प्र1.
इस प्रकार के अन्य अनेक उदाहरण हैं, जब लोग बिना किसी लाभ की उम्मीद के समुदाय के हित के लिए एक साथ मिलकर आगे आए। क्या आपने ऐसी किसी घटना के विषय में सुना है?
उत्तर
हाँ — ध्यान से देखें तो ऐसे उदाहरण हर ओर मिलते हैं। कुछ प्रसिद्ध उदाहरण नीचे हैं, और फिर वैसे उदाहरण जो आपकी अपनी गली में मिल सकते हैं।
| उदाहरण | लोगों ने मिलकर, बिना पारिश्रमिक क्या किया |
|---|---|
| श्रमदान | गाँव के लोग एक दिन का श्रम देकर तालाब की सफाई, बंधे की मरम्मत, रास्ता बनाने या नहर से गाद निकालने का काम करते हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र और अनेक राज्यों में पूरे-पूरे गाँव के तालाब इसी तरह पुनर्जीवित हुए हैं |
| सामुदायिक रसोई | जो भी आए उसके लिए निःशुल्क भोजन — गुरुद्वारों का लंगर, मंदिरों का अन्नदान, मस्जिदों, गिरजाघरों तथा स्थानीय समूहों द्वारा भोजन वितरण, विशेषकर बाढ़ और आपदा के समय |
| केरल की बाढ़ (2018) | मछुआरे अपनी नावें लेकर भीतरी इलाकों तक गए और हजारों फँसे लोगों को बचाया; विद्यार्थी और स्वयंसेवक हफ्तों राहत शिविर चलाते रहे |
| सफाई अभियान | मोहल्ले और विद्यालय के समूहों द्वारा समुद्र तट, नदी किनारे, उद्यान या बाजार की सफाई और कचरे को अलग करना — प्रायः गांधी जयंती पर या स्वच्छ भारत के अंतर्गत |
| रक्तदान तथा स्वास्थ्य शिविर | महाविद्यालय, कार्यालय और आवासीय समितियाँ शिविर लगाती हैं; स्वयंसेवक अनजान लोगों के लिए रक्तदान करते हैं |
| गाँव और कॉलोनी के पुस्तकालय | लोग पुस्तकें और एक कमरा देकर, बारी-बारी से एक छोटा निःशुल्क पुस्तकालय या शाम की कक्षा चलाते हैं — बिलकुल कमल परमार की कक्षाओं जैसा |
| महामारी या तालाबंदी में सहायता | पड़ोसियों ने अकेले रहने वाले बुजुर्गों तक राशन और दवाइयाँ पहुँचाईं; स्वयंसेवकों ने रोज़गार खो चुके लोगों तक भोजन के पैकेट पहुँचाए |
अपनी कॉपी के लिए नमूना उत्तर: हाँ। पिछले वर्ष तेज वर्षा के बाद हमारी कॉलोनी की नाली भर गई थी। रविवार की सुबह लगभग तीस लोग — दुकानदार, विद्यार्थी, दो ऑटो चालक और कई गृहिणियाँ — फावड़े और बाल्टियाँ लेकर निकले और नाली साफ कर दी; एक परिवार ने सबके लिए चाय भेजी। न किसी को पैसा मिला, न कोई प्रधान था। पास ही रहने वाले सफाईकर्मी ने बताया कि रुकावट कहाँ है।
इन सबमें समान बात: लोग यह काम कर्तव्य मानकर करते हैं, पारिश्रमिक के लिए नहीं — ठीक वैसे ही जैसे भीलों ने ‘हलमा’ परंपरा में किया, जिसका उद्देश्य “धरती माँ की सेवा करना है”। पृष्ठ 145 के छायाचित्र देखिए — पूरी पहाड़ी पर सैकड़ों लोग खंतियाँ खोदते हुए, अपने औजार लेकर पैदल आते हुए, ढोल बजाते हुए, और अंत में वहाँ पानी से भरा तालाब जहाँ पहले सूखी ढलान थी। उन चित्रों में कोई भी वेतन पाने वाला मजदूर नहीं है।
यह कीजिए: घर के किसी बुजुर्ग से उनके जीवन का एक ऐसा उदाहरण पूछिए — कोई कुआँ खुदा हो, विद्यालय का कमरा बना हो, सड़क सुधरी हो, या पूरे मोहल्ले ने कोई विवाह सँभाला हो। उसे वर्ष सहित लिख लीजिए। यह आपके समुदाय के इतिहास का एक टुकड़ा है।