प्र1.
क्या आप बता सकते हैं कि भारतीय भाषा में ‘कजिन’ के लिए कौन-सा शब्द है?
उत्तर
अधिकांश भारतीय भाषाओं में ऐसा कोई एक शब्द है ही नहीं। अध्याय स्वयं उत्तर देता है — “अधिकांश भारतीय भाषाओं में आपको ऐसा कोई एक शब्द नहीं मिलेगा! ऐसा इसलिए क्योंकि कजिन का अर्थ केवल ‘भाई’ और ‘बहन’ होता है।”
भारतीय भाषाएँ यह अवश्य बताती हैं कि कौन-सा भाई या बहन — संबंध माता या पिता के रास्ते बताया जाता है, पर व्यक्ति भाई या बहन ही रहता है।
| अंग्रेजी | हिंदी | हिंदी शब्द का शाब्दिक अर्थ |
|---|---|---|
| Cousin (चाचा का बेटा) | चचेरा भाई | “चाचा की ओर का भाई” |
| Cousin (बुआ की बेटी) | फुफेरी बहन | “बुआ की ओर की बहन” |
| Cousin (मामा का बेटा) | ममेरा भाई | “मामा की ओर का भाई” |
| Cousin (मौसी की बेटी) | मौसेरी बहन | “मौसी की ओर की बहन” |
ध्यान दीजिए कि संज्ञा कभी नहीं बदलती — वह सदैव भाई या बहन ही है। बोलचाल में तो पहला शब्द छूट ही जाता है; हम केवल ‘भाई’ या ‘बहन’ कहते हैं। पृष्ठ 139 की तालिका में भी यही है — रानी, जो माँ के भाई की बेटी है, हिंदी शब्द बहन के अंतर्गत दी गई है।
इसका महत्व, पुस्तक के शब्दों में: “इससे परिवार में सभी बच्चों के बीच गहरे संबंध का पता चलता है।” अंग्रेजी चाचा के बेटे को ‘कजिन’ के अलग खाने में रख देती है — भाई से एक कदम दूर। भारतीय भाषाएँ यह कदम बनने ही नहीं देतीं — वह भाई है। भाषा स्वयं बच्चे को सिखा देती है कि परिवार के सारे बच्चे एक ही भाई-बहनों का समूह हैं।
क्या आप जानते हैं? जहाँ अंग्रेजी अस्पष्ट है, वहाँ भारतीय भाषाएँ सटीक हैं। अंग्रेजी में एक ही शब्द ‘uncle’ है; हिंदी में चाचा (पिता के छोटे भाई), ताऊ (पिता के बड़े भाई), मामा (माँ के भाई) और फूफा (बुआ के पति) अलग-अलग हैं। तमिल तो बड़े भाई (अण्णा) और छोटे भाई (तंबि), बड़ी बहन (अक्का) और छोटी बहन (तंगै) के लिए भी अलग शब्द रखती है — जैसा अध्याय में बताया गया है।