यह अनौपचारिक पत्र (मित्र को लिखा जाने वाला पत्र) है। इसमें भाषा घरेलू और भाव भरी होनी चाहिए। इसके छह हिस्से होते हैं —
| हिस्सा | क्या लिखें |
|---|---|
| 1. पता और दिनांक | ऊपर दाईं ओर — भेजने वाले का पता और नीचे तारीख़। |
| 2. संबोधन | प्रिय अनु / प्रिय सखी अनु |
| 3. अभिवादन-कुशलक्षेम | ‘मैं यहाँ ठीक हूँ, आशा है तुम भी ठीक होगी।’ |
| 4. मुख्य बात | भारत की यादें — बिहू, सत्रिया, खिलौने, खेल — और यह कि अब कैसा लग रहा है। |
| 5. समापन | फिर मिलने की इच्छा, घर के बड़ों को प्रणाम। |
| 6. हस्ताक्षर | तुम्हारी सखी — एंजेला |
नमूना उत्तर:
25, केंजिंग्टन
लंदन, यूनाइटेड किंगडम
10 मई, 20××
प्रिय सखी अनु,
ढेर सारा प्यार!
मैं यहाँ लंदन पहुँच गई हूँ और बिलकुल ठीक हूँ। आशा है तुम, रीना आंटी और सत्र के सब लोग कुशल से होंगे।
अनु, तुम्हें क्या बताऊँ — यहाँ लौटे कई दिन हो गए, पर मेरा मन अब भी असम में ही अटका हुआ है। सुबह स्कूल जाते हुए जब मैं सड़क पार करती हूँ, तो अचानक कानों में ढोल और पेपा की आवाज़ गूँज जाती है और पैर अपने आप बिहू की ताल पर चलने लगते हैं। माँ हँसती हैं और कहती हैं कि मैं खाना खाते हुए भी नाचती रहती हूँ। सच कहूँ तो वे ग़लत नहीं कहतीं!
मुझे मलंग गाँव का वह बरगद का पेड़ बहुत याद आता है, जिसके नीचे इतने सारे लोग एक साथ बैठे थे। मैंने लंदन में एक पेड़ के नीचे कभी इतने लोग नहीं देखे। और तुम्हारे वे खिलौने — नारियल की जटा से बना छोटा-सा घर और लकड़ी का तीर-कमान! यहाँ मेरे सारे खिलौने प्लास्टिक के हैं, वे बजते तो हैं पर उनसे राम-रावण का खेल नहीं खेला जा सकता। तुम्हें याद है, तुम राम बनती थीं और मैं शक्तिशाली रावण? मुझे वह कूद-फाँद बहुत याद आती है।
एक और बात। पिछले हफ़्ते मैंने अपनी कक्षा में असम के नृत्यों पर प्रस्तुति दी। माँ ने जो वीडियो बनाया था, वह भी दिखाया और थोड़ा-सा बिहू ख़ुद भी करके दिखाया। मेरी शिक्षिका और मेरे सारे सहपाठी बहुत ख़ुश हुए। जेम्स तो कह रहा था कि वह भी असम जाएगा। उस दिन मुझे लगा कि असम का एक टुकड़ा मैं अपने साथ लंदन ले आई हूँ।
तुमने जो असमिया शब्द सिखाए थे, मैं उन्हें रोज़ दोहराती हूँ ताकि भूल न जाऊँ। तुम मुझे अपने पत्र में और नए शब्द लिखकर भेजना। मैं तुम्हें अंग्रेज़ी के शब्द भेजूँगी।
अगली बार मैं भोगाली बिहू के समय आना चाहूँगी, ताकि वे पकवान चख सकूँ जिनकी तुम बात करती थीं। रीना आंटी को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारी प्यारी सखी,
एंजेला