अन्वेषण अध्याय 9 प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप अपने परिवार और पास-पड़ोस में किन नियमों का पालन करते हैं? ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर

घर और पड़ोस के अधिकांश नियम अलिखित होते हैं — ठीक वैसे ही जैसे पृष्ठ 143 की सामुदायिक प्रथाएँ, जिन्हें पुस्तक ‘नियम’ कहती है, यद्यपि “वे शायद ही कभी लिखे गए”। वही नियम लिखिए जिनका आप वास्तव में पालन करते हैं, और साथ में यह भी कि हर नियम किस चीज़ की रक्षा करता है।

मेरे परिवार के नियम — नमूना उत्तरयह क्यों महत्वपूर्ण है
रात का भोजन सब साथ करते हैं और सबके बैठने से पहले कोई शुरू नहीं करतायही एक समय है जब पूरा परिवार बातें करता है; समस्याएँ सबसे पहले यहीं सामने आती हैं
कहीं जाने से पहले बड़ों को बताना कि कहाँ जा रहे हैं और कब लौटेंगेसुरक्षा — और सबकी चिंता भी बचती है
खेलने से पहले गृहकार्य और बस्ता पूराकाम पहले हो जाए तो पूरी शाम बिना झगड़े बीतती है
जो जिस वस्तु का प्रयोग करे, वही उसे यथास्थान रखे; अपना कोना स्वयं साफ रखेघर का काम बँटता है, किसी एक पर नहीं पड़ता
बड़ा खर्च माता-पिता मिलकर तय करते हैंतेनजिंग के परिवार वाली प्रथा — गलती कम होती है और बराबरी का सम्मान बना रहता है
भोजन बर्बाद नहीं करना; बचा हुआ भोजन प्रयोग या साझा करनाहर थाली के पीछे लगे श्रम और पैसे का आदर
बड़ों से और घर में काम करने वाले हर व्यक्ति से शिष्टता से बोलनाआदर सबका अधिकार है, केवल बड़ों का नहीं
मेरे पड़ोस के नियम — नमूना उत्तरयह क्यों महत्वपूर्ण है
कचरा सुबह बाहर रखा जाता है, गीला और सूखा अलग-अलगगली साफ रहती है और कचरा उठाने वाले का काम संभव होता है
रात में लाउडस्पीकर नहीं; 10 बजे के बाद संगीत धीमाबच्चे पढ़ते हैं और बुजुर्ग सोते हैं; एक घर का उत्सव दूसरे की परेशानी न बने
वाहन निर्धारित स्थान पर खड़े हों, किसी के गेट के सामने नहींएंबुलेंस और दमकल का भीतर आना आवश्यक है
पानी बर्बाद न करना; साझा टंकी पर नल बंद रखनाआपूर्ति साझा और सीमित है — यह पृष्ठ 143 का ‘साझा संसाधन’ वाला नियम ही है, शहरी रूप में
पालतू पशुओं के मालिक उनकी गंदगी स्वयं साफ करें; उद्यान सबके लिए रहेयह वही नियम है जिसका उल्लेख पुस्तक आवासीय कल्याण समितियों के संदर्भ में करती है
त्योहार और सफाई अभियान में सब श्रम या धन से भाग लेंसाझा चीज़ें तभी किसी की होती हैं जब हर कोई उनमें हिस्सा ले
नियम क्यों आवश्यक हैं, एक पंक्ति में: परिवार और पड़ोस साझा स्थान हैं जहाँ समय, पैसा, पानी, शांति और ध्यान — सब सीमित हैं। नियम इन्हें बाँटने की आपसी सहमति हैं, ताकि हर दिन उसी बात पर झगड़ा न करना पड़े। पुस्तक समुदायों के बारे में यही कहती है — इन प्रथाओं से समुदायों को “संसाधनों तक सुरक्षित पहुँच” मिली, और बदले में “सभी परिवारों तथा व्यक्तियों के विशिष्ट कर्तव्य हैं, अन्यथा समुदाय सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाएँगे”।
प्र2.
क्या आपको लगता है कि परिवार या समुदाय में कुछ लोगों के प्रति कुछ नियम अनुचित होते हैं? क्यों?
उत्तर

हाँ — कुछ नियम अनुचित होते हैं, और किसी नियम की परख सरल है : जिन्हें उसे मानना है, क्या उनकी राय भी उसमें है, और क्या वह सब पर समान रूप से लागू होता है?

ऐसा नियम जो अनुचित हो सकता हैयह अनुचित क्यों हैइसका उचित रूप
भोजन और सफाई का काम केवल लड़कियाँ करें, लड़कों से न कहा जाएघर एक, काम एक, पर बोझ केवल आधे बच्चों पर — और उनकी पढ़ाई तथा खेल का समय भी घटता हैबारी-बारी की सूची, जिसमें हर बच्चे की बारी आए — जैसा तेनजिंग के पिता ने कर दिखाया
अच्छे या दूर के विद्यालय में केवल लड़कों को भेजनाबच्चे की शिक्षा इस बात पर निर्भर नहीं होनी चाहिए कि वह लड़की है या लड़काहर बच्चे को समान शिक्षा; पैसे की कमी हो तो परिवार मिलकर और खुलकर निर्णय ले
“बड़ों के बीच बच्चे न बोलें”हर बात पर लागू कर दिया जाए तो जिनके विषय में निर्णय हो रहा है वे ही चुप करा दिए जाते हैं — जैसे बच्चे की अपनी पढ़ाईपहले सुनना, फिर बोलना; और जिन बातों से बच्चे जुड़े हैं उनमें उनकी बात सुनी जाए
कॉलोनी का ऐसा नियम कि घरेलू सहायक या सामान पहुँचाने वाले मुख्य लिफ्ट या गेट का प्रयोग न करेंयह कुछ लोगों को उनके काम के कारण छोटा मानता है — जबकि कॉलोनी पूरी तरह उन्हीं पर निर्भर हैसबके लिए एक ही प्रवेश और एक ही लिफ्ट
कॉलोनी के एकमात्र मैदान में खेलने पर रोकनियम घास बचाता है और बच्चों का एकमात्र मैदान छीन लेता हैखेलने का समय और क्षेत्र तय हो — और यह बच्चों से पूछकर तय हो
कोई पुरानी प्रथा जो कुछ परिवारों को साझा कुएँ, मंदिर या सभा से दूर रखेयह अन्यायपूर्ण है और संविधान की समानता की गारंटी के विरुद्ध — कोई परंपरा इसे उचित नहीं ठहरा सकतीबिना किसी अपवाद के हर परिवार को समान पहुँच
बैठक का समय या सूचना ऐसी हो जिससे अनपढ़ या देर तक काम करने वाले छूट जाएँउन्हें ऐसे नियम मानने पड़ते हैं जिन पर वे कभी बोल ही नहीं सकेस्थानीय भाषा में घोषणा, और ऐसा समय जब काम करने वाले लोग आ सकें
किसी भी नियम को परखने के तीन प्रश्न:
1. बनाया किसने? क्या उन लोगों की आवाज़ उसमें थी जिन पर वह लागू है? पुस्तक स्वयं सराहना से कहती है कि आवासीय कल्याण समितियों में “इन समुदायों में रहने वाले लोग इन नियमों और कानूनों के निर्माण में भागीदार होते हैं”।
2. बोझ किस पर पड़ता है? जो नियम सदा उन्हीं लोगों पर भारी पड़े — सबसे छोटों, महिलाओं या सबसे निर्धनों पर — वह कितना भी पुराना हो, अनुचित है।
3. क्या इसे बदला जा सकता है? लोगों के बनाए नियम लोग बदल भी सकते हैं। यही सोचने के लिए यह प्रश्न आपसे कहा गया है।
घर में बात कैसे उठाएँ: नियम मानने से इनकार करके नहीं, बल्कि कारण पूछकर और अधिक उचित रूप सुझाकर — “क्या हम बर्तनों के लिए बारी की सूची बना लें?” जो कारण सुना जा सके, वही नियम को आदेश से अलग बनाता है।
प्र3.
कुछ ऐसी परिस्थितियों का वर्णन कीजिए जहाँ आपने देखा है कि समुदाय के सहयोग से लाभ होता है। आप इसके बारे में लिखिए अथवा चित्र बनाइए।
उत्तर

विधि — हर परिस्थिति को चार चरणों में लिखिए : (1) क्या हुआ, (2) अकेला परिवार क्या कर पाता, (3) समुदाय ने क्या किया, (4) इससे क्या अंतर पड़ा। तीन-चार परिस्थितियाँ पर्याप्त हैं। चित्र बनाना हो तो खाने बनाकर हर खाने के नीचे एक वाक्य लिखिए।

नमूना उत्तर

परिस्थितिसमुदाय ने क्या कियाक्या अंतर पड़ा
1. तेज वर्षा के बाद गली में भरा पानीरविवार सुबह लगभग तीस पड़ोसियों ने फावड़े और बाल्टियों से बंद नाली साफ की; एक परिवार ने चाय भेजी; स्थानीय सफाईकर्मी ने रुकावट का स्थान बतायापानी सप्ताह भर खड़े रहने के बजाय एक ही सुबह में निकल गया। यह काम कोई एक परिवार नहीं कर सकता था और कोई शिकायत इतनी जल्दी नहीं सुनी जाती
2. कम साधनों वाले घर में विवाहपड़ोसियों ने कुर्सियाँ, बर्तन और शामियाना दिया; चार परिवारों ने भोजन बनाया; युवाओं ने अतिथियों की व्यवस्था सँभालीपरिवार का विवाह ठीक से हुआ और कर्ज़ भी नहीं लेना पड़ा — काम और सामान का वही बँटवारा जो ग्राम समुदाय में होता है
3. विद्यालय के बाहर सड़क दुर्घटनादुकानदारों ने यातायात रोका, एक ऑटो चालक घायल को अस्पताल ले गया, किसी ने उसके घर सूचना दीकुछ ही मिनटों में सहायता मिल गई। अजनबी इसलिए आगे आए क्योंकि संकट में पड़ा व्यक्ति उनकी गली में था
4. अकेली रहने वाली बुजुर्ग महिला का बीमार पड़नापड़ोसियों ने बारी-बारी से भोजन और दवा पहुँचाई तथा उनके पास बैठे; एक विद्यार्थी ने बैंक का काम कर दियाउनकी देखभाल घर पर ही हो गई। यही हलमा का विचार है — संकट के समय किसी व्यक्ति को सहारा देना
5. गाँव का सूखा तालाबपूरे गाँव ने वर्षा से पहले तीन दिन श्रमदान करके तालाब से गाद निकाली और बंधा सुधारातालाब पूरी गर्मी भरा रहा और पास के कुएँ नहीं सूखे — झाबुआ के पास भीलों की खंतियों वाला तर्क ही
6. हमारे क्षेत्र के विद्यालय न जाने वाले बच्चेदो महाविद्यालय-छात्रों और एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने सामुदायिक भवन में शाम की निःशुल्क कक्षाएँ शुरू कीं; निवासियों ने पुस्तकें दींअगले वर्ष ग्यारह बच्चों ने नियमित विद्यालय में प्रवेश लिया — छोटे रूप में कमल परमार की कहानी की पुनरावृत्ति

निष्कर्ष में क्या लिखें: इन सबमें एक ही ढाँचा दिखता है — ऐसी समस्या जो किसी एक परिवार के बस की नहीं थी, ऐसे लोगों ने हल की जिन्हें बदले में कुछ नहीं चाहिए था, और जिन्होंने इसे पारिश्रमिक नहीं, कर्तव्य माना। पुस्तक के शब्दों में — समुदाय इसीलिए चलते हैं क्योंकि “समुदाय के अंदर सभी परिवारों तथा व्यक्तियों के विशिष्ट कर्तव्य हैं” और क्योंकि “प्रत्येक व्यक्ति कई अन्य व्यक्तियों और समुदायों पर निर्भर होता है”।

यदि चित्र बनाएँ: चार खाने अच्छे रहते हैं — समस्या, लोगों का जुटना, मिलकर काम, परिणाम। विचार के लिए पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 145 के छायाचित्र देखिए — पूरी पहाड़ी पर खंतियाँ खोदते सैकड़ों लोग, अपने औजार लेकर पैदल जाते लोग, और अंत में वहाँ पानी से भरा तालाब जहाँ पहले सूखी ढलान थी।
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