अपने घर, विद्यालय और कुछ अन्य महत्वपूर्ण भू-चिह्नों सहित अपने स्थान या अपने गाँव का एक मानचित्र बनाइए। चतुर्दिश को दर्शाइए और दर्शाई गई कुछ महत्वपूर्ण आकृतियों को अंकित करने के लिए कुछ चिह्नों का उपयोग कीजिए जो चित्र 1.2 में दर्शाए गए हैं।
उत्तर
आपका रेखांकन केवल चित्र न रहकर सचमुच मानचित्र बने, इसके लिए उसमें ये बातें होनी चाहिए —
‘उ.’ वाला दिशा-तीर;
एक शीर्षक (“रामपुर गाँव का मानचित्र” / “मेरा मोहल्ला”);
मोटा-मोटा स्केल (“1 से.मी. ≈ 100 मी.”);
चित्र 1.2 से लिए गए प्रतीक चिह्न; तथा
प्रत्येक चिह्न का अर्थ बताने वाली संकेत-सूची।
चित्र 1.2 के उपयोगी चिह्न: पक्की सड़क के लिए दो समानांतर रेखाएँ, कच्ची सड़क के लिए टूटी हुई रेखाएँ, रेलवे लाइन के लिए धारीदार रेखा और स्टेशन के लिए RS, नदी के लिए लहरदार नीली पट्टी, कुएँ के लिए छोटा गोला, तालाब के लिए नीला भाग, मंदिर के लिए ध्वज-युक्त चिह्न तथा डाकघर, डाक एवं तार कार्यालय और पुलिस स्टेशन के लिए PO, PTO, PS।
एक नमूना रेखा-मानचित्र। आपका मानचित्र अलग होगा, पर उसमें ये चार बातें अवश्य होनी चाहिए — शीर्षक, दिशा-तीर, प्रतीक चिह्न और संकेत-सूची।
नमूना उत्तर (मानचित्र के नीचे लिखने के लिए): “मेरे मोहल्ले का मानचित्र, स्केल लगभग 1 से.मी. = 100 मी.। मेरा घर मुख्य सड़क के पूर्वी ओर है; विद्यालय लगभग 400 मीटर पश्चिम में, सड़क के दक्षिण की ओर है। मंदिर सड़क के उत्तर में तथा गाँव का कुआँ उत्तर-पूर्व में है। डाकघर (PO) मुख्य सड़क और कच्ची सड़क के चौराहे के पास है।”
निश्चित चिह्न क्यों: सन् 1767 में स्थापित भारतीय सर्वेक्षण विभाग देश का सबसे पुराना वैज्ञानिक विभाग है और वही भारत के मानचित्रों के चिह्न निर्धारित करता है। सब एक ही चिह्न प्रयोग करते हैं, इसलिए सैनिक, किसान और विद्यार्थी — सब एक ही मानचित्र को एक ही अर्थ में पढ़ पाते हैं।
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