अन्वेषण अध्याय 13 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
भारत के अनेक समुदायों में सामुदायिक सहभागिता की समान परंपराएँ हैं। क्या आप अपने क्षेत्र की कुछ ऐसी परंपराओं के बारे में बता सकते हैं?
उत्तर

भारत के लगभग हर भाग में लोगों के मिलकर, बिना किसी भुगतान के काम करने की परंपरा है। अपने दादा-दादी और पड़ोसियों से पूछिए — आपके अपने क्षेत्र में भी तीन-चार ऐसी परंपराएँ अवश्य मिलेंगी। पहचानने में सहायता के लिए देश भर के कुछ वास्तविक उदाहरण —

परंपराकहाँलोग मिलकर क्या करते हैं
श्रमदानपूरे भारत मेंगाँववासी एक दिन का श्रम नि:शुल्क देकर तालाब की गाद निकालते हैं, बंधा ठीक करते हैं, सड़क समतल करते हैं या विद्यालय की दीवार बनाते हैं
हलमाभील समुदाय, झाबुआ और पेटलावद क्षेत्र, मध्य प्रदेशहजारों लोग एक ही दिन पहाड़ी पर एकत्र होकर वर्षा जल रोकने के लिए खंतियाँ और गड्ढे खोदते हैं — यह पुरानी परंपरा आज सूखे से लड़ने का साधन बन गई है
कार सेवासर्वत्र गुरुद्वारों में, विशेषकर पंजाब मेंश्रद्धालु सरोवर और परिसर की सफाई करते हैं, लंगर बनाते और परोसते हैं, तथा जूठे बर्तन स्वयं माँजते हैं
गणेशोत्सव मंडलमहाराष्ट्र, गोवापूरी गली मिलकर चंदा जुटाती है, पंडाल बनाती है, दस दिन के कार्यक्रम चलाती है और विसर्जन का प्रबंध करती है
छठ से पहले घाटों की सफाईबिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेशपरिवार मिलकर नदी-तट साफ और समतल करते हैं तथा घाट सजाते हैं — केवल अपने लिए नहीं, सबके लिए
पूक्कलम और ओणसद्याकेरलपड़ोसी मिलकर ओणम के लिए फूलों की रंगोली और सामुदायिक भोज तैयार करते हैं
रथ खींचनातमिलनाडु, ओडिशा (रथ यात्रा)सैकड़ों हाथ मिलकर रथ खींचते हैं — ऐसा कार्य जो कोई एक परिवार कभी नहीं कर सकता
सामुदायिक मत्स्य आखेटमेघालय, मणिपुर, असमपूरा गाँव नियत दिन एक साथ तालाब या धारा में मछली पकड़ता है और पकड़ बाँट लेता है
सामुदायिक अनाज कोठारअनेक जनजातीय क्षेत्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहितफसल के बाद हर परिवार कुछ अनाज देता है ताकि बुरे वर्ष में कोई घर भूखा न रहे
मिलकर घर बनानादेश भर के गाँवों में, विशेषकर पूर्वोत्तर मेंपड़ोसी नि:शुल्क श्रम देकर छत डलवाते हैं; परिवार केवल भोजन कराता है

अपने क्षेत्र के लिए नमूना उत्तर: “हमारे मोहल्ले में दीपावली से पहले गली के सभी परिवार मिलकर गली की सफाई करते हैं और चारदीवारी पर सफेदी करते हैं। वर्षा ऋतु में कॉलोनी के युवा नालियाँ साफ करते हैं जिससे पानी न भरे। हर वर्ष हमारी निवासी कल्याण समिति रक्तदान शिविर और वृक्षारोपण कार्यक्रम कराती है, और पिछली गर्मियों में सबने मिलकर पक्षियों और आवारा पशुओं के लिए पानी का पात्र तथा छायादार स्थान बनवाया। इनमें से किसी के लिए किसी को भुगतान नहीं मिलता।”

ये परंपराएँ जीवित क्यों हैं: कुछ काम एक परिवार के लिए बहुत बड़े होते हैं और किसी सरकारी कार्यालय के लिए बहुत छोटे या बहुत बिखरे हुए। एक गली की सफाई, एक तालाब की गाद, एक त्योहार का प्रबंध — ये ठीक इसी बीच की जगह में आते हैं। सामुदायिक सहभागिता इसी जगह को भरती है, और साथ ही एक और काम करती है — जो लोग एक बार कंधे से कंधा मिलाकर काम कर चुके हों, वे दुबारा एक-दूसरे की सहायता कहीं सरलता से करते हैं।
प्र2.
हम भारत में कई त्योहार मनाते हैं। इन त्योहारों के अवसर पर लोग मिलकर अनेक गतिविधियाँ करते हैं। वे मिल-जुलकर स्थान की सजावट करते हैं और व्यंजनों को बनाते हैं। क्या ये गैर-आर्थिक गतिविधियाँ हैं? आपके विचार से इनमें क्या जीवन-मूल्य समाहित हैं।
उत्तर

हाँ — त्योहार पर लोग स्वयं जो कार्य करते हैं, वह गैर-आर्थिक है। पंडाल सजाने, आँगन बुहारने, रंगोली बनाने, प्रसाद पकाने और भोजन परोसने वाले पड़ोसियों को कोई भुगतान नहीं मिलता। वे यह सब ठीक उन्हीं भावों से करते हैं जो पृष्ठ 186 गिनाता है — कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर

एक ही त्योहार में…उदाहरणआर्थिक या गैर-आर्थिक
जो कार्य लोग स्वयं, नि:शुल्क करते हैंपंडाल सजाना, रंगोली बनाना, सामुदायिक भोज पकाना और परोसना, भजन-मंडली में गाना, बाद में सफाई करनागैर-आर्थिक
जिन कार्यों के लिए लोग भुगतान करते हैंफूल, मिठाई, दीये और नए वस्त्र खरीदना; टेंट, ध्वनि-यंत्र या बैंड बुलाना; मूर्तिकार, पुरोहित, छायाकार, बिजली मिस्त्री को देनाआर्थिक

अवैतनिक पक्ष में कौन-से जीवन-मूल्य समाहित हैं। पाँच कारण, इनमें से कोई तीन लिख सकते हैं —

  • सामुदायिक भावना। जो लोग सामान्यत: केवल नमस्ते करते हैं, वे सप्ताह भर कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। पड़ोसी मित्र बन जाते हैं, और यह त्योहार बीत जाने के बाद भी काम आता है।
  • संस्कृति का हस्तांतरण। बच्चे गीत, रंगोली के प्रारूप, व्यंजन और रीतियाँ बड़ों के साथ करके सीखते हैं — जो किसी पुस्तक या कक्षा से नहीं आ सकता।
  • समानता और समावेश। सामुदायिक भोज में धनी और निर्धन साथ बैठकर खाते हैं। पुस्तक का अपना उदाहरण लंगर है, जहाँ “सभी श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन कराया जाता है।”
  • संगठन और उत्तरदायित्व। चंदा जुटाना, काम बाँटना, हिसाब रखना, भीड़ सँभालना और बाद में सफाई करना — यह मिलकर काम करने का वास्तविक प्रशिक्षण है।
  • आनंद और अपनेपन का भाव। ये छोटी बातें नहीं हैं। पृष्ठ 193 कहता है कि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ “सामाजिक कल्याण एवं निजी कल्याण में योगदान देती हैं और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाती हैं” — त्योहार ठीक यही करता है।
क्या आपने देखा? त्योहार अपने चारों ओर बहुत-सी आर्थिक गतिविधि भी उत्पन्न करता है — फूल वाले, मिठाई की दुकान, दर्जी, कुम्हार, मूर्तिकार, बस और ऑटो चालक के लिए। अत: त्योहार इस बात का सुंदर उदाहरण है कि दोनों प्रकार की गतिविधियाँ साथ-साथ चलती हैं और एक-दूसरे की सहायता करती हैं — वास्तविक जीवन में प्राय: ऐसा ही होता है।
समय कम हो तो एक पंक्ति का उत्तर: लोगों का अपना त्योहारी कार्य गैर-आर्थिक है क्योंकि उसका कोई भुगतान नहीं होता, किंतु वह मूल्यवान है क्योंकि वह समुदाय को जोड़ता है, संस्कृति आगे बढ़ाता है, सबको साथ लेता है और आनंद देता है — इनमें से कुछ भी धन से नहीं खरीदा जा सकता।
प्र3.
क्या आप उन सामुदायिक कार्यक्रमों की पहचान कर सकते हैं जिन्हें आपके विद्यालय या आस-पास आयोजित किया गया हो? इन कार्यक्रमों में आपने क्या देखा?
उत्तर

हर विद्यालय ऐसे कार्यक्रम उससे कहीं अधिक कराता है जितना विद्यार्थी सोचते हैं। बीते विद्यालय-वर्ष और अपने मोहल्ले को याद कीजिए और उन्हें सूचीबद्ध कीजिए; फिर लिखिए कि आपने वास्तव में क्या देखा — वह नहीं जो आपको लगता है कि लिखना चाहिए।

विद्यालय और मोहल्ले के सामान्य कार्यक्रम

कार्यक्रमक्या किया जाता हैक्या प्राप्त होता है
स्वच्छता अभियानविद्यालय प्रांगण, गली, पार्क या बस-स्टॉप की सफाई; गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे रखनास्वच्छ और स्वस्थ स्थान — और दुबारा गंदा न करने की आदत
वन महोत्सव / वृक्षारोपणविद्यालय और कॉलोनी में पौधे लगाना, और कठिन भाग — पहली पूरी गर्मी उन्हें पानी देनाछाया, स्वच्छ हवा, और आरंभ किए काम को निभाने की सीख
स्वास्थ्य एवं नेत्र जाँच शिविर, रक्तदान शिविरचिकित्सक और स्वयंसेवक विद्यार्थियों तथा निवासियों की नि:शुल्क जाँच करते हैंरोग समय से पकड़ में आते हैं; अनेक विद्यार्थियों को पहली बार चश्मा मिलता है
साक्षरता या ट्यूशन अभियानबड़ी कक्षाओं के विद्यार्थी छोटों को पढ़ाते हैं, या मोहल्ले के वयस्कों को पढ़ना और हस्ताक्षर करना सिखाते हैंवास्तविक शिक्षा, और पढ़ाने वाला विद्यार्थी स्वयं और अधिक सीखता है
कंबल, पुस्तक या भोजन संग्रहसर्दियों में गर्म वस्त्र, या सत्र के आरंभ में पुस्तकें और लेखन-सामग्री एकत्र कर बाँटनाउपयोगी वस्तु व्यर्थ नहीं जाती, और जो बच्चे पुस्तकें नहीं खरीद सकते उन्हें मिल जाती हैं
जल संरक्षण, वर्षा जल संचयनटपकते नल ठीक करना, टंकी साफ करना, सोख्ता गड्ढा बनानाकम पानी व्यर्थ जाता है, और विद्यालय के जल-बिल में स्पष्ट कमी दिखती है
सड़क सुरक्षा और यातायात जागरूकतास्थानीय पुलिस के साथ रैली, पोस्टर, नुक्कड़ नाटकहेलमेट पहना जाने लगता है, ज़ेबरा क्रॉसिंग का प्रयोग होता है
योग दिवस, फिट इंडिया, मोहल्ले का खेल दिवसअभिभावक, कर्मचारी और पड़ोसी सहित सब भाग लेते हैंस्वास्थ्य, और एक ऐसा विद्यालय जो अपने मोहल्ले का अंग लगता है

नमूना उत्तर — मैंने क्या देखा: “हमारे विद्यालय में 2 अक्तूबर के सप्ताह में स्वच्छता अभियान चला। कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों, हमारे शिक्षकों, विद्यालय के कर्मचारियों और लगभग बीस अभिभावकों ने विद्यालय प्रांगण, बाहर की गली और बस-स्टॉप की सफाई की, और हमने दो डिब्बे हरे तथा नीले रंग से रंगे। चार बातों ने मुझे चौंकाया। पहली, दो घंटे के काम में कितना कचरा निकला — जिस गली से हम प्रतिदिन बिना ध्यान दिए गुजरते हैं, उससे उन्नीस बोरे। दूसरी, जैसे ही हम छोटे-छोटे समूहों में बँटकर एक-एक काम लेने लगे, काम कितनी तेजी से हुआ — जबकि पहले सब मिलकर सब कुछ कर रहे थे। तीसरी, हमारे प्रधानाचार्य और सफाई कर्मचारी एक ही झाड़ू लेकर साथ-साथ काम कर रहे थे और किसी को यह अटपटा नहीं लगा — इससे मुझे श्रम की गरिमा के बारे में किसी भी पाठ से अधिक समझ आया। चौथी, सुबह हमें देखने वाले दुकानदारों ने शाम तक अपनी दुकानों के आगे स्वयं झाड़ू लगा ली थी, बिना कहे। एक महीने बाद भी वह गली पहले से स्वच्छ थी, यद्यपि उस दिन जितनी नहीं — इसलिए हमने तय किया कि यह हर दूसरे महीने दोहराएँगे।”

यह उत्तर लिखने का सुझाव: परीक्षक अवलोकन देखना चाहते हैं, प्रशंसा नहीं। कम-से-कम एक संख्या दीजिए (कितने लोग, कितने घंटे, कितने पौधे), एक बात जो योजना के अनुसार नहीं हुई, और एक बात जो अगली बार आप अलग करेंगे। इससे साधारण अनुच्छेद एक वास्तविक विवरण बन जाता है।
विद्यालय के कार्यक्रम उस दिन से आगे क्यों महत्वपूर्ण हैं: पुस्तक कहती है कि स्वच्छ भारत अभियान “सभी भारतीय नागरिकों द्वारा सामूहिक प्रयासों पर आधारित है” और “इन सामूहिक प्रयासों से घर, आस-पास के क्षेत्र, समाज और राष्ट्र स्वच्छ रहता है।” विद्यालय का अभियान वही स्थान है जहाँ एक नागरिक पहली बार ऐसा नागरिक बनने का अभ्यास करता है। इस वर्ष आप जिन पौधों को पानी देते हैं, दस वर्ष बाद उन्हीं की छाया में कोई बैठेगा।
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