अन्वेषण अध्याय 1 पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
मानचित्र किसी क्षेत्र का ऊपर से देखा गया रेखांकन या प्रतीकात्मक चित्रण है। यह एक गाँव, जनपद, राज्य, भारत अथवा संपूर्ण विश्व का हो सकता है। मानचित्रों की पुस्तक या संग्रह को एटलस (मानचित्रावली) कहते हैं। मानचित्र मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं — भौतिक (पर्वत, नदी, महासागर), राजनैतिक (देश, राज्य, सीमाएँ, राजधानियाँ) और थिमैटिक (किसी एक विशिष्ट प्रकार की सूचना)। प्रत्येक मानचित्र के तीन घटक होते हैं — दूरी (स्केल से, जैसे 1 से.मी. = 500 मी.), दिशा (चतुर्दिश उ., पू., द., प. तथा मध्यवर्ती दिशाएँ) और प्रतीक चिह्न (भारत के मानचित्रों के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा निर्धारित)। पृथ्वी लगभग गोलाकार है, इसलिए समतल मानचित्र की तुलना में ग्लोब उसे बेहतर दर्शाता है। ग्लोब पर अक्षांश भूमध्य रेखा (0°) से उत्तर या दक्षिण की दूरी (90° उ. और 90° द. तक) तथा देशांतर ग्रिनिच के प्रमुख याम्योत्तर (0°) से प
अभ्यास
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