र, जिससे उनका पहनावा और रूप पता चलता है।महावीर प्रसाद द्विवेदी का चश्मा पहने चित्र
3. जीवनकाल — जन्म और मृत्यु के वर्षचित्र के आस-पास छोटे अंकों में।‘1864–1938’ (महावीर प्रसाद द्विवेदी), ‘1893–1963’ (राहुल सांकृत्यायन)
4. उनके काम का संकेतचित्र की पृष्ठभूमि में बने दृश्य से।राहुल सांकृत्यायन के पीछे यात्रा-दृश्य; दुष्यंत कुमार के पास पुस्तकों का ढेर; पंत जी के पीछे हिमालय
5. सम्मान का वर्षटिकट के किनारे छपा वर्ष, यानी वह वर्ष जब देश ने उन्हें यह सम्मान दिया।1999 (दिनकर), 2009 (दुष्यंत कुमार), 2015 (सुमित्रानंदन पंत)

इनके अलावा हर टिकट पर ‘भारत / INDIA’ और टिकट का मूल्य भी छपा है — पर ये लेखक की जानकारी नहीं, टिकट की जानकारी हैं।

सबसे बड़ी जानकारी जो शब्दों में नहीं लिखी: डाक-टिकट किसी देश का सबसे छोटा सम्मान-पत्र है। किसी लेखक पर टिकट जारी होने का अर्थ है कि देश उन्हें अपनी धरोहर मानता है। इसीलिए पुस्तक कहती है कि ‘डाक-टिकट किसी देश की संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध कराते हैं’ — इन छह टिकटों से ही पता चल जाता है कि भारत अपने कवियों-लेखकों को कितना मान देता है।
क्या यह उपयोगी रहा?