अन्वेषण अध्याय 1 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
किसी विद्यालय के खेल-मैदान का एक साधारण मानचित्र बनाइए। मान लीजिए कि यह 40 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा आयताकार क्षेत्र है। इसे अपने रूलर की सहायता से 1 सेंटीमीटर = 10 मीटर के स्केल पर सटीक ढँग से खींचिए।
उत्तर

दिए गए स्केल से प्रत्येक वास्तविक माप को कागज के सेंटीमीटर में बदलिए।

स्केल : मानचित्र का 1 से.मी. = धरातल के 10 मी.
लंबाई 40 मी. → 40 ÷ 10 = 4 से.मी.
चौड़ाई 30 मी. → 30 ÷ 10 = 3 से.मी.
अतः रूलर से 4 से.मी. × 3 से.मी. का आयत बनाइए।
4 से.मी. = 40 मी. 3 से.मी. = 30 मी. विकर्ण 5 से.मी. = 50 मी. स्केल 1 से.मी. = 10 मी. उ.
स्केल पर बनाया गया खेल-मैदान — रेखांकन का प्रत्येक 1 से.मी. धरातल के 10 मी. को दर्शाता है।
आकृति सही क्यों रहती है: दोनों भुजाओं को एक ही संख्या से भाग दिया गया है, इसलिए रेखांकन की आकृति वास्तविक मैदान जैसी ही रहती है, केवल छोटी हो जाती है। यदि केवल लंबाई घटाई जाती और चौड़ाई नहीं, तो मानचित्र गलत जानकारी देता।
प्र2.
अब इस आयताकार क्षेत्र के विकर्ण को मापिए। आपके द्वारा की गई माप कितने सेंटीमीटर की है? स्केल की सहायता से खेल-मैदान के विकर्ण की वास्तविक लंबाई की मीटर में गणना कीजिए।
उत्तर

4 से.मी. × 3 से.मी. के आयत के एक कोने से सामने वाले कोने तक रूलर रखिए।

मानचित्र पर मापा गया विकर्ण = 5 से.मी.
1 से.मी. = 10 मी.
वास्तविक विकर्ण = 5 × 10 = 50 मीटर

बिना रूलर के जाँच। 30 मी., 40 मी. की भुजाएँ और विकर्ण मिलकर एक समकोण त्रिभुज बनाते हैं —

40² + 30² = 1600 + 900 = 2500
√2500 = 50 मी.
दोनों उत्तर समान क्यों आए: स्केल पर बना मानचित्र धरातल की सच्ची छोटी प्रतिकृति होता है। उस पर मापी गई कोई भी दूरी — भुजा, विकर्ण या दो वृक्षों के बीच की दूरी — स्केल से गुणा करने पर वास्तविक दूरी दे देती है। यही आप नर्मदा और गंगा वाले प्रश्न में करेंगे।
क्या आप जानते हैं? 3, 4, 5 सबसे प्रसिद्ध समकोण त्रिक है। भारत के राजमिस्त्री आज भी 12 गाँठों वाली रस्सी (3 + 4 + 5) से मकान का सही समकोण बनाते हैं।
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