कक्षा ६ सामाजिक विज्ञान अध्याय 10 आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
अध्याय का एक ही विचार — साथ रहने वाले लोगों को नियम चाहिए, और नियमों को बनाने तथा उनका पालन कराने वाला कोई चाहिए। “जब बहुत से लोग एक साथ रहते हैं, तब असहमति और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में, समाज में व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए नियम अनिवार्य हो जाते हैं।” पुस्तक तीन शब्द स्पष्ट करती है — शासन प्रक्रिया है, सरकार वह समूह या तंत्र है जो यह काम करता है, और कानून “कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियम” हैं। नियम सदा के लिए नहीं बनते। जैसे आप घर पर माता-पिता से किसी नियम पर चर्चा कर सकते हैं या विद्यार्थी संघ विद्यालय प्रबंधन से नियम बदलने को कह सकता है, वैसे ही “समाज को संचालित करने वाले कानूनों और नियमों में नागरिक भी अपनी बात रख सकते हैं”। यही एक वाक्य पूरे अध्याय का बीज है — इसी कारण आगे चलकर लोकतंत्र की बात आती है। सरकार तीन अंगों से काम करती है। विधायिका नए कानून बनाती है, पु
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| शब्द | अर्थ | अध्याय में कहाँ | याद रखने योग्य |
|---|---|---|---|
| शासन | “निर्णयों को लेने की प्रक्रिया, नियमों के विभिन्न समूहों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना और उनका पालन सुनिश्चित करना” | पृष्ठ 150, ‘परिचय’ | यह एक प्रक्रिया है, लोगों का समूह नहीं |
| सरकार | “उन व्यक्तियों के समूह या तंत्र को कहते हैं जो नियम बनाते और इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं” | पृष्ठ 150 | शासन काम है; सरकार वह है जो यह काम करती है |
| कानून | “कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियमों को कानून कहा जाता है” | पृष्ठ 150 | हर कानून नियम है; हर नियम कानून नहीं |
| विधायिका | वह अंग जो नए कानून बनाता है, संशोधन करता है या निरस्त करता है — “जनता के प्रतिनिधियों की सभा” | पृष्ठ 153 | राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा और राज्य सभा; राज्य में विधान सभा |
| कार्यपालिका | वह अंग जो कानूनों को लागू करता है — प्रमुख, मंत्रीगण तथा कानून लागू करवाने वाले अभिकरण | पृष्ठ 153–154 | साइबर अपराध के उदाहरण में वह अभिकरण है साइबर पुलिस |
| न्यायपालिका | न्यायालयों की प्रणाली जो तय करती है कि कानून टूटा या नहीं और क्या कार्रवाई हो — कभी-कभी कार्यपालिका के निर्णय और कानून की भी जाँच | पृष्ठ 154 | अखिल भारत — भारत का सर्वोच्च न्यायालय; राज्य स्तर — उच्च न्यायालय (चित्र 10.5) |
| शक्तियों का पृथक्करण | तीनों अंगों को पृथक रखना, यद्यपि वे एक-दूसरे को प्रभावित करते और साथ काम करते हैं | पृष्ठ 154, चित्र 10.3 | उद्देश्य — नियंत्रण एवं संतुलन बनाए रखना |
| तीन स्तर | स्थानीय, राज्य या प्रादेशिक और राष्ट्रीय — “प्रत्येक स्तर भिन्न विषयों पर कार्य करता है” | पृष्ठ 155, चित्र 10.4 | बल्ब, बिजली मिस्त्री, बिजली विभाग — एक समस्या के तीन स्तर |
| औपचारिक प्रमुख | केवल नाम के प्रमुख — राष्ट्रपति और राज्यपाल वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख नहीं होते | पृष्ठ 157, चित्र 10.5 | विशेष परिस्थितियों में विशेषाधिकार, पर सामान्यत: हस्तक्षेप नहीं |
| लोकतंत्र | ग्रीक ‘डेमोस’ (लोग) और ‘क्रेटोस’ (शासन/शक्ति) से — शाब्दिक अर्थ ‘लोगों का शासन’ | पृष्ठ 159 | “संस्कृति और लोगों की पहचान और सम्मान के बिना लोकतंत्र नहीं” — रिगोबर्टा मेन्चु तुम |
| प्रतिनिधि लोकतंत्र | जनता प्रतिनिधियों को वोट देकर चुनती है, जो सभा के चयनित सदस्य होते हैं | पृष्ठ 159–160 | राज्य स्तर पर विधायक, राष्ट्रीय स्तर पर सांसद |
| प्रत्यक्ष लोकतंत्र | जहाँ प्रत्येक व्यक्ति की राय सीधे ली जाती है, जैसे पिकनिक के स्थान के लिए कक्षा का मतदान | पृष्ठ 160 | छोटे समूह में ही व्यावहारिक |
| आधारभूत/धरातलीय लोकतंत्र | “वह तंत्र… जिसमें सामान्य नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाता है” — पिरामिड का आधार | पृष्ठ 160 | यही इस अध्याय और आगे के दो अध्यायों का शीर्षक है |
अभ्यास
- महत्वपूर्ण प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- आइए पता लगाएँ
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- पाठ्य प्रश्न
- आगे बढ़ने से पहले...
- प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ