प्र1.
एक दिन ढलती दोपहर में दो मित्र, एक पोरबंदर (गुजरात) में और दूसरा तिनसुकिया (असम) में बैठे हुए फोन पर बातचीत कर रहे हैं। तिनसुकिया वाला मित्र कहता है कि असम में सूर्यास्त हो गया है और अब अंधेरा है, जबकि पोरबंदर वाला मित्र चकित होकर कहता है — “लेकिन यहाँ तो अभी भी दिन का प्रकाश है!” बताइए कि ऐसा क्यों है?
उत्तर
क्योंकि दोनों मित्रों के देशांतरों में बड़ा अंतर है और पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
- तिनसुकिया भारत के सुदूर पूर्व में (लगभग 95° पू.) और पोरबंदर सुदूर पश्चिम में (लगभग 70° पू.) है।
- पृथ्वी पूर्व की ओर घूमती है, इसलिए पूर्वी स्थान सूर्य के प्रकाश में पहले आते हैं और पहले ही बाहर निकल जाते हैं। अतः असम में सूर्य गुजरात से पहले उगता भी है और पहले अस्त भी होता है।
- जब तिनसुकिया में सूर्यास्त हो चुका होता है, तब पोरबंदर को अपने सूर्यास्त तक पहुँचने में लगभग 25° और घूमना शेष रहता है — अर्थात लगभग पौने दो घंटे का दिन-प्रकाश बाकी।
पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है → 1 घंटे में 15°
स्थान जितना पूर्व में होगा, वहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त उतने ही पहले होंगे।
स्थान जितना पूर्व में होगा, वहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त उतने ही पहले होंगे।
मित्रों को भ्रम क्यों हुआ: दोनों की घड़ियाँ एक ही समय दिखा रही थीं, क्योंकि पूरे भारत में एक ही भारतीय मानक समय चलता है। उनकी घड़ियाँ समान थीं, किंतु उनके स्थानीय समय — अर्थात उनके अपने सूर्य के अनुसार समय — समान नहीं थे। स्थानीय समय और मानक समय का यही अंतर है।
क्या आप जानते हैं? यह एक वास्तविक समस्या है। तिनसुकिया में जून में सूर्य प्रातः 4:30 बजे से भी पहले उग आता है और दिसंबर में सायं 4:15 बजे के तुरंत बाद अस्त हो जाता है, जिससे असम में चाय-बागानों और कार्यालयों का बहुत-सा दिन-प्रकाश बेकार चला जाता है। इसी कारण असम प्रायः आई.एस.टी. से एक घंटा आगे ‘चाय-बागान समय’ की माँग करता रहा है।