अन्वेषण अध्याय 1 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ऊपर दिए गए चित्र को देखिए। आपने क्या देखा?
उत्तर

चित्र में एक ग्रामीण भू-दृश्य है। इसे दो भागों में बाँटकर देखिए — जो प्रकृति ने बनाया और जो मनुष्य ने बनाया।

प्रकृति द्वारा निर्मितमनुष्य द्वारा निर्मित
दो चोटियों वाली चट्टानी पहाड़ी, जिस पर हरे वन हैंआगे की ओर मुड़ती हुई एक पक्की सड़क
पहाड़ी की तलहटी में फैली एक झीलझील के किनारे खपरैल की ढलवाँ छत वाला एक छोटा घर
वृक्ष, घास और झाड़ियाँ; बादलों से भरा आकाश (वर्षा ऋतु या उसके तुरंत बाद का समय)घर के पास एक केसरिया ध्वज तथा साफ किए गए छोटे खेत जैसे टुकड़े

यह भी देखिए कि चित्र में क्या नहीं है — न दुकानें, न यातायात, न ऊँची इमारतें, न भीड़। केवल एक-दो घर दिखाई देते हैं। अर्थात यहाँ बहुत कम लोग रहते हैं और वे वन तथा जल के निकट रहते हैं।

यह चित्र पुस्तक के आरंभ में क्यों है: सामाजिक विज्ञान वहीं का अध्ययन करता है जहाँ प्रकृति और मनुष्य मिलते हैं। पहाड़ी और झील भूगोल से, घर और ध्वज संस्कृति से तथा सड़क शासन एवं अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। एक ही चित्र में पुस्तक के पाँचों विषय उपस्थित हैं।
प्र2.
झील में जल कहाँ से आ रहा है?
उत्तर

लगभग सारा जल वर्षा से आता है — विशेषकर जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून से।

  • वर्षा का जल पीछे की वन-आच्छादित पहाड़ी ढलानों पर गिरता है।
  • जल सदैव ऊँचे स्थान से नीचे की ओर बहता है, इसलिए यह छोटी-छोटी धाराओं के रूप में ढलान से नीचे उतरता है।
  • पहाड़ी की तलहटी में भूमि नीची है, अतः जल वहाँ एकत्र होकर झील बनाता है। जिस क्षेत्र का जल इसमें आता है, उसे जलग्रहण क्षेत्र कहते हैं।
  • कुछ जल भूमिगत स्रोतों से भी रिसकर आता है, इसीलिए ऐसी झीलें वर्षा समाप्त होते ही नहीं सूखतीं।
वन क्यों आवश्यक है: ढलान के वृक्ष और घास मिट्टी को थामे रखते हैं। यदि वे न हों तो वर्षा का जल मिट्टी बहाकर झील में भर देगा और झील उथली हो जाएगी। वन, पहाड़ी और झील एक ही तंत्र के अंग हैं।
क्या आप जानते हैं? भारत की ऐसी अनेक झीलें प्राकृतिक नहीं हैं। ग्रामवासियों ने छोटी घाटियों को बाँधकर मानसून का जल संचित किया — कर्नाटक की केरे, तमिलनाडु की एरी तथा राजस्थान और बुंदेलखंड के तालाब एवं बावड़ी। इनमें से कुछ हजार वर्ष से भी पुराने हैं और आज भी उपयोग में हैं।
प्र3.
सड़क का निर्माण किसने एवं क्यों किया?
उत्तर

किसने: ऐसी सड़क कोई एक परिवार नहीं बनाता, इसे सरकार बनवाती है — प्रायः ग्राम पंचायत, जिला परिषद, राज्य का लोक निर्माण विभाग (पी.डब्ल्यू.डी.) अथवा केंद्र की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (सन् 2000 में आरंभ), जिसका उद्देश्य प्रत्येक गाँव को बारहमासी सड़क से जोड़ना है। मनरेगा जैसी योजनाओं में स्थानीय लोग भी इस कार्य में लगते हैं।

क्यों: सड़क गाँव की जीवन-रेखा है। इससे वहाँ के लोग —

  • अपना अनाज, दूध या मछली बाजार तक ले जा सकते हैं और नमक, तेल, कपड़ा वापस ला सकते हैं;
  • बच्चों को विद्यालय भेज सकते हैं तथा चिकित्सालय या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शीघ्र पहुँच सकते हैं;
  • पंचायत कार्यालय, बैंक और राशन की दुकान तक जा सकते हैं;
  • और झील तथा पहाड़ी तक आने वाले यात्री एवं पर्यटक भी इसी सड़क से आते हैं।
सामाजिक विज्ञान की दृष्टि: सड़क बताती है कि यह एकांत-सा दिखने वाला स्थान शेष देश से जुड़ा हुआ है। किसी ने इसकी योजना बनाई, करों के धन से इसका निर्माण हुआ और किसी ने यह निर्णय लिया कि सड़क यहीं बननी चाहिए। ऐसे ही निर्णय शासन और लोकतंत्र विषय का अध्ययन-क्षेत्र हैं।
प्र4.
इन छोटे-छोटे घरों में रहने वाले लोग क्या-क्या गतिविधियाँ करते होंगे? उनका क्या इतिहास रहा होगा? उनका क्या भविष्य है?
उत्तर

एक चित्र से निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता, परंतु प्रमाणों के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है — सामाजिक वैज्ञानिक इसी प्रकार आरंभ करते हैं।

प्रश्नचित्र से मिलने वाला संकेत
गतिविधियाँसाफ किए गए खेतों में कृषि, झील में मछली पकड़ना, गाय-बकरी पालना, वन से जलावन, महुआ, तेंदू पत्ता या शहद एकत्र करना, तथा आने वाले यात्रियों को चाय बेचना या मार्गदर्शन करना। परिवार का कोई सदस्य निकट के कस्बे में भी काम कर सकता है।
इतिहासयह परिवार संभवतः अनेक पीढ़ियों से इसी पहाड़ी के पास रह रहा है। उनके पूर्वज यहाँ इसलिए बसे होंगे क्योंकि झील से वर्ष-भर जल मिलता था। उनके अपने गीत, त्योहार, ग्राम-देवता (ध्वज संभवतः किसी छोटे स्थान का है) और पहाड़ी से जुड़ी कथाएँ होंगी।
भविष्यनई सड़क बिजली, मोबाइल नेटवर्क, विद्यालय की बस और अधिक पर्यटक ला सकती है। बच्चे आगे पढ़कर नए प्रकार के कार्य कर सकते हैं। परंतु यदि वन कटे या झील प्रदूषित हुई, तो जीवन कठिन भी हो सकता है।
नमूना उत्तर: “यह परिवार संभवतः छोटे खेत में खेती करता है और झील में मछली पकड़ता है। इनके पूर्वज जल की उपलब्धता के कारण यहाँ बसे होंगे। भविष्य में सड़क से विद्यालय और रोजगार निकट आ सकते हैं, किंतु उन्हें उस झील और वन की रक्षा भी करनी होगी जिन पर वे निर्भर हैं।”
ध्यान दीजिए: एक छोटे-से घर ने हमें अर्थशास्त्र (उनका कार्य), इतिहास (उनका अतीत) और भूगोल (वे यहीं क्यों रहते हैं) तक पहुँचा दिया। विभिन्न क्षेत्रों को इस प्रकार साथ लाने को ही आगे बहुविषयकता कहा गया है।
प्र5.
अब, मुखपृष्ठ पर दिए गए चित्र को देखिए, आपके मन में क्या-क्या सवाल आते हैं? उनको लिखिए।
उत्तर

सामने वाले पृष्ठ का चित्र बिल्कुल विपरीत दृश्य दिखाता है — एक आधुनिक नगर का व्यावसायिक क्षेत्र: काँच और इस्पात की ऊँची इमारतें, चौड़ी विभाजित सड़क, स्ट्रीट लाइट, कारें और सड़क के बीच लगाए गए पौधे। लिखने योग्य अच्छे प्रश्न —

  • यह कौन-सा नगर है और यहाँ पहले क्या था — खेत, गाँव या बंजर भूमि?
  • इन इमारतों में कौन-सा कार्य होता है? इन्हें किसने और किसके धन से बनवाया?
  • यहाँ काम करने वाले हजारों लोग कहाँ रहते हैं और प्रतिदिन कैसे आते-जाते हैं?
  • नगर का जल और बिजली कहाँ से आते हैं तथा इसका कूड़ा-कचरा कहाँ जाता है?
  • यहाँ झील या वन क्यों नहीं दिखता? इतने कंक्रीट पर गिरने वाले वर्षा-जल का क्या होता है?
  • सड़कें, बत्तियाँ और नालियाँ कौन ठीक रखता है और इसका व्यय कौन उठाता है?
  • क्या यहाँ का जीवन पहले चित्र वाले गाँव से बेहतर है — किस दृष्टि से बेहतर और किस दृष्टि से नहीं?
दोनों चित्रों की तुलना क्यों: दोनों एक ही दिन के भारत हैं। एक में लोग प्रकृति के साथ रहते हैं, दूसरे में पूर्णतः मनुष्य-निर्मित परिवेश में। यही तुलना बताती है कि समाज एक जैसा नहीं, अनेक रूपों वाला है — और इसीलिए सामाजिक विज्ञान को इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र तथा राजनीति विज्ञान, सबकी आवश्यकता होती है।
प्र6.
इन दो चित्रों से संबंधित प्रश्नों के उत्तरों को जानने के लिए आप किस प्रकार प्रयास करेंगे?
उत्तर

उन्हीं साधनों से, जिनका उपयोग एक सामाजिक वैज्ञानिक करता है। इसे एक छोटी परियोजना की तरह नियोजित कीजिए —

विधिइससे क्या पता चलेगा
ध्यानपूर्वक अवलोकन (क्षेत्र-भ्रमण)कौन-सी फसल होती है, कितने घर हैं, सड़क पर कितना आवागमन है, झील कितनी स्वच्छ है
लोगों से बातचीत — बुजुर्गों, किसानों, दुकानदारों, पंचायत सचिव से साक्षात्कारबस्ती का इतिहास, सड़क कब और क्यों बनी, जीवन में क्या परिवर्तन आए
मानचित्र और चित्र — पुराने छायाचित्र तथा उपग्रह चित्र सहितस्थान कहाँ है और 20 या 50 वर्ष पहले कैसा दिखता था
लिखित सामग्री — पुस्तकें, समाचार-पत्र, जिला गजेटियर, जनगणना रिपोर्ट, सरकारी वेबसाइटजनसंख्या, वर्षा, साक्षरता, पी.एम.जी.एस.वाई. जैसी योजनाएँ
स्रोतों की तुलनादो व्यक्ति या दो पुस्तकें एक ही बात कहती हैं या नहीं — और यदि नहीं, तो किस पर विश्वास करें
सुझाव: आरंभ करने से पहले अपने प्रश्न लिख लीजिए, प्रत्येक व्यक्ति की बात एक कॉपी में नोट कीजिए और यह भी लिखिए कि यह बात किसने और कब बताई। सामाजिक वैज्ञानिक का उत्तर उतना ही अच्छा होता है, जितना अच्छा उसका स्रोत।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ