प्र1.
मानचित्र पृथ्वी के क्षेत्र, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, को दर्शाने के लिए एक अत्यधिक उपयोगी साधन है। मानचित्रों के मुख्य घटक दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न हैं।
उत्तर
इस सार का विस्तार —
- मानचित्र पूरे महाद्वीप को एक पृष्ठ पर समेट सकता है और एक छोटे गाँव को पूरे पृष्ठ पर फैला सकता है। बदलता केवल स्केल है, विचार नहीं।
- दूरी स्केल से आती है — लघु नगर के मानचित्र में 1 से.मी. = 500 मी., तो चित्र 5.2 में 2.5 से.मी. = 500 कि.मी.।
- दिशा ‘उ.’ वाले तीर और कम्पास के आठ बिंदुओं से आती है — उ., उ.पू., पू., द.पू., द., द.प., प., उ.प.।
- प्रतीक चिह्न बहुत कम स्थान में बहुत अधिक सूचना भर देते हैं; भारत में इन्हें भारतीय सर्वेक्षण विभाग निर्धारित करता है।
महत्व: तीनों में से कोई एक भी हटा दीजिए और मानचित्र काम करना बंद कर देगा। स्केल नहीं तो दूरी का अनुमान नहीं; दिशा नहीं तो यात्रा में उपयोग नहीं; प्रतीक चिह्न नहीं तो कुछ दिखाने का स्थान ही नहीं।