प्र1.
गुजरात और असम में बैठे दो मित्र पुनः चर्चा करते हैं। इस उदाहरण का उपयोग स्थानीय समय और मानक समय के अंतर को स्पष्ट करने के लिए कीजिए।
उत्तर
ये दोनों मित्र एक ही क्षण में दोनों प्रकार के समय दिखा देते हैं।
| स्थानीय समय | मानक समय | |
|---|---|---|
| किससे तय होता है | उसी याम्योत्तर पर सूर्य की स्थिति से — जब सूर्य सबसे ऊँचा हो, तब वहाँ 12 बजे | पूरे देश के लिए चुनी गई एक ही याम्योत्तर से |
| हमारे उदाहरण में | तिनसुकिया (95° पू.) में सूर्यास्त हो चुका है जबकि पोरबंदर (70° पू.) में दिन है — दोनों के स्थानीय समय में लगभग 1 घंटा 43 मिनट का अंतर | दोनों मित्रों की घड़ी और फोन एक ही समय दिखा रहे हैं, क्योंकि दोनों आई.एस.टी. का पालन करते हैं |
| भारत में कितने | प्रत्येक याम्योत्तर का अलग — अर्थात हजारों | केवल एक — आई.एस.टी. = जी.एम.टी. + 5:30, जो 82°30′ पू. पर आधारित है और यह याम्योत्तर उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के निकट से गुजरती है |
| आवश्यकता क्यों | यह दैनिक जीवन को सूर्य से जोड़ता है | इससे रेल, विमान, विद्यालय, कार्यालय और समाचार — सब एक ही समय-सारणी पर चल पाते हैं |
एक वाक्य में: स्थानीय समय वह है जो आपके स्थान पर सूर्य बताता है; मानक समय वह है जिसे पूरा देश अपनी घड़ियों पर रखने के लिए स्वीकार करता है।
देश को एक समय क्यों चुनना पड़ता है: यदि प्रत्येक नगर अपना स्थानीय समय रखता, तो अहमदाबाद से प्रातः 10 बजे चलने वाली रेलगाड़ी गुवाहाटी कब पहुँचेगी — यह कोई समय-सारणी बता ही नहीं पाती। इसलिए भारत ने 82°30′ पू. याम्योत्तर चुन ली और कच्छ से किबिथू तक सभी घड़ियाँ उसी का पालन करती हैं।
क्या आप जानते हैं? सन् 1906 से पहले भारत में कई स्थानीय समय चलते थे, जिनमें बंबई समय और कलकत्ता समय भी थे और उनमें लगभग 40 मिनट का अंतर था। बंबई समय तो 1955 तक उस नगर में चलता रहा।