कक्षा ६ सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
मानचित्र किसी क्षेत्र का ऊपर से देखा गया रेखांकन या प्रतीकात्मक चित्रण है। यह एक गाँव, जनपद, राज्य, भारत अथवा संपूर्ण विश्व का हो सकता है। मानचित्रों की पुस्तक या संग्रह को एटलस (मानचित्रावली) कहते हैं। मानचित्र मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं — भौतिक (पर्वत, नदी, महासागर), राजनैतिक (देश, राज्य, सीमाएँ, राजधानियाँ) और थिमैटिक (किसी एक विशिष्ट प्रकार की सूचना)। प्रत्येक मानचित्र के तीन घटक होते हैं — दूरी (स्केल से, जैसे 1 से.मी. = 500 मी.), दिशा (चतुर्दिश उ., पू., द., प. तथा मध्यवर्ती दिशाएँ) और प्रतीक चिह्न (भारत के मानचित्रों के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा निर्धारित)। पृथ्वी लगभग गोलाकार है, इसलिए समतल मानचित्र की तुलना में ग्लोब उसे बेहतर दर्शाता है। ग्लोब पर अक्षांश भूमध्य रेखा (0°) से उत्तर या दक्षिण की दूरी (90° उ. और 90° द. तक) तथा देशांतर ग्रिनिच के प्रमुख याम्योत्तर (0°) से प
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| शब्द | अर्थ | अध्याय में कहाँ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| मानचित्र | ऊपर से देखे गए किसी क्षेत्र का रेखांकन | पृष्ठ 8–9, चित्र 1.1 | काल्पनिक लघु नगर का मानचित्र |
| एटलस (मानचित्रावली) | मानचित्रों की पुस्तक या संग्रह | पृष्ठ 9 | आपके विद्यालय का एटलस |
| स्केल | मानचित्र का एक सेंटीमीटर धरातल पर कितनी दूरी दर्शाता है | पृष्ठ 9–10 | 1 से.मी. = 500 मी.; चित्र 5.2 में 2.5 से.मी. = 500 कि.मी. |
| चतुर्दिश | उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम | पृष्ठ 10 | प्रत्येक मानचित्र पर ‘उ.’ वाला तीर |
| मध्यवर्ती दिशाएँ | उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम | पृष्ठ 10 | संग्रहालय बैंक के दक्षिण-पूर्व में है |
| प्रतीक चिह्न | किसी आकृति को दर्शाने वाला छोटा निश्चित चिह्न | पृष्ठ 11, चित्र 1.2 | सेतु, मंदिर, डाकघर के लिए निर्धारित चिह्न |
| ग्लोब | वह गोला जिस पर मानचित्र बना होता है | पृष्ठ 12 | कक्षा का ग्लोब |
| निर्देशांक | वे दो मान जो किसी स्थिति को ठीक-ठीक निर्धारित करते हैं | पृष्ठ 12–13 | शतरंज का ‘घ’4; दिल्ली के लिए 29° उ., 77° पू. |
| भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) | 0° अक्षांश, दोनों ध्रुवों के मध्य सबसे बड़ा वृत्त | पृष्ठ 13, चित्र 1.3 | केन्या, इंडोनेशिया, इक्वाडोर से होकर |
| अक्षांश | भूमध्य रेखा से दूरी दर्शाने वाला पूर्व-पश्चिम वृत्त | पृष्ठ 13–14 | कर्क रेखा लगभग 23½° उ., भारत के आठ राज्यों से होकर |
| देशांतर (याम्योत्तर) | प्रमुख याम्योत्तर से दूरी दर्शाने वाला ध्रुव से ध्रुव तक अर्धवृत्त | पृष्ठ 14–15 | 82°30′ पू. — भारत की मानक याम्योत्तर |
| प्रमुख याम्योत्तर | 0° देशांतर, 1884 में ग्रिनिच पर निर्धारित | पृष्ठ 15 | लंदन का ग्रिनिच क्षेत्र |
| मध्य रेखा | उज्जयिनी से गुजरने वाली भारत की प्राचीन प्रमुख याम्योत्तर | पृष्ठ 16, चित्र 1.5 | उज्जैन, कुरुक्षेत्र, रोहितक |
| मानक समय | एक याम्योत्तर पर आधारित पूरे देश का एक समय | पृष्ठ 20 | आई.एस.टी. = जी.एम.टी. + 5:30 |
| अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा | लगभग 180° पर स्थित वह रेखा जहाँ तिथि बदलती है | पृष्ठ 21–22 | पूर्व की ओर पार करने पर एक दिन घटाते हैं |
अभ्यास
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- महत्वपूर्ण प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
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- आगे बढ़ने से पहले…
- प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ