भारत के लगभग हर भाग में लोगों के मिलकर, बिना किसी भुगतान के काम करने की परंपरा है। अपने दादा-दादी और पड़ोसियों से पूछिए — आपके अपने क्षेत्र में भी तीन-चार ऐसी परंपराएँ अवश्य मिलेंगी। पहचानने में सहायता के लिए देश भर के कुछ वास्तविक उदाहरण —
| परंपरा | कहाँ | लोग मिलकर क्या करते हैं |
|---|---|---|
| श्रमदान | पूरे भारत में | गाँववासी एक दिन का श्रम नि:शुल्क देकर तालाब की गाद निकालते हैं, बंधा ठीक करते हैं, सड़क समतल करते हैं या विद्यालय की दीवार बनाते हैं |
| हलमा | भील समुदाय, झाबुआ और पेटलावद क्षेत्र, मध्य प्रदेश | हजारों लोग एक ही दिन पहाड़ी पर एकत्र होकर वर्षा जल रोकने के लिए खंतियाँ और गड्ढे खोदते हैं — यह पुरानी परंपरा आज सूखे से लड़ने का साधन बन गई है |
| कार सेवा | सर्वत्र गुरुद्वारों में, विशेषकर पंजाब में | श्रद्धालु सरोवर और परिसर की सफाई करते हैं, लंगर बनाते और परोसते हैं, तथा जूठे बर्तन स्वयं माँजते हैं |
| गणेशोत्सव मंडल | महाराष्ट्र, गोवा | पूरी गली मिलकर चंदा जुटाती है, पंडाल बनाती है, दस दिन के कार्यक्रम चलाती है और विसर्जन का प्रबंध करती है |
| छठ से पहले घाटों की सफाई | बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश | परिवार मिलकर नदी-तट साफ और समतल करते हैं तथा घाट सजाते हैं — केवल अपने लिए नहीं, सबके लिए |
| पूक्कलम और ओणसद्या | केरल | पड़ोसी मिलकर ओणम के लिए फूलों की रंगोली और सामुदायिक भोज तैयार करते हैं |
| रथ खींचना | तमिलनाडु, ओडिशा (रथ यात्रा) | सैकड़ों हाथ मिलकर रथ खींचते हैं — ऐसा कार्य जो कोई एक परिवार कभी नहीं कर सकता |
| सामुदायिक मत्स्य आखेट | मेघालय, मणिपुर, असम | पूरा गाँव नियत दिन एक साथ तालाब या धारा में मछली पकड़ता है और पकड़ बाँट लेता है |
| सामुदायिक अनाज कोठार | अनेक जनजातीय क्षेत्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित | फसल के बाद हर परिवार कुछ अनाज देता है ताकि बुरे वर्ष में कोई घर भूखा न रहे |
| मिलकर घर बनाना | देश भर के गाँवों में, विशेषकर पूर्वोत्तर में | पड़ोसी नि:शुल्क श्रम देकर छत डलवाते हैं; परिवार केवल भोजन कराता है |
अपने क्षेत्र के लिए नमूना उत्तर: “हमारे मोहल्ले में दीपावली से पहले गली के सभी परिवार मिलकर गली की सफाई करते हैं और चारदीवारी पर सफेदी करते हैं। वर्षा ऋतु में कॉलोनी के युवा नालियाँ साफ करते हैं जिससे पानी न भरे। हर वर्ष हमारी निवासी कल्याण समिति रक्तदान शिविर और वृक्षारोपण कार्यक्रम कराती है, और पिछली गर्मियों में सबने मिलकर पक्षियों और आवारा पशुओं के लिए पानी का पात्र तथा छायादार स्थान बनवाया। इनमें से किसी के लिए किसी को भुगतान नहीं मिलता।”