विधि — वही ढाँचा अपनाइए जो पुस्तक ने शालिनी और तेनजिंग के लिए अपनाया है — (1) परिवार को भारत के किसी वास्तविक स्थान पर रखिए और सदस्यों के नाम दीजिए; (2) उन्हें सामान्य काम दीजिए; (3) एक कठिनाई लाइए; (4) कोई पारिवारिक मूल्य — दान, सेवा, त्याग, सहयोग, देखभाल — उसे हल करता दिखाइए; (5) अंत में बताइए कि किसने क्या सीखा। 150–200 शब्द पर्याप्त हैं। चित्र बनाना हो तो चार-पाँच खाने बनाइए और नीचे एक-एक पंक्ति लिखिए।
रत्ना कक्षा 6 में पढ़ती है। वह अपनी माँ (जो सिलाई करती हैं), पिता (जो ऑटो चलाते हैं), दादी और छोटे भाई मनु के साथ रहती है। एक वर्ष से वह एक पुरानी साइकिल के लिए स्टील के डिब्बे में पैसे जोड़ रही थी, ताकि विद्यालय तक चार किलोमीटर पैदल न जाना पड़े। अगस्त में वर्षा से वह नीची गली डूब गई जहाँ पिता के चचेरे भाई रहते थे और उनकी सिलाई मशीन — कमाई का एकमात्र साधन — खराब हो गई।
उस शाम भोजन के समय कोई कुछ नहीं बोला। फिर रत्ना अपना डिब्बा लाकर चटाई पर रख आई। बोली, “साइकिल रुक सकती है।” पिता कुछ देर चुप रहे, फिर बोले कि जब तक डिब्बा फिर से न भर जाए, वे रोज़ दो घंटे अधिक ऑटो चलाएँगे।
छह सप्ताह बाद चाचा के घर मशीन सुधर चुकी थी और रत्ना के पास साइकिल थी — डिब्बे, पिता के अतिरिक्त घंटों और दादी की चाँदी की अँगूठी से आई हुई। जिस सुबह उसने पहली बार साइकिल चलाई, मनु मोड़ तक उसके साथ दौड़ता रहा।
पालन किए गए मूल्य: त्याग और दान, तथा हर सदस्य का सहयोग — हानि किसी एक ने अकेले नहीं उठाई।