यदि आपको काले पक्ष की ओर से खेलना हो और उसी विधि से प्रत्युत्तर देना हो, तो इन्हीं नियमों का उपयोग करते हुए अपनी चाल लिखिए।
उत्तर
सफेद पक्ष ने रानी के सामने वाला प्यादा ‘घ’2 से ‘घ’4 तक बढ़ाया है। काले पक्ष की “वैसी ही चाल” का अर्थ है उसका दर्पण-प्रतिबिंब — काली रानी के सामने वाले प्यादे को दो घर आगे बढ़ाना —
काला पक्ष चलेगा ‘घ’7 से ‘घ’5
किसी वर्ग के दो निर्देशांक होते हैं — स्तंभ का अक्षर और पंक्ति की संख्या। सफेद प्यादा ‘घ’2 से ‘घ’4 (लाल) आया है; काला पक्ष ‘घ’7 से ‘घ’5 (नीला) चलकर उत्तर देता है।
‘घ’7 ही क्यों: काले पक्ष के मोहरे 7 और 8 पंक्तियों पर होते हैं, ठीक सफेद की 1 और 2 पंक्तियों के सामने। काली रानी ‘घ’8 पर है, अतः उसका प्यादा ‘घ’7 पर है। पहली चाल में प्यादा दो घर बढ़ सकता है, इसलिए वह ‘घ’5 पर पहुँचकर सफेद के ‘घ’4 वाले प्यादे के सामने आ जाता है।
सामाजिक विज्ञान से संबंध: अक्षर स्तंभ बताता है और अंक पंक्ति। अकेला कोई एक पर्याप्त नहीं; दोनों मिलकर 64 में से एक ही वर्ग बताते हैं। अक्षांश और देशांतर पृथ्वी के लिए यही कार्य करते हैं — और दोनों प्रणालियाँ एक ही उद्देश्य से बनीं, ताकि कोई स्थिति ऐसी लिखी जा सके कि दूसरा व्यक्ति उसे फिर से खोज ले।
क्या आप जानते हैं? शतरंज का विकास प्राचीन भारतीय खेल चतुरंग से हुआ, जो लगभग छठी शताब्दी सा.सं. में भारत में खेला जाता था। इसके चार अंग — हाथी, घोड़े, रथ और पैदल — आज के ऊँट, घोड़े, हाथी (रुख) और प्यादे बने।
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